यस बैंक (Yes Bank) के पूर्व एमडी राणा कपूर और सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन (Suraksha ARC) के प्रमोटर के खिलाफ ₹600 करोड़ के लोन ट्रांसफर को लेकर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई है. शिकायत हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (HDIL) से जुड़े रहे राकेश वधावन ने की है. उनका आरोप है कि लोन अकाउंट को नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित किए बिना ही उसे सुरक्षा ARC-11 ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया गया. यह मामला अब आर्थिक अपराध शाखा (EoW) तक पहुंच गया है.
राकेश वधावन ने 16 पन्नों की लिखित शिकायत भेजकर राणा कपूर, सुरक्षा ARC के प्रमोटर सुधीर वालिया और अन्य अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि पूरा लेन-देन RBI के नियमों के खिलाफ है. राकेश वधावन का कहना है कि HDIL के ₹600 करोड़ के लोन खाते को कभी भी NPA घोषित नहीं किया गया था. इसके बावजूद, खाते को अवैध तरीके से सुरक्षा ARC-11 ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया गया. इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले में गहन आपराधिक जांच की मांग उठाई है.
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डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा था लोन
शिकायत के मुताबिक, ₹600 करोड़ के लोन का यह मामला एक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा है. यस बैंक ने महाराष्ट्र के विरार स्थित 'उपवनवाले हाउसिंग प्रोजेक्ट' के लिए HDIL को ₹600 करोड़ का टर्म लोन अप्रूव किया था. राकेश वधावन ने इस लोन ट्रांसफर को ही विवाद का केंद्र बताया है. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि इस लोन के बदले बैंक के पास ₹2,000 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं. इनमें जमीन, डेवलपमेंट राइट्स, रिसीवेबल्स और दूसरी प्रतिभूतियां शामिल थीं. राकेश वधावन का कहना है कि इतनी बड़ी सिक्योरिटी होने के बावजूद अकाउंट को सुरक्षा ARC-11 ट्रस्ट को ट्रांसफर किया गया.
लोन की शर्तों पर भी उठाए सवाल
लोन समझौते के तहत 48 महीने की छूट अवधि तय थी. इसके बाद 96 महीने में पुनर्भुगतान की समय-सीमा रखी गई थी. वधावन ने कहा है कि मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा था. उनका आरोप है कि बैंक ने बिना किसी पूर्व नोटिस के अचानक इस लोन खाते को सुरक्षा ARC-11 ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया. उन्होंने सवाल उठाया है कि जब खाता NPA घोषित ही नहीं हुआ था, तो नियमों के तहत यह ट्रांसफर कैसे किया गया. इसी बिंदु पर उन्होंने EOW से निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है.