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भारतीय बैंकों में पड़े ₹98,073 करोड़, लेने वाला कोई नहीं! अब RBI ने दिए ये निर्देश

भारतीय बैंकों में लंबे समय से बिना दावे के पड़ी रकम लगातार बढ़ रही है. अब तक करीब ₹98,073 करोड़ की अनक्लेम्ड डिपॉजिट आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर की जा चुकी थी. आरबीआई ने ऐसी रकम को लेकर बैंकों को अहम निर्देश जारी किए हैं.

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बैंक खातों में पड़ी ₹98,073 करोड़ की लावारिस रकम आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर. (सांकेतिक तस्वीर)
बैंक खातों में पड़ी ₹98,073 करोड़ की लावारिस रकम आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर. (सांकेतिक तस्वीर)

भारतीय बैंकों में लंबे समय से बिना दावे के पड़ी रकम लगातार बढ़ रही है. बैंकों ने 31 जनवरी 2026 तक अपने यहां जमा करीब ₹98,073 करोड़ के अनक्लेम्ड डिपॉजिट को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEA Fund) में ट्रांसफर कर दिया था. 30 जून 2025 तक यह रकम ₹90,545 करोड़ थी. यानी करीब सात महीनों में इसमें ₹7,528 करोड़ की बढ़ोतरी हुई.

वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में बैंक खातों में जमा रकम पर खाताधारक या उनके परिवार की ओर से लंबे समय तक कोई दावा नहीं किया जाता. हालांकि, DEA Fund में पैसा ट्रांसफर होने का मतलब यह नहीं है कि इन पैसों पर से खाताधारक या उसके कानूनी वारिस का अधिकार खत्म हो गया.

स्टेट बैंक में पड़े हैं सबसे अनक्लेम्ड पैसे

आरबीआई के डीईए फंड में सबसे ज्यादा एसबीआई ने 20 हजार 40 करोड़ की लावारिस जमा राशि ट्रांसफर की है. इसके बाद पीएनबी का नंबर आता है, जिसके 7 हजार 585 करोड़ इस फंड में हैं. वहीं, केनरा बैंक के 6 हजार 830 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा के 5 हजार 848 करोड़ और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 5 हजार 549 करोड़ डीईए फंड में जमा हैं. प्राइवेट बैंकों की बात करें तो ICICI Bank ने 2 हजार 278 करोड़ की लावारिस राशि आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर की है. एचडीएफसी बैंक के 1912 करोड़ और एक्सिस बैंक के 1734 करोड़ आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में भेजे हैं.

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बैंकों में क्यों बिना दावे के रह जाते हैं पैसे?

आरबीआई के मुताबिक, कई बैंक खातों में ग्राहकों की जानकारी पुरानी या अधूरी होती है. पुराने पते, बदले हुए मोबाइल नंबर या अपडेट न की गई ईमेल आईडी जैसी वजहों से बैंक खाताधारकों से संपर्क नहीं कर पाते. कई मामलों में खाताधारक की मृत्यु के बाद भी खाते में जमा रकम बिना दावे की रह जाती है. परिवार के सदस्यों या नॉमिनी को कई बार उस बैंक खाते की जानकारी ही नहीं होती. वहीं, जानकारी होने के बावजूद जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण खाताधारक के परिजन पैसे नहीं निकाल पाते.

पैसा DEA Fund में जाने के बाद क्या होगा?

जब किसी बैंक खाते में जमा रकम निर्धारित अवधि तक बिना दावे के रहती है, तो बैंक उसे आरबीआई के DEA Fund में ट्रांसफर कर देता है. लेकिन इससे खाताधारक या उसके कानूनी वारिस का इन पैसों पर दावा करने का अधिकार खत्म नहीं होता. अगर कोई पात्र दावेदार जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा करता है, तो संबंधित बैंक के जरिए रकम वापस प्राप्त की जा सकती है. यानी लंबे समय तक खाते में लेनदेन नहीं होने या रकम DEA Fund में ट्रांसफर होने के बावजूद दावे का रास्ता बंद नहीं होता.

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आरबीआई ने बैंकों को दिए हैं खास निर्देश

आरबीआई ने निष्क्रिय और बिना दावे वाले खातों से जुड़े खाताधारकों, नॉमिनी और कानूनी वारिसों का पता लगाने के लिए बैंकों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा बैंकों को अपनी वेबसाइट पर बिना दावे वाली जमा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने और उसे नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए हैं. इसका मकसद लोगों को अपने या परिवार के सदस्यों के भूले हुए बैंक खातों और उनमें मौजूद रकम की जानकारी हासिल करने में मदद करना है.

आबीआई ने बैंकों से पब्लिक अवेयरनेस और फाइनेंशियल लिटरेसी कैम्पेन चलाने को भी कहा है. इन अभियानों के जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि निष्क्रिय बैंक खातों को दोबारा कैसे सक्रिय कराया जा सकता है और बिना दावे वाली रकम पर दावा करने की प्रक्रिया क्या है. इसका एक अहम मकसद यह भी है कि खाताधारक अपने बैंक रिकॉर्ड समय-समय पर अपडेट रखें और अपने नॉमिनी की जानकारी सही रखें.

खाताधारकों के लिए भी जरूरी हैं ये काम

अगर आप बैंक खाताधारक हैं, तो अपने मोबाइल नंबर, पता, ईमेल और नॉमिनी की जानकारी बैंक में अपडेट रखना जरूरी है. साथ ही परिवार के सदस्यों को अपने बैंक खातों और दूसरे वित्तीय निवेशों की बुनियादी जानकारी देना भी उपयोगी हो सकता है.

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खासकर किसी खाताधारक की मृत्यु के बाद अगर परिवार को उसके बैंक खातों की जानकारी नहीं है, तो रकम पर दावा करने में परेशानी हो सकती है. जरूरी दस्तावेजों की जानकारी और रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से ऐसी स्थिति में प्रक्रिया आसान हो सकती है.

₹98 हजार करोड़ का आंकड़ा क्यों अहम?

आरबीआई के DEA Fund में ट्रांसफर की गई ₹98,073 करोड़ की रकम यह बताती है कि देश में बिना दावे वाली बैंक जमा का मुद्दा कितना बड़ा है. सात महीने में रकम का ₹90,545 करोड़ से बढ़कर ₹98,073 करोड़ होना इस समस्या के लगातार बने रहने की ओर भी इशारा करता है. अब चुनौती सिर्फ इन खातों की पहचान करने की नहीं, बल्कि वास्तविक खाताधारकों, नॉमिनी और कानूनी वारिसों तक पहुंचकर उन्हें उनका पैसा वापस दिलाने की है.

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