CBG Bio Gas in CNG: देश में अभी E20 को लेकर घमासान मचा ही हुआ था कि, अब CNG में भी ब्लेंडिंग शुरू हो गई. हाल ही में सरकार ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) में बायोगैस के ब्लेंडिंग का ऐलान किया था. इस बीच भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी BPCL ने एक आधिकारिक वीडियो जारी कर बताया है कि किस तरह CNG में कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) की ब्लेंडिंग की जा रही है. खास बात यह है कि यह गैस जमीन के नीचे से निकालने के बजाय खाने के कचरे, गोबर और फसलों के वेस्ट से तैयार की जाती है.
केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में 'नेशनल सर्कुलर बायो-एनर्जी स्कीम – गोवर्धन' (GOBARdhan) को मंज़ूरी दी है. इसके तहत कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार ने कहा कि GOBARdhan (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) स्कीम इस फाइनेंशियल ईयर से शुरू होगी जो आगामी 2036 तक लागू रहेगी.
ख़ास बात ये है कि, इस स्कीम के तहत फेज़्ड मैनर में सिलसिलेवार ढंग से सीएनजी में सीबीजी की ब्लेंडिंग की जाएगी. वित्त वर्ष 2026-27 में ब्लेंडिंग का टार्गेट 3 प्रतिशत रखा गया है. इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में Bio-CNG की हिस्सेदारी बढ़ाकर 4 प्रतिशत की जाएगी. वित्त वर्ष 2028-29 से यह हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. यानी हर साल तकरीबन 1% का इजाफा किया जाएगा.
BPCL गैस में मिल रहा बायोगैस?
BPCL ने अपने सोशल मीडिया पेज पर जारी वीडियो में बताया है कि CNG से चलने वाले वाहन अब पहले से ज्यादा पर्यावरण के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. इसकी वजह CNG में CBG की ब्लेंडिंग है. कंपनी के मुताबिक CBG को CNG के साथ मिलाकर पेट्रोल पंप तक पहुंचाया जाता है और इसके बाद इसे रेगुलर CNG की तरह ही वाहनों में भरा जा सकता है.
CBG और CNG में सबसे बड़ा अंतर इनके बनने के तरीके का है. CNG एक फॉसिल फ्यूल है, जिसे जमीन के नीचे से निकाला जाता है. वहीं CBG खाने के कचरे, फसलों के वेस्ट और पशुओं के गोबर जैसे जैविक पदार्थों से तैयार की जाती है. इस वजह से CBG को एक किफायती फ्यूल माना जा रहा है. वीडियो में बताया गया है कि, इस ब्लेंडिंग के लिए आपको अपने गाड़ी में किसी तरह का बदलाव करने की जरूरत नहीं है.
क्या CBG से घटेगा CNG का माइलेज.
BPCL के वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर CNG में CBG मिलाने को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कई यूजर्स ने इस फ्यूल ब्लेंडिंग को लेकर सवाल उठाए हैं. कुछ लोगों का मनना है कि, E20 पेट्रोल की ही तरह सीबीजी के इस्तेमाल से भी वाहनों के माइलेज में गिरावट आ सकती है. लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है. क्योंकि तकनीकी तौर पर CBG और CNG दोनों में मुख्य रूप से मीथेन गैस ही होती है.
इंडियन ऑयल की एक रिपोर्ट के अनुसार, CBG की कैलोरिफिक वैल्यू भी CNG जितनी (करीब 52,000 kJ/kg) होती है. इसलिए इसका इस्तेमाल ऑटोमोटिव फ्यूल की तरह आसानी से किया जा सकता है. इसलिए जहां तक सामान्य परिस्थितियों में कार की परफॉर्मेंस या ड्राइविंग एक्सपीरिएंस या माइलेज की बात है जो इसमें किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है.
दूसरी कंपनियों की क्या है तैयारी
फिलहाल CNG में CBG ब्लेंडिंग को लेकर आधिकारिक वीडियो BPCL की तरफ से सामने आया है. दूसरी तेल कंपनियां भी इसी तरह CBG की ब्लेंडिंग कर रही हैं या नहीं, इसकी पूरी जानकारी अभी साफ नहीं है. ऑटोमोबाइल कंपनियां भी बायोगैस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर तैयारी कर रही हैं. मारु़ति सुजुकी ने हाल ही में अपने एनुअल इंटीग्रेटेड रिपोर्ट में चार बायोगैस प्लांट्स में निवेश की योजना का भी जिक्र किया है. ऐसे में आने वाले समय में CBG का इस्तेमाल सिर्फ मौजूदा CNG नेटवर्क तक सीमित रहने के बजाय और तेजी से बढ़ सकता है.