महाराष्ट्र सरकार ने मॉनसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगाए गए सालाना प्रतिबंध को 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है. साथ ही, इससे प्रभावित मछुआरों को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. सरकार हर मछुआरे को 50,000 रुपये की सहायता देने पर विचार कर रही है.
मछली पालन मंत्री नितेश राणे ने सोमवार को विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के देर से शुरू होने की वजह से केंद्र सरकार ने पहले पश्चिमी तट पर 1 जून से 31 जुलाई तक रोक लगाई थी लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है.
प्रतिबंध क्यों बढ़ाया गया?
मंत्री ने बताया कि इस प्रतिबंध का मकसद मछली के स्टॉक को बचाना, समुद्री प्रजातियों को पर्याप्त समय तक अंडे देने का मौका देना और मछली पालन को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है. साथ ही, खराब मौसम, तेज हवाओं, चक्रवात, अनियमित बारिश और उथल-पुथल वाले समुद्र से मछुआरों की सुरक्षा भी इसका उद्देश्य है.
मछुआरों को मिलेगी आर्थिक मदद
नितेश राणे ने कहा कि प्रतिबंध बढ़ने से मछुआरों की आय पर असर पड़ रहा है.इसलिए सरकार उनकी मदद के लिए 50,000 रुपये तक की सहायता देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रस्ताव जल्द मंजूर हो जाएगा.
नितेश राणे ने विधानसभा में मछली पालन विभाग की उपलब्धियां गिनाने हुए कहा कि सरकार ने मछली पालन क्षेत्र को कृषि का दर्जा दे दिया है, जिससे मछुआरे किसानों जैसी सब्सिडी और छूट ले सकें. मछली बीज (सीड) उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है. जिला नियोजन समितियों को अपनी 5 प्रतिशत राशि मछली पालन विकास पर खर्च करने की सलाह दी गई है.
पहली बार आंतरिक (इनलैंड) मछली पालकों को अनियमित बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान के लिए 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल सिस्टम बनाया जा रहा है, जिसमें तालाब आवंटन, मछली पालन समितियों का रजिस्ट्रेशन आदि शामिल होंगे.
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 1,240 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे आधुनिक मछली बाजार बनाए जाएंगे. इससे मछुआरे सीधे बाजार तक पहुंच सकेंगे और उपभोक्ताओं को ताजी मछली मिलेगी. मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार मछुआरों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है.