सीनियर असिस्टेंट एडिटर अश्विन सत्यदेव आजतक डिजिटल में ऑटोमोबाइल सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. अश्विन ऑटो इंडस्ट्री की खबरों पर पैनी नजर रखने वाले उन पत्रकारों में से हैं, जिनके लिए गाड़ियां सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि एक जुनून हैं. इनके लिए ऑटोमोबाइल बाजार महज एक खबर नहीं, एक धड़कता हुआ इकोसिस्टम है जहां इंजन की घरघराहट और सेल्स ग्राफ, दोनों एक कहानी कहते हैं. रेस के थ्रॉटल से लेकर मार्केट के जिग-जैग तक, ऑटो सेक्टर की हर छोटी-बड़ी हलचल को समझने का हुनर इनके पास है. ऑटो इंडस्ट्री की खबरें, नए लॉन्च की जानकारी, गाड़ियों का रिव्यू या बाजार के ट्रेंड्स की एनालिसिस— अश्विन अपने शब्दों से हर खबर को आसान और दिलचस्प बना देते हैं. ओपिनियन हो या रिपोर्टिंग, लिखने में इनका अंदाज साफ, सटीक और भरोसेमंद रहता है.
आजतक डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अश्विन राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान टाइम्स और जनसत्ता जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पत्रकारिता को 18 साल दे चुके अश्विन, केवल डिजिटल मीडिया में ही 15 साल बिता चुके हैं. लखनऊ के एक दैनिक अखबार से अश्विन ने बतौर क्राइम रिपोर्टर शुरुआत की थी. लगातार आगे बढ़ते इस सफर में उन्होंने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान बनाई.
साल 2011 में डिजिटल मीडिया में कदम रखने के बाद अश्विन ने अपने मशीन प्रेम को नई दिशा दी. इंडिया की पहली मल्टीलिंगुअल ऑटोमोबाइल वेबसाइट 'ड्राइवस्पार्क' के लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रहें और हिंदी टीम का नेतृत्व किया. राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान टाइम्स, जनसत्ता— मीडिया के बड़े नामों के साथ अश्विन ने बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं. 'आग' उर्दू अख़बार और 'ETV' रिजनल चैनल जैसे प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग भी की. उनके विविध अनुभवों में वुडवर्किंग इंडस्ट्री की B2B मैगजीन 'प्लाई गज़ट' भी शामिल है. यहां उन्होंने लकड़ियों की बारीकी को भी समझा, पहली बार जाना कि 'सनमाइका' ब्रांड है और लकड़ी जैसे सख्त दिखने वाले लैमिनेट्स असल में 'फॉर्मेल्डिहाइड' में डूबी कागज की लुग्दी. तब्दीली की ये मुसाफ़िरत सिर्फ नौकरी बदलने की नहीं थी, ये नज़र और नजरिए को धार देने का सफर था.
MCRP भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई और उर्दू अख़बार से ख़बरों की अलिफ-बे सीखने वाले अश्विन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आते हैं. उनका जीवन भी काम की ही तरह विविधता से भरा रहा है. ऑफ द रिकॉर्ड जानकारी ये है कि अश्विन सिर्फ खबरें ही नहीं कविताएं भी लिखते हैं. शब्दों के साथ मसालों का संयोजन बिठाना भी बखूबी जानते हैं. इनकी रिपोर्ट की तरह, इनके बनाए खाने में भी आपको भरपूर रस मिलेगा. सोशल मीडिया पर अश्विन के टू-लाइनर्स और रचनाओं को 'गिलहरी' (#Gillahari) हैशटैग के साथ ढूंढा जा सकता है. शायद शब्दों और स्वाद का ये जोड़ ही उनकी खबरों में मिलने वाले अलग से फ्लेवर की वजह है. उनका बात करने का अंदाज भी उनकी खबरों की तरह है— सीधा, सटीक और बिना फालतू घुमाव के.