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लातूर में बनेंगी 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें, 2027 में आएगा पहला प्रोटोटाइप, रूसी कंपनी भी आई साथ

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. महाराष्ट्र के लातूर स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री से इसका पहला प्रोटोटाइप अब 31 मार्च 2027 तक बाहर आने की उम्मीद है. रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूस की ट्रांसमाशहोल्डिंग के संयुक्त उपक्रम को 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाने की जिम्मेदारी मिली है. हर ट्रेनसेट में 16 कोच होंगे.पहले इसे जून 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य था.

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आरवीएनएल और रूस की ट्रांसमाशहोल्डिंग के जॉइंट वेंचर को 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाने की जिम्मेदारी मिली है. (Photo: PTI)
आरवीएनएल और रूस की ट्रांसमाशहोल्डिंग के जॉइंट वेंचर को 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाने की जिम्मेदारी मिली है. (Photo: PTI)

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है. महाराष्ट्र के लातूर में अपग्रेड की गई मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री (MRCF) से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप मौजूदा वित्त वर्ष में बाहर आने की उम्मीद है. पहले इसे जून 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है. यह जानकारी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सलीम अहमद ने कंपनी की 23वीं वार्षिक आम बैठक में दी. कंपनी के मुताबिक, मराठवाड़ा फैक्ट्री में वंदे भारत स्लीपर के निर्माण का काम आगे बढ़ रहा है.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाने की जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड और रूस की ट्रांसमाशहोल्डिंग (Transmashholding) के जॉइंट वेंचर काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड (Kinet Railway Solutions Ltd) को दी गई है. इस जॉइंट वेंचर को महाराष्ट्र की मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री में 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाने हैं. प्रत्येक ट्रेनसेट में 16 कोच होंगे. इस तरह परियोजना के तहत कुल 1,920 कोच तैयार किए जाने हैं.

वंदे भारत स्लीपर ने बदला RVNL का कारोबार

रेल विकास निगम लिमिटेड के चेयरमैन सलीम अहमद के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर प्रोजेक्ट के साथ कंपनी के कारोबार का आकार भी बदल रहा है. कंपनी अब पारंपरिक रेलवे कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के साथ-साथ रोलिंग स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि कंपनी के ऑर्डर बुक में बदलाव, रोलिंग स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग में प्रवेश, बड़े कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए हासिल की गई परियोजनाओं में विस्तार इसका हिस्सा हैं.

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रेलवे को 158 परियोजनाएं सौंप चुकी है कंपनी

सलीम अहमद ने कहा कि पिछले वर्षों में रेल विकास निमग लिमिटेड ने कॉम्प्लेक्स रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को पूरा करने की मजबूत क्षमता विकसित की है. कंपनी की मौजूदगी देश के 16 राज्यों में है और उसका अंतरराष्ट्रीय कामकाज भी बढ़ रहा है. उनके मुताबिक, आरवीएनएल अब तक 158 परियोजनाएं भारतीय रेलवे को सौंप चुकी है. इनमें नई रेलवे लाइन, गेज परिवर्तन, रेलवे लाइन की डबलिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, वर्कशॉप और दूसरे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं. इन प्रोजेक्ट के जरिए 17,000 किलोमीटर से ज्यादा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है.

2025-26 में 173.82 किमी रेल इंफ्रा

RVNL के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने 173.82 किलोमीटर रेलवे बुनियादी ढांचे का काम पूरा कर उसे भारतीय रेलवे को सौंपा. इसमें 150.28 किलोमीटर लंबा फेफना-इंदारा-मऊ-शाहगंज सेक्शन भी शामिल है. कंपनी का कहना है कि इन परियोजनाओं से रेल परिचालन की सुरक्षा, गति और कार्यक्षमता बेहतर करने में मदद मिली है.

173 KM रेलवे लाइन इलेक्ट्रिफिकेशन

इस दौरान कंपनी ने 173 किलोमीटर रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन का काम भी पूरा किया. इसमें चार ट्रैक्शन सबस्टेशन, आठ स्विचिंग पोस्ट और 12 एससीएडीए (SCADA) सिस्टम शामिल हैं. ये काम रेलवे लाइन के दोहरीकरण और तीसरी लाइन से जुड़ी परियोजनाओं के तहत किए गए.

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पहाड़ों में टनल से वर्कशॉप तक काम

RVNL ने मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों में भी कई परियोजनाओं पर काम किया है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 23 किलोमीटर टनल की खुदाई का काम पूरा किया. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में चल रही बड़ी पहाड़ी रेल परियोजनाओं में भी कंपनी ने प्रगति दर्ज की. इसी अवधि में 19 वर्कशॉप परियोजनाएं भी चालू की गईं.

काजीपेट और वडोदरा की परियोजनाएं

कंपनी के मुताबिक, काजीपेट वैगन पीरियॉडिक ओवरहॉलिंग (POH) वर्कशॉप और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए वडोदरा पीओएच शॉप पर भी काम आगे बढ़ रहा है. दोनों परियोजनाओं को मौजूदा वित्त वर्ष में चालू करने का लक्ष्य है. सीलम अहमद ने बताया कि रेल कनेक्टिविटी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी अब तक पांच जॉइंट वेंचर वाली स्पेशल पर्पज व्हीकल (Special Purpose Vehicles) भी बना चुकी है.

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