भारतीय रेलवे के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने चार बड़े रेल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में इन परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई. इनकी कुल अनुमानित लागत ₹9,450 करोड़ है और इनके पूरा होने के बाद रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी.
ये चारों प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों से होकर गुजरेंगे. सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, भीड़भाड़ कम होगी और ट्रेनों की आवाजाही पहले के मुकाबले ज्यादा सुचारू और भरोसेमंद हो सकेगी.
किन रेल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी?
मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स में 173 किलोमीटर लंबी खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन शामिल है. इसके अलावा 75 किलोमीटर लंबी भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन को भी मंजूरी दी गई है. पैकेज में 90 किलोमीटर लंबी गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन तथा 72 किलोमीटर लंबी कटक-पारादीप (बड़ाबांधा) तीसरी और चौथी लाइन भी शामिल है. इन परियोजनाओं का प्रमुख उद्देश्य मौजूदा रेल रूट्स की क्षमता बढ़ाना और बढ़ते यात्री व माल यातायात के दबाव को कम करना है.
मल्टी-ट्रैकिंग से कम होगी भीड़
सरकार के मुताबिक, अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से ट्रेनों की आवाजाही में सुधार होगा. मल्टी-ट्रैकिंग की वजह से मौजूदा रूट्स पर ट्रेनों को चलाने के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी. इससे परिचालन ज्यादा कुशल बनाने और रेल सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी. नई लाइनों के जरिए यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों की आवाजाही को भी बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों के इंतजार और संचालन से जुड़ी बाधाएं कम होने की उम्मीद है.
6,448 गांवों के 60 लाख लोगों को फायदा
सरकार का अनुमान है कि इन चार परियोजनाओं से करीब 6,448 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. लगभग 60 लाख लोगों को इसका सीधा या अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है. चारों राज्यों में जिन इलाकों से ये रेल लाइनें गुजरेंगी, वहां बेहतर रेल संपर्क से लोगों की आवाजाही आसान होगी. इसके अलावा व्यापार, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.
PM गति शक्ति के तहत तैयार हैं प्रोजेक्ट
इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है. सरकार के मुताबिक इनमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक एफिशिएंसी, इंटीग्रेटेड प्लानिंग और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श को ध्यान में रखा गया है. सरकार का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही ज्यादा आसान होगी. साथ ही, निर्माण और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के जरिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
4 राज्यों में पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से इन राज्यों के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है. इनमें कुलडिहा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, भितरकनिका नेशनल पार्क, मां भद्रकाली मंदिर, मां धमराई मंदिर और पंचलिंगेश्वर मंदिर शामिल हैं. इसके अलावा तलसारी-उदयपुर, चांदीपुर बीच, पुलिकट लेक, नेलापट्टु बर्ड सैंक्चुअरी, लॉर्ड वीरराघव पेरुमल मंदिर, गदा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर और ललितगिरि जैसे पर्यटन व धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी को भी फायदा मिल सकता है.
76 MTPA अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता
इन रेल कॉरिडोर का इस्तेमाल कोयला, आयरन ओर, सीमेंट, आयरन एंड स्टील, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई के लिए होता है. सरकार के मुताबिक, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इन रूट्स पर करीब 76 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता तैयार होगी. सरकार का अनुमान है कि इससे देश की लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, करीब 13 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी और लगभग 65 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन घटने की संभावना है. सरकार ने इसे करीब 2.60 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के रूप में बताया है.
रेलवे के लिए क्यों अहम हैं ये चार प्रोजेक्ट?
इन चार परियोजनाओं से रेलवे को एक साथ यात्री और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी. खासकर व्यस्त रूट्स पर अतिरिक्त लाइनें उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा. फिलहाल इन चार परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है. अब जल्द ही इन चारों रेल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है. परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इन रूट्स पर रेल कनेक्टिविटी, माल ढुलाई क्षमता और ट्रैफिक मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.