पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर माइक स्मिथ को दो साल के लिए राष्ट्रीय टीम का बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया है. स्मिथ इंग्लैंड दौरे से पहले टीम से जुड़ेंगे. हालांकि उनके सामने सिर्फ पाकिस्तान की लड़खड़ाती बल्लेबाजी को पटरी पर लाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि विदेशी कोचों के उस खराब रिकॉर्ड को भी बदलना होगा, जिसमें कई बड़े नाम समय से पहले ही टीम से अलग हो चुके हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने मंगलवार को माइक स्मिथ को सभी प्रारूपों की टीम का नया बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया. लेवल-4 कोच स्मिथ पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की अलग-अलग फ्रेंचाइजी के साथ काम कर चुके हैं. पीएसएल 2026 में वह मुल्तान सुल्तान्स के बल्लेबाजी कोच थे. अब उनकी असली परीक्षा इंग्लैंड दौरे से शुरू होगी.
स्मिथ ऐसे समय में टीम से जुड़ रहे हैं जब पाकिस्तान की बल्लेबाजी, खासकर टेस्ट क्रिकेट में, लगातार सवालों के घेरे में है. पिछले कुछ वर्षों में टीम कई मौकों पर पहली पारी में बड़े स्कोर खड़े करने और दबाव में लंबी बल्लेबाजी करने में नाकाम रही है. ऐसे में पीसीबी को उम्मीद है कि नया बल्लेबाजी कोच टीम की इस पुरानी कमजोरी को दूर कर सकेगा.
हालांकि पाकिस्तान में विदेशी कोचों का इतिहास ज्यादा उत्साहजनक नहीं रहा है. गैरी कर्स्टन, जेसन गिलेस्पी, स्टीव रिक्सन और डेव वाटमोर जैसे अनुभवी कोच भी पीसीबी के साथ लंबी पारी नहीं खेल सके. किसी का अनुबंध समय से पहले खत्म हुआ तो किसी ने मतभेदों के चलते इस्तीफा दे दिया. यही वजह है कि स्मिथ की नियुक्ति को सिर्फ एक कोचिंग बदलाव नहीं, बल्कि पीसीबी की एक नई परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है.
टी20 विश्व कप के बाद हनीफ मलिक के हटने के बाद पूर्व टेस्ट बल्लेबाज और राष्ट्रीय चयनकर्ता असद शफीक ने बांग्लादेश और वेस्टइंडीज दौरों पर अंतरिम बल्लेबाजी कोच की जिम्मेदारी संभाली थी. अब यह जिम्मेदारी स्थायी रूप से माइक स्मिथ के कंधों पर आ गई है.
अगर स्मिथ पाकिस्तान की बल्लेबाजी में निरंतरता ला पाए और विदेशी कोचों के बार-बार बदलने वाले सिलसिले को रोक सके, तो यह नियुक्ति पीसीबी के लिए बड़ा फैसला साबित हो सकती है. लेकिन अगर इतिहास दोहराया गया तो विदेशी कोचों की लंबी सूची में एक और नाम जुड़ जाएगा.