केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है और 31 अक्टूबर 2026 तक बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी है. चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए त्योहारी सीजन से पहले ये कदम उठाया गया है. जबकि आलोचकों का कहना है कि इथेनॉल बनाने के कारण चीनी की कमी हुई है, जिस कारण चीनी की कीमतें बढ़ी हैं और अब आयात किया जा रहा है.
चीनी को लेकर राजनीति जोड़ पकड़ने के कारण ज्यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि भारत आखिरी चीनी का उत्पादन कितना करता है, आयात कितना होता है और भारत में इसकी खपत कितनी है, क्या ? यहां एक एक करके सभी आंकड़े पेश किए गए हैं.
भारत में चीनी का बड़ा उत्पादक
भारत में चीनी का बड़े लेवल पर उत्पादन होता है. यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. महाराष्ट्र से लेकर यूपी तक बड़ी मात्रा में शुगर का उत्पादन करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल एवरेज 30 से 35 मिलियन मीट्रिक टन (300 से 350 लाख टन) कुल चीनी का उत्पादन होता है.
भारत में हर साल चीनी का उत्पादन और इथेनॉल में यूज
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2023-24 में 34 मिलियन टन चीनी का आयात हुआ था, जिसमें से 2.20 मिलियन टन इथेनॉल के लिए यूज किया गया था.
इसी तरह, साल 2024-25 में 29.70 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया गया था, लेकिन 1.70 मिलियन टन इथेनॉल में डॉयवर्ट किया गया था. वहीं साल 2025-26 में अभी तक 32.40 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ है और 3.10 मिलियन टन तक इथेनॉल में यूज किया गया है. ऐसे में देखा जाए तो चीनी उत्पादन का बहुत कम हिस्सा इथेनॉल में यूज किया जा रहा है.
कितना होता है खपत?
भारत एक बड़े लेवल पर चीनी का उत्पादन करता है, लेकिन लगभग उतना ही खपत भी खुद ही कर लेता है. जिस कारण कई बार चीनी का उत्पादन कम होने से उसे दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है. भारत में हर साल चीनी की घरेलू खपत लगभग 28 से 28.5 मिलियन टन है. वर्तमान सीजन (2025-26) में शुद्ध उत्पादन (27.9 मिलियन टन) खपत से मामूली रूप से कम रहने के कारण ही सरकार को आपातकालीन आयात का फैसला लेना पड़ा है.
गन्ने का रकबा कितना है?
चालू सीजन में भारत लगभग 5.74 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की है. जिसमें से सबसे ज्यादा गन्ने की खेती उत्तर प्रदेश में की गई है . इसके बाद महराष्ट्र और कर्नाटक जैसे देश आते हैं. इन तीनों जगहों को मिला दिया जाए तो भारत का 80 फीसदी चीनी का उत्पादन यहीं से होता है.
पिछले 10 साल में नहीं हुआ चीनी का आयात
भारत दूसरे देश से चीनी आयात करने पर 100 फीसदी की ड्यूटी लगाता है, जिस कारण में चीनी आयात 'शून्य' हो जाता है. पिछले 10 सालों से भारत ने चीनी का आयात नहीं किया था. उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, आखिरी बार साल 2016-17 में चीनी की कीमतों में तेजी के कारण आयात करना पड़ा था, क्योंकि उस साल देश में सूखा पड़ा था और गन्ने का उत्पादन बहुत कम हो गया था.
कितना चीनी का निर्यात करता है भारत?
भारत चीनी का निर्यात बहुत कम करता है. भारत सरकार ने 2025-26 मार्केटिंग सीजन के लिए 20 लाख टन (2 मिलियन टन) चीनी के निर्यात की अनुति दी है. यह चीनी प्रमुख तौर पर अफ्रीकी और एशियाई देशों जैसे सोमालिया, सूडान और जिबूती को भेजी जाएगी.
चीनी की कीमत
शुगर की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिली है. 20 अगस्त तक महाराष्ट्र में चीनी की अधिकतम कीमत 4850 / क्विंटल थी. वहीं असम की मंडी में चीनी की कीमत सबसे ज्यादा 5600 रुपये प्रति क्विंटल रही. जयपुर की मंड़ी में चीनी की कीमत 4475 रुपये प्रति क्विंटल रही. ऐसे में देखा जाए तो चीनी की कीमत पिछले एक महीने में 30 से 40 फीसदी तक बढ़ चुकी है.