चीनी (Sugar) हर उस रसोई का एक ऐसा हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल चाय से लेकर मिठाई और कई तरह के पकवानों तक में किया जाता है. इसका मुख्य काम खाने और पीने की चीजों में मिठास बढ़ाना है. चीनी का इस्तेमाल घरों के साथ-साथ मिठाई की दुकानों, होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य उद्योग में बड़े स्तर पर किया जाता है.
चीनी आमतौर पर गन्ने या चुकंदर से बनाई जाती है. भारत में गन्ना चीनी बनाने का प्रमुख स्रोत है. गन्ने से रस निकाला जाता है और उसे कई प्रक्रियाओं से गुजारने के बाद चीनी तैयार की जाती है. इसके बाद चीनी को साफ करके अलग-अलग आकार और प्रकार में बाजार तक पहुंचाया जाता है.
बाजार में सफेद चीनी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली किस्म है. इसके अलावा ब्राउन शुगर, पिसी हुई चीनी और कई अन्य प्रकार भी मिलते हैं. पिसी हुई चीनी का इस्तेमाल खासतौर पर मिठाई, केक, बिस्कुट और दूसरी बेकरी चीजों में किया जाता है. वहीं ब्राउन शुगर का इस्तेमाल कुछ पेय पदार्थों और बेकरी उत्पादों में किया जाता है.
चीनी में मुख्य रूप से सुक्रोज नाम का कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है. शरीर इसे ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल कर सकता है. इसी वजह से चीनी खाने से शरीर को जल्दी ऊर्जा मिल सकती है. हालांकि रोजाना कितनी चीनी ली जा रही है, इसका ध्यान रखना जरूरी माना जाता है.
चाय और कॉफी में चीनी का इस्तेमाल भारत में बहुत आम है. इसके अलावा हलवा, खीर, लड्डू, रसगुल्ला, जलेबी, बर्फी और अन्य मिठाइयों में भी इसका इस्तेमाल होता है. गर्मियों में कई तरह के शरबत और ठंडे पेय बनाने में भी चीनी डाली जाती है.
खाद्य उद्योग में चीनी का इस्तेमाल केवल मिठास के लिए नहीं होता. इसका उपयोग कई उत्पादों की बनावट और रंग को प्रभावित करने के लिए भी किया जाता है. जैम, सॉस, बिस्कुट, केक और पैक किए गए कई खाद्य पदार्थों में चीनी एक सामान्य सामग्री है.
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है. देश के कई राज्यों में गन्ने की खेती बड़े स्तर पर होती है और वहां चीनी मिलें भी संचालित होती हैं. गन्ने की खेती और चीनी उद्योग से किसानों के साथ बड़ी संख्या में श्रमिकों और अन्य लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है.
चीनी की खपत को लेकर पिछले कुछ वर्षों में लोगों की जागरूकता बढ़ी है. बहुत अधिक मीठे खाद्य और पेय पदार्थों का नियमित सेवन कम करने की सलाह दी जाती है. इसी वजह से कई लोग चाय और दूसरी चीजों में चीनी की मात्रा कम करने या बिना चीनी वाले विकल्प अपनाने की कोशिश करते हैं.
चीनी और दूसरी खाद्य वस्तुओं के बाद अंडों की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. सरकार ने इथेनॉल और फीड सेक्टर की बढ़ती मांग को देखते हुए मक्का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है.
यूपी के अमेठी में चीनी व्यापारियों के गोदामों और थोक दुकानों पर प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि गोदामों में निर्धारित सीमा से अधिक, खासकर 4 हजार कुंतल से ज्यादा चीनी का स्टॉक पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
चीनी को ज्यादा खाना भी खतरनाक है और अचानक छोड़ना भी मुश्किल, लेकिन ऐसा होता क्यों है? क्या चीनी में कोई नशा है? इस बारे में डॉक्टरों ने बताया है है कि ऐसा क्यों होता है.
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि केंद्र बिहार में पर्यटन के लिए 25 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है. विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर के लिए कॉरिडोर बनाने की बात भी कही. आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भाजपा आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं है.
Sugar Price Updates: कीमतों में इस अचानक उछाल का मुख्य कारण चीनी मिलों द्वारा मनमाने ढंग से दरों को बढ़ाना था. फिलहाल एक्स-मिल कीमत 67 रुपये किलो से घटकर 55 रुपये प्रति किलो हो गई.
देशभर में चीनी के बढ़ते दाम क्या फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के बजट को प्रभावित करेंगे? क्योंकि एक्शन सीक्वेंस में शुगर ग्लास को बतौर प्रॉप्स इस्तेमाल किया जाता है. जानें इस रिपोर्ट में...
चीनी खाना छोड़ना एक ट्रेंड बन गया है. चीनी अधिक खाने से नुकसान तो होता है, लेकिन क्या इसको पूरी तरह से छोड़ना सेहत के लिए ठीक है? इसके बारे में एक नई रिसर्च में बताया गया है.
प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सीएम रेखा गुप्ता दिल्ली सचिवालय में अहम बैठक बुलाई है. इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी शामिल होंगे. बाजार में इन वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों की समीक्षा की जाएगी. सरकार कीमतों में बढ़ोतकी के कारणों और आपूर्ति की स्थिति का भी जायजा लेगी.
क्या आप जानते हैं जो चीनी आज हर किसी की थाली या डाइट का हिस्सा है, वो कभी राजा-महाराजाओं के घर का ही हिस्सा हुआ करती थी.
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की सप्लाई घटने से दाम तेजी से बढ़े और सरकार को स्टॉक सीमा कड़ी करनी पड़ी. अब उत्पादन अनुमान घटने, आयात खुलने और अगले सीजन की चिंता ने बाजार पर सरकार की नजर और सख्त कर दी.
Rule Change: चीनी की कीमतों में अचानक आए तेज उछाल के बीच सरकार ने इसके आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिसका उद्देश्य चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है.
Why Sugar Price Hike: हालिया कीमतों में बढ़ोतरी मुख्यतौर पर त्योहारी मांग, पैदावार में कमी, मौसम की मार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल और कुछ स्तरों पर जमाखोरी कारण हैं.
चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं और किसानों की चिंता बढ़ी है. सरकार के अनुसार, कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग, मौसम से फसल को नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी और जमाखोरी इसके प्रमुख कारण हैं.
ISMA On Sugar Price Hike: चीनी की कीमतों में आए तगड़े उछाल को लेकर इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि इथेनॉल की वजह से ये महंगी नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे दूसरे बड़े कारण हैं.
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच जानिए आखिर 1 किलो चीनी बनाने में कितना गन्ना लगता है और 100 किलो गन्ने से कितनी चीनी निकलती है.
Modi Govt On Sugar Price Hike: चीनी की बेलगाम कीमतों को लेकर मचे राजनीतिक घमासान पर सरकार का बड़ा बयान आया है. मोदी सरकार में मंत्री प्रह्लाद जोशी ने Sugar Price Hike के पीछे के दो बड़े कारण बताए हैं.
बाजार में चीनी महंगी और चाशनी में लिपटा घेवर अब उससे भी कीमती हो गया है. ऐसे में राखी पर भइया के इंतजार में बहनों ने नई प्लानिंग बनाई है. डिमांड इस बार तोहफे की नहीं, बल्कि कांटे पर तौली गई चीनी की है. भइया अब भंवर में फंसे हैं.
भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में चीनी की कीमत में इजाफा हो रहा है, जिस कारण चीनी का संकट पैदा होता हुआ दिख रहा है. इसके पीछे दो वजह ब्राजील और मौसम को माना जा रहा है.
देश में चीनी के दाम तेजी से उछाल है. सरकार ने साफ किया है कि इथेनॉल प्रोडक्शन नहीं बल्कि कम उत्पादन, गन्ने की फसल में बीमारी और बढ़ी मांग इसके पीछे हैं. दरअसल, आलोचकों ने इथेनॉल प्रोडक्शन को बढ़ती कीमतों का जिम्मेदार ठहराया है. इस पर सरकार ने सफाई दी है.
दुनिया में भारत चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन एक दिक्कत ये है कि भारत में ही लगभग सभी उत्पादन की चीनी खपत हो जाती है. वहीं अब एक छोटी मात्रा इथेनॉल में भी यूज की जा रही है.
भारत में चीनी की किल्लत से इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने इनकार किया है और कहा है कि नए चीनी सीजन में गन्ने की पेराई आम समय से 10-15 दिन पहले शुरू हो जाएगी, जिससे घरेलू बाज़ार में नई चीनी जल्दी पहुंच सकेगी और कीमतें काबू में रहेंगी.