Ethanol in Diesel: जिस इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर तेल का आयात घटाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वही डीजल के साथ मिलते ही सेफ्ट पर सवाल खड़े करने लगा है. E20 पेट्रोल को लेकर छिड़े घमासान के बीच केंद्र सरकार ने डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर बड़ा फैसला किया है. सरकार के अनुसार, फिलहाल डीजल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की जाएगी. आइये जानें क्या है पूरा मामला-
सरकार ने डीजल में इथेनॉल मिलाने का टेस्ट कराया और नतीजा सामने आया तो पूरा प्लान ही ठंडे बस्ते में चला गया. वजह थी डीजल का फ्लैश प्वाइंट (Flash Point), यानी आग पकड़ने से जुड़ा बेहद अहम सेफ्टी पैरामीटर. इथेनॉल मिलते ही डीजल का फ्लैश प्वाइंट काफी नीचे चला गया, जिससे स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और हैंडलिंग के दौरान आग का खतरा बढ़ सकता है. यानी डीजल को लेकर सरकार ने साफ कह दिया है कि यहां इथेनॉल की एंट्री फिलहाल नहीं होने वाली.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि सरकारी तेल कंपनियों ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटरों के जरिए इथेनॉल और डीजल के ब्लेंडिंग की जांच की. इस टेस्ट में सर्टिफाइड लैब, ऑटोमोबाइल कंपनियों और दूसरे तकनीकी संस्थानों की भी मदद ली गई. ताकि इस बात की तस्दीक की जा सके कि, डीजल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग का क्या असर होगा.
क्या आया सामने?
जांच के दौरान पाया गया कि डीजल में इथेनॉल मिलाने से फ्लैश प्वाइंट काफी नीचे चला जाता है. मंत्री के मुताबिक इथेनॉल के कारण इथेनॉल-ब्लेंडेड डीजल तय फ्लैश प्वाइंट मानकों को पूरा नहीं कर पाया. इसी वजह से सरकार ने डीजल में इथेनॉल मिलाने की योजना को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है.
क्या होता है फ्लैश प्वाइंट, क्यों है जरूरी
किसी भी फ्यूल का फ्लैश प्वाइंट उसकी सेफ्टी से जुड़ा एक अहम पैमाना होता है. आसान भाषा में समझें तो फ्यूल में फ्लैश प्वाइंट उस सबसे कम तापमान को कहते हैं, जिस पर फ्यूल से निकलने वाली भाप हवा के साथ मिलकर किसी भी एक्स्टर्नल फायर या चिंगारी के संपर्क में आने पर थोड़े समय के लिए आग पकड़ सकती है. फ्लैश प्वाइंट जितना कम होगा, फ्यूल उतनी आसानी से आग पकड़ सकता है. डीजल को स्टोर करने, टैंकरों से ले जाने और पेट्रोल पंपों पर अंडरग्राउंड स्टोरेज के दौरान यह बड़ा जोखिम बन सकता है. यही वजह है कि सरकार ने टेस्ट के नतीजों के बाद डीजल में इथेनॉल मिलाने से दूरी बना ली है.
यहां यह भी समझना जरूरी है कि, फ्लैश प्वाइंट का मतलब यह नहीं है कि उस तापमान पर फ्यूल अपने आप जलने लगेगा, बल्कि आग या चिंगारी जैसे एक्सटर्नल सोर्सेज की मौजूदगी जरूरी होती है.
E20 को लेकर क्या है प्लानिंग
डीजल के बाद अब सवाल पेट्रोल में इथेनॉल का डोज बढ़ाने को लेकर है. सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. सुरेश गोपी ने राज्यसभा में कहा कि पेट्रोल में E20 से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है. भविष्य में अगर इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का फैसला लिया जाता है तो उससे पहले साइंटिफिक और टेक्निकल लेवल पर स्टडी किया जाएगा. इसके साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों, सरकारी तेल कंपनियों और रिसर्च इंस्टिट्यूट समेत सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी.
सरकार ने E20 पेट्रोल को पूरी तरह सुरक्षित बताया है. सरकार का कहना है कि, इस फ्यूल को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अलग-अलग लैब टेस्ट और फील्ड ट्रायल किए हैं.
इन जांच में इंजन की लाइफ, ड्राइविंग एक्सपीरिएंस, इंजन स्टार्टिंग, रस्टिंग (जंग लगना) और अलग-अलग मटेरियल के साथ फ्यूल की कम्पैटिबिलिटी के साथ ही फ्यूल एफिशिएंसी जैसे कई पहलुओं को देखा गया. इन सभी मामलों में E20 पेट्रोल पूरी तरह से बेहतर और सुरक्षित है.
सरकार के मुताबिक पुराने यानी पहले से सड़क पर चल रहे वाहनों में भी E20 के इस्तेमाल के कारण परफॉर्मेंस में कोई बड़ा बदलाव या बड़ा नुकसान देखने को नहीं मिला है. मंत्री ने बताया कि E15+ पेट्रोल का इस्तेमाल तीन साल से ज्यादा समय से बड़े पैमाने पर हो रहा है, जबकि E19-E20 फ्यूल भी ढाई साल से ज्यादा समय से इस्तेमाल में है.
सरकार के अनुसार देश में 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर चल रही हैं. सरकार का कहना है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित सबूत सामने नहीं आया है, जिससे बड़े पैमाने पर इंजन फेल होने या वाहनों के खराब होने को इथेनॉल ब्लेंडिंग से सीधे जोड़ा जा सके.
कुल मिलाकर सरकार ने डीजल में इथेनॉल मिलाने का रास्ता बंद कर दिया है, क्योंकि इससे फ्लैश प्वाइंट कम होने की वजह से सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो रहा है. वहीं पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल यानी E20 से आगे बढ़ने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. सरकार का कहना है कि आगे कोई भी कदम वैज्ञानिक जांच, टेक्निकल स्टडी और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री समेत सभी संबंधित पक्षों से सलाह के बाद ही उठाया जाएगा.