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RBI की स्ट्रेटेजी हिट... रुपये ने दिखाया दम, दो दिन में डॉलर के मुकाबले 86 पैसे हुआ मजबूत

Dollar vs Rupee: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी दिखी. 14 अक्टूबर की सुबह मार्केट खुलने के साथ रुपया 44 पैसे मजबूत होकर 94.92 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक दबाव रुपये की आगे की चाल को प्रभावित कर सकते हैं.

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आरबीआई के उपायों से मिले सपोर्ट के कारण भारतीय रुपया लगातार दूसरे दिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ. (File Photo)
आरबीआई के उपायों से मिले सपोर्ट के कारण भारतीय रुपया लगातार दूसरे दिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ. (File Photo)

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए कदमों का असर दिखा और रुपया शुरुआती कारोबार में 44 पैसे मजबूत होकर 94.92 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपये में तेजी आई थी. अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या रुपया 95 के स्तर से नीचे टिककर और मजबूत होगा, या डॉलर की मांग और वैश्विक दबाव उसकी बढ़त पर ब्रेक लगा देंगे.

मुंबई के इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में 14 अक्टूबर को रुपया 95.05 प्रति डॉलर पर खुला. इसके बाद इसमें और मजबूती आई और यह 94.92 के स्तर तक पहुंच गया. पिछले बंद भाव के मुकाबले यह 44 पैसे की बढ़त थी. रुपया मंगलवार को भी 42 पैसे चढ़कर 95.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स के मुताबिक, रुपये को संभालने के लिए RBI की ओर से उठाए गए हालिया कदमों से करेंसी मार्केट को सहारा मिला है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उठाए गए कदमों का मकसद डॉलर की तत्काल मांग घटाना और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी वाली पोजीशन पर लगाम लगाना है.

डॉलर की मांग घटाने के लिए RBI ने क्या किया?

रुपये पर दबाव कम करने के लिए RBI ने कई कदम उठाए हैं. इनमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डॉलर जरूरतों को स्पॉट मार्केट से हटाने के लिए विशेष व्यवस्था और फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियम सख्त करना शामिल है. केंद्रीय बैंक ने बैंकों को 20 लाख डॉलर से ज्यादा की खरीद पर 20 फीसदी रिजर्व रखने का निर्देश भी दिया है. इन कदमों का मकसद बाजार में डॉलर की मांग और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी को सीमित करना है. हालांकि, रुपये की आगे की चाल इस बात पर भी निर्भर करेगी कि डॉलर की मांग और वैश्विक बाजारों का रुख कैसा रहता है.

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फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स के मुताबिक, अगर रुपया 95 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे टिकता है, तो इसमें और मजबूती आ सकती है. ऐसी स्थिति में 94.50 का स्तर अगला अहम पड़ाव हो सकता है. हालांकि, यह बाजार का अनुमान है, कोई तय लक्ष्य नहीं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा था कि पिछले डेढ़ साल में रुपये में काफी गिरावट आई है. उन्होंने यह भी कहा कि रुपये की अस्थिरता के पीछे बाहरी चुनौतियों की बड़ी भूमिका है. RBI का जोर रुपये में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने पर है, जबकि सरकार घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत रखने पर ध्यान दे रही है.

डॉलर कमजोर, लेकिन कच्चे तेल में तेजी

डॉलर इंडेक्स बुधवार को 0.06 फीसदी गिरकर 102.11 पर था. यह इंडेक्स छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है. दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.57 फीसदी बढ़कर 106.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. तेल महंगा होने पर आयात के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे में RBI के कदमों के बावजूद वैश्विक बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा.

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रुपया मजबूत, लेकिन शेयर बाजार लाल

रुपये में तेजी के बीच घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी दिखी. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 32.96 अंक गिरकर 73,000.82 पर और निफ्टी 32.65 अंक टूटकर 22,688.75 पर था. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में 1,305.13 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की. यानी रुपये की मजबूती और शेयर बाजार की चाल में फिलहाल एक जैसा रुख नहीं दिखा. रुपये के लिए फिलहाल 95 प्रति डॉलर का स्तर अहम माना जा रहा है. RBI के हालिया कदमों से रुपये को शुरुआती सहारा जरूर मिला है, लेकिन लगातार मजबूती के लिए बाजार की परिस्थितियों का साथ देना भी जरूरी होगा. आने वाले कारोबारी सत्र बताएंगे कि रुपये की यह वापसी कितनी टिकाऊ साबित होती है.

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