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घर खरीदते वक्त सिर्फ EMI न देखें, ये छिपे खर्च बिगाड़ सकते हैं पूरा बजट

घर खरीदते समय सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत और EMI का हिसाब लगाना पर्याप्त नहीं है. सही बजट वही है जिसमें घर की कीमत के साथ उससे जुड़े सभी टैक्स, सरकारी फीस और दूसरे खर्च भी शामिल हों.

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फ्लैट की कीमत के अलावा इन खर्चों का भी रखें हिसाब (Photo-ITG)
फ्लैट की कीमत के अलावा इन खर्चों का भी रखें हिसाब (Photo-ITG)

घर खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है. जिसे पूरा करने के लिए खरीदार अक्सर घर की कीमत और होम लोन की EMI का हिसाब तो लगा लेते हैं, लेकिन प्रॉपर्टी खरीदने के साथ आने वाले कई दूसरे खर्चों को बजट में शामिल करना भूल जाते हैं. यही खर्च बाद में अचानक बड़ा आर्थिक बोझ बन सकते हैं.

दरअसल, किसी घर की कीमत जितनी दिखाई देती है, अंतिम भुगतान उससे ज्यादा हो सकता है. स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन से लेकर GST, पार्किंग, मेंटेनेंस और दूसरे शुल्क तक कई खर्चों का ध्यान रखना जरूरी है.

घर खरीदते समय सबसे बड़े अतिरिक्त खर्चों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क शामिल होते हैं, इनकी दर पूरे देश में एक जैसी नहीं है और राज्य के हिसाब से अलग-अलग होती है. इसलिए सिर्फ फ्लैट की कीमत देखकर अपना बजट तय करना सही नहीं है. खरीदार को अपने राज्य में लागू स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क को पहले ही जोड़ लेना चाहिए.

अगर आप निर्माणाधीन फ्लैट खरीद रहे हैं तो GST का असर भी आपके कुल बजट पर पड़ सकता है. निर्माणाधीन आवासीय संपत्तियों पर लागू GST की दर संपत्ति की श्रेणी और परियोजना की स्थिति पर निर्भर करती है. मौजूदा व्यवस्था में सामान्य प्रॉपर्टी के लिए प्रभावी दर 5% और किफायती आवास के लिए 1% बताई गई है.

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वहीं, अगर किसी तैयार मकान या फ्लैट की बिक्री संबंधित प्राधिकरण से Completion Certificate जारी होने के बाद होती है, तो उस बिक्री पर GST नहीं लगता. यानी घर बुक करने से पहले यह जरूर पता करें कि प्रॉपर्टी तैयार है या निर्माणाधीन और उस पर GST लागू होगा या नहीं.

पार्किंग, मेंटेनेंस और कॉरपस जैसे शुल्क

घर की कीमत के अलावा बिल्डर आपसे पार्किंग, मेंटेनेंस का एडवांस, कॉरपस फंड और दूसरी सुविधाओं के नाम पर भी पैसे ले सकता है. UP RERA के मॉडल एग्रीमेंट में भी फ्लैट की कीमत के साथ टैक्स, पार्किंग और मेंटेनेंस के एडवांस जैसे अलग-अलग खर्चों का जिक्र किया गया है. इसलिए घर खरीदने से पहले सिर्फ फ्लैट की कीमत न देखें, बल्कि बिल्डर से पूछें कि कुल मिलाकर आपको कितनी रकम देनी होगी.

इसका मतलब है कि खरीदार को केवल 'फ्लैट की कीमत' नहीं देखनी चाहिए, उसे बिल्डर से कुल लागत का लिखित ब्रेकअप मांगना चाहिए. घर मिलने के बाद भी खर्च खत्म नहीं होता. सोसायटी के कॉमन एरिया, लिफ्ट, सुरक्षा, सफाई, मरम्मत और दूसरी साझा सुविधाओं के रखरखाव पर नियमित खर्च आता है. कानून में भी कॉमन एरिया के रखरखाव और मरम्मत से जुड़े खर्चों को कॉमन एक्सपेंस के तौर पर मान्यता दी गई है.

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यह भी पढ़ें: लाखों के फ्लैट, सड़कों पर रेंगती गाड़ियां...नोएडा एक्सटेंशन के 'महाजाम' का अंत कब

प्रॉपर्टी खरीदने पर TDS का ध्यान रखें

अगर किसी व्यक्ति की ओर से खरीदी जा रही प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा है, तो खरीदार को प्रॉपर्टी खरीद पर TDS से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना पड़ता है. आयकर विभाग के मुताबिक, अचल संपत्ति की खरीद पर TDS से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं और 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले लेनदेन के लिए TDS की आवश्यकता होती है. यह रकम सामान्य अर्थ में घर की कीमत के ऊपर कोई अतिरिक्त लागत नहीं है, क्योंकि यह विक्रेता को दिए जाने वाले भुगतान से काटकर सरकार के पास जमा की जाती है. लेकिन खरीदार के लिए यह एक जरूरी नकदी प्रवाह और अनुपालन का हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

कानूनी जांच और दूसरे लेनदेन खर्च

घर खरीदने से पहले प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की जांच करवाना भी जरूरी है. खासकर रीसेल प्रॉपर्टी में टाइटल, पुराने दस्तावेज, बकाया भुगतान, स्वीकृत नक्शा और दूसरे रिकॉर्ड की जांच में कानूनी सलाह की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा कुछ मामलों में खरीदार को ब्रोकरेज, दस्तावेज तैयार कराने, लोन प्रोसेसिंग, वैल्यूएशन या दूसरी सेवाओं के लिए भी भुगतान करना पड़ सकता है. इनकी रकम हर प्रॉपर्टी और लेनदेन के हिसाब से अलग हो सकती है.

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₹50 लाख का घर है तो सिर्फ ₹50 लाख का बजट न बनाएं

मान लीजिए किसी खरीदार को ₹50 लाख का फ्लैट पसंद आया. इसका मतलब यह नहीं है कि उसे केवल ₹50 लाख की व्यवस्था करनी है. इसके ऊपर लागू स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन, अगर लागू हो तो GST, पार्किंग या अन्य शुल्क, मेंटेनेंस/कॉरपस और लेनदेन से जुड़े दूसरे खर्च भी हो सकते हैं. इसीलिए घर खरीदने से पहले बिल्डर या विक्रेता से 'ऑल-इन कॉस्ट' या कुल भुगतान का लिखित ब्रेकअप लेना बेहतर है.

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