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₹3.97 लाख की ठगी से खुला ₹10 करोड़ के फ्यूल कार्ड का खेल, जामताड़ा-मूवाट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार

दक्षिण-पूर्वी जिला साइबर पुलिस ने जामताड़ा-मूवाट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में 100 से ज्यादा संदिग्ध फ्यूल कार्ड और करीब 10 करोड़ रुपये के संभावित ट्रेल का पता चला है. जानें क्या है पूरा मामला.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

दिल्ली में दक्षिण-पूर्वी जिला साइबर पुलिस ने जामताड़ा-मूवाट से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है. इस मामले में पुलिस ने आशीष आर्या, नासिर हुसैन और शौकीन को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, मौजूदा मामले में आरोपियों ने कुरियर अपडेट के नाम पर एक मालिशियस APK भेजकर करीब 3.97 लाख रुपये की साइबर ठगी की थी. जांच आगे बढ़ी तो इस रकम के पीछे फ्यूल कार्ड के जरिए बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन का शक सामने आया.

पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को HPCL ड्राइव ट्रैक प्लस फ्यूल-कार्ड ID में भेजा गया था. जांच के दौरान पुलिस को 100 से ज्यादा संदिग्ध फ्यूल कार्ड के बारे में जानकारी मिली है. पुलिस को शक है कि ऐसे 150 से 200 तक फर्जी फ्यूल कार्ड तैयार किए गए हो सकते हैं. इनमें से हर कार्ड की कथित लिमिट करीब 7.5 लाख रुपये थी, जिसके आधार पर पुलिस करीब 10 करोड़ रुपये के संभावित वित्तीय ट्रेल की जांच कर रही है.

जांच में नासिर हुसैन को इस नेटवर्क का कथित किंगपिन माना जा रहा है. पुलिस के मुताबिक, नासिर के लिंक साइबर फ्रॉड के कई अन्य मामलों में भी सामने आए हैं. अब पुलिस उसके नेटवर्क और दूसरे साइबर अपराधों के बीच कनेक्शन की पड़ताल कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और रकम को अलग-अलग स्तर पर कैसे इस्तेमाल किया गया.

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पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ट्रक मालिकों के KYC दस्तावेजों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया. ये दस्तावेज BlackBuck प्लेटफॉर्म के जरिए हासिल किए गए थे. आरोप है कि इन दस्तावेजों में मौजूद फोटो और दूसरे दस्तावेजों में AI की मदद से बदलाव कर फर्जी पहचान तैयार की गई. इसके बाद इन पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल फ्यूल कार्ड हासिल करने के लिए किया गया.

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि फर्जी तरीके से हासिल किए गए SIM कार्ड और वीडियो KYC का इस्तेमाल फ्यूल कार्ड के एनरोलमेंट में किया गया. इस प्रक्रिया के जरिए अलग-अलग पहचान के नाम पर कई फ्यूल कार्ड तैयार किए जाने का शक है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कार्डों को जारी कराने के लिए किस स्तर पर KYC प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं.

पुलिस के मुताबिक, फ्यूल कार्ड में जमा रकम को पेट्रोल पंपों के जरिए कथित तौर पर कैश कराया जाता था. इसके लिए कुछ पेट्रोल पंप कर्मचारियों की मदद लिए जाने का भी शक है. जांच एजेंसी अब उन पेट्रोल पंपों और संबंधित कर्मचारियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जहां इन संदिग्ध फ्यूल कार्ड के बैलेंस का इस्तेमाल या कथित तौर पर एनकैशमेंट किया गया.

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कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन और 12 SIM कार्ड बरामद किए हैं. इन मोबाइल फोन और SIM कार्ड की जांच से पुलिस को कथित साइबर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, फर्जी पहचान और पैसों के लेन-देन से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है. बरामद डिजिटल डिवाइस की जांच के साथ-साथ पुलिस संदिग्ध फ्यूल कार्ड और उनके इस्तेमाल की जानकारी भी खंगाल रही है.

फिलहाल पुलिस की जांच कई स्तरों पर चल रही है. जांच एजेंसी मालिशियस APK को ऑपरेट करने वाले लोगों की पहचान करने, अतिरिक्त फ्यूल कार्ड का पता लगाने और पेट्रोल पंप से जुड़े संदिग्ध कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है. इसके अलावा करीब 10 करोड़ रुपये के संभावित वित्तीय ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद ही इस नेटवर्क में शामिल लोगों और कथित साइबर फ्रॉड की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी.

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