
लद्दाख की खूबसूरत वादियों तक पहुंचना अब पहले से आसान होगा. ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले दर्रों और दुर्गम रास्तों के बीच बसे इस इलाके में सड़क, बिजली, एयर कनेक्टिविटी और पानी की सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 15 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करीब 3,350 करोड़ रुपये की पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया. इन परियोजनाओं से न सिर्फ लोकल लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, बल्कि लद्दाख घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए भी सफर पहले से बेहतर हो सकता है.
इन प्रोजेक्ट में सबसे खास 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दारचा सड़क है. बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने इस सड़क का निर्माण किया है. यह रोड लेह के निमू को हिमाचल प्रदेश के दारचा से जोड़ती है और दुर्गम जांस्कर घाटी से होकर गुजरती है. इसके शुरू हो जाने अब लद्दाख जाने वालों को एक और नया ऑप्शनल रूट मिलेगा.
यह भी पढें: सड़क पर चलती SUV बन जाएगी पिक-अप! पेश हुई अनोखी कार
फिलहाल श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाईवे ही लद्दाख तक पहुंचने के सबसे प्रमुख सड़क मार्ग है. निमू-पदुम-दारचा सड़क इन दोनों रूट के अलावा एक और एक्स्ट्रा रूट का ऑप्शन देगी. यह रास्ता हिमालय के सबसे टफ ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरता है. इस दौरान शिंकुन ला जैसे ऊंचे दर्रे को भी पार करना पड़ता है. इससे रोड कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ जांस्कर घाटी तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा.

राइडर्स के लिए क्यों ख़ास है ये रूट
निमू-पदुम-दारचा का 298 किलोमीटर लंबा नया सड़क रूट मोटरिस्ट, ट्रिप लवर्स और बाइक राइडर्स के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है. हिमालय के दुर्गम पहाड़ों और खूबसूरत जांस्कर घाटी से होकर गुजरने वाला यह रास्ता लद्दाख तक पहुंचने के लिए एक नया ऑप्शन देगा. अभी ज्यादातर लोग मनाली-लेह या श्रीनगर-लेह हाईवे के जरिए लद्दाख पहुंचते हैं, लेकिन इस नए रूट से राइडर्स और रोड ट्रिप के शौकीनों को अपनी यात्रा का प्लान बनाने में ज्यादा ऑप्शन मिलेगा. शिंकुन ला जैसे ऊंचे दर्रे और पहाड़ों के शानदार नजारे इस सफर को रोमांचक बना सकते हैं. खासकर बाइक राइडर्स और एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों के लिए यह रास्ता हिमालय की खूबसूरती को करीब से अनुभव करने का नया मौका होगा.
लेह एयरपोर्ट पर बढ़ेगी फेसिलिटी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट पर बने नए यात्री टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन किया. इसे करीब 640 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है. तकरीबन 23,800 वर्ग मीटर में फैले इस टर्मिनल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि, ये सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है.
इस टर्मिनल में जियोथर्मल एनर्जी का इस्तेमाल किया गया है. इससे न केवल एनर्जी की सेविंग होगी बल्कि इस खूबसूरत इलाके में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी. नए टर्मिनल से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ लद्दाख की एयर कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

यह भी पढें: TVS-Chetak को टक्कर, 250KM रेंज वाला स्कूटर लॉन्च, ₹999 में करें बुक
लद्दाख में एनर्जी इंफ्रा को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने 9 मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना का भी उद्घाटन किया है. इसके साथ ही 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खाल्त्सी ट्रांसमिशन लाइन भी शुरू कर दी गई है. इन प्रोजेक्टस के साथ इलाके में इलेक्ट्रिसिटी नेटवर्क और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भी बेहतर हो सकेगा.
लद्दाख की पहचान सिर्फ उसके पहाड़ों और प्राकृतिक खूबसूरती तक सीमित नहीं है. यहां चट्टानों पर उकेरी गई प्राचीन कलाकृतियां भी क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति की अहम झलक पेश करती हैं. इसी विरासत को बचाने के लिए लेह के सिंधु घाट पर भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन किया गया है. इस पार्क में प्राचीन शैलचित्रों और चट्टानों पर बनी नक्काशी को सुरक्षित रखा गया है.
प्रोजेक्ट हिम सरोवर
लद्दाख में पानी की उपलब्धता और उसके सही इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में 40 वॉटर बॉडीज तैयार किए गए हैं. पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट का भी उद्घाटन किया है. इससे लद्दाख के इलाके में न केवल पानी की समस्या को हल करने की कोशिश की जाएगी, बल्कि जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. इसका फायदा आम जीवन के साथ-साथ खेती किसानी में भी देखने को मिलेगा.