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Russia Oil Import: इस युद्ध से और मजबूत हुई भारत-रूस की दोस्ती, तेल आयात में रिकॉर्ड उछाल

जून महीने के दौरान रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है, क्‍योंकि मिडिल ईस्‍ट में रुकावट के दौरान भारत एनर्जी संकट का सामना कर रहा था, और उस दौरान रूसी तेल का आयात बढ़ा.

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रिकॉर्ड हाई पर भारत का रूसी तेल आयात. (Photo: File/ITG)
रिकॉर्ड हाई पर भारत का रूसी तेल आयात. (Photo: File/ITG)

अमेरिका ईरान के बीच जंग और मिडिल ईस्‍ट से एनर्जी सप्‍लाई रुकने के बाद रूस से भारत का तेल आयात तेजी से बढ़ा है. अब कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर ने एक आंकड़ा जारी किया है, जिससे ये चीजें और भी कंफर्म हो चुकी हैं कि रूसी तेल की सप्‍लाई तेजी से बढ़ी है और भारत को संकट के समय रूस ने एनर्जी की सप्‍लाई पूरी की है. 

केप्‍लर के आंकड़ें के मुताबिक, जून में भारत ने 4.93 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो उस महीने के लिए दर्ज की गई अब तक की सबसे अधिक मात्रा है. पश्चिम एशिया में आपूर्ति में रुकावट के बीच रिफाइनर कंपनियों ने रिकॉर्ड रूसी बैरल की खरीदारी की. 

जून में रूस से आयात बढ़कर 26 लाख बैरल प्रति दिन के हाई लेवल पर पहुंच गया, जिससे आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है. मई में आयात 19 लाख बैरल प्रति दिन था, जो रूस के आयात से 37 प्रतिशत अधिक था. केप्लर में रिफाइनिंग सप्लाई और मॉडलिंग के प्रमुख विश्लेषक सुमित रिटोलिया ने कहा कि रूस से खरीद बढ़ाने के साथ-साथ रिकॉर्ड आयात स्तर को बनाए रखने की क्षमता आपूर्ति में विविधता लाने और रिफाइनरी अर्थशास्त्र का प्रबंधन करने में भारतीय रिफाइनरों की सफलता को रेखांकित करती है. 

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होर्मुज से भी होने लगी एनर्जी सप्‍लाई
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, भारत की कच्चे तेल के आयात की स्थिति भी संतोषजनक दिखाई देती है. नई दिल्ली ने अगस्त तक कच्चे तेल और LPG की पर्याप्त आपूर्ति तय कर ली है. एक तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनी (OMC) के सीनियर अधिकारी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति बाजार में वापस आने लगी है, जिससे घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंताएं कम हुई हैं.

अब भारत के पास पर्याप्‍त विकल्‍प 
रिटोलिया ने कहा कि रिफाइनर आमतौर पर एक से दो महीने पहले ही कच्चे तेल की खेप बुक कर लेते हैं, जिसका मतलब है कि अगस्त तक कच्चे तेल की जरूरतें काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं. इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति का नजरिया भी अनुकूल बना हुआ है. रिटोलिया ने कहा कि अफ्रीका, रूस और वेनेजुएला से बढ़ते निर्यात, ओपेक+ (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) के उच्च उत्पादन और होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल के निरंतर प्रवाह से पर्याप्त सोर्स विकल्प उपलब्ध होने चाहिए. कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से यह भी संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद बाजार आपूर्ति की उपलब्धता को लेकर अधिक आश्वस्त है. 

फिलहाल कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर कोई चिंता नहीं हैं. धिकारी ने बताया कि रिफाइनर कंपनियों ने आपूर्ति के अलग-अलग सोर्स उपलब्ध करा लिए हैं और बाजार में खरीदारों की तुलना में विक्रेता अधिक हैं. भारत ने कच्‍चे तेल की खरीद का दायरा बढ़ाते हुए इसमें वेनेजुएला, ओमान, ब्राजील, रूस, अमेरिका, वेस्‍ट अफ्रीका देशों, साउथ अमेरिकी उत्‍पादकों और अंगोला जैसे देशों को भी शामिल किया है. 

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अभी ईरान से तेल ज्‍यादा नहीं आ सकता 
यह कदम ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने और किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिम वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को लगातार नया आकार दे रहे हैं. हालांकि, केप्लर ने कहा कि निकट भविष्य में भारत में ईरानी कच्चे तेल के आयात में कोई खास बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है, क्‍योंकि पहले से ही भारत ने कई तेल निर्यातकों से तेल के लिए कॉन्‍र्टैक्‍ट कर लिया है. हालांकि, लॉन्‍ग र्म में ईरान से तेल ज्‍यादा मात्रा में आ सकता है. 

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