किसान
एक किसान कृषि से जुड़े व्यक्ति होता है, जो फसल और सब्जियां उगाते हैं. एक किसान खेती की जमीन का मालिक हो सकता है या दूसरों के स्वामित्व वाली भूमि पर मजदूर के रूप में काम कर सकता है, लेकिन अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, एक किसान आमतौर पर एक खेत का मालिक होता है, जबकि खेत के कर्मचारियों को खेत में काम करने वाले या फार्महैंड के रूप में जाना जाता है (Farmer).
Maharashtra Monsoon Delay: मौसम विभाग ने इस साल औसत से कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे किसानों की टेंशन बढ़ गई है. वहीं, महाराष्ट्र में मॉनसून की अच्छी बारिश में हो रही देरी के बीच ठाले जिला प्रशासन ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई टालने की सलाह दी है और सूखे से निपटने के लिए आकस्मिक फसल योजना तैयार की है.
मोनोक्रोटोफॉस खतरनाक कीटनाशक है, जिसे दुनिया के कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन भारत में जब भी इस जानलेवा जहर को पूरी तरह बैन करने की बात उठी तो'समीक्षा' के नाम पर नया ड्राफ्ट लाकर कंपनियों को इससे कमाई करने के चोर-दरवाजे दे दिए गए.
जून का महीना बागवानी के लिए सुनहरा मौका होता है, क्योंकि इस समय लगाए गए गर्मी सहने वाले फूल पूरे सीजन बगीचे को रंगों से भर देते हैं. सही पौधों का चुनाव और थोड़ी देखभाल से गार्डन लंबे समय तक खिलता-खिलता और आकर्षक बना रह सकता है.
किचन गार्डन में खाद डालना पौधों की सेहत के लिए जरूरी है, लेकिन इसका संतुलन बिगड़ते ही फायदा नुकसान में बदल सकता है. जरूरत से ज्यादा फर्टिलाइज़र मिट्टी को खराब कर देता है और पौधों की ग्रोथ रुकने लगती है.
23rd instalment of PM-KISAN: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त (PM kisan Yojana) की आधिकारिक तारीख 20 जून घोषित हो गई है. किसान आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाकर अपना स्टेटस और लाभार्थी लिस्ट चेक कर सकते हैं.
मॉनसून सीजन में वातावरण में नमी बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. गलघोंटू जैसा कई ऐसी बीमारियां हैं जो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा हो सकती हैं. ऐसे में पशुओं के वैक्सीनेशन का खास ध्यान रखना जरूरी है.
आड़ू के पेड़ों में थिनिंग कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक जरूरी प्रक्रिया है. यह छोटी सी मेहनत फलों की क्वालिटी को कई गुना बढ़ा देती है और बागवानों को बेहतर उत्पादन देती है.
देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. IMD के अनुसार, जून के शुरुआती दिनों में बारिश सामान्य से 64% कम रही. एक्सपर्ट्स इसे अस्थायी ‘मॉनसून पॉज़’ मान रहे हैं और जल्द सुधार की उम्मीद जता रहे हैं. मौसम विभाग (IMD) लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू हो रही हैं. यहां से उड़ने वाली पहली फ्लाइट से 172 किसान लखनऊ जाएंगे, जहां वे मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात करके उनका आभार जताएंगे.
जून में बढ़ती गर्मी और हाई ह्यूमिडिटी इनडोर पौधों के लिए फायदेमंद भी हो सकती है और नुकसानदायक भी. विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में पौधों की सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि ज्यादा नमी से फंग
यूपी के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली कमर्शियल फ्लाइट की लैंडिंग हुई. पहली उड़ान से 172 किसान लखनऊ जाएंगे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर एयरपोर्ट परियोजना के लिए आभार जताएंगे. एयरपोर्ट के शुरू होने से जेवर को लखनऊ, बेंगलुरु समेत कई शहरों से बेहतर हवाई संपर्क मिलेगा और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है
भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण कई बार पौधों की नई ग्रोथ झुलसने या सूखने लगती है. ऐसे में अधिकांश लोग तुरंत पौधे की छंटाई कर देते हैं, लेकिन यह हर स्थिति में सही फैसला नहीं होता.
अगर आपका बाथरूम खाली और बेजान लगता है, तो कुछ इंडोर पौधे उसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ा सकते हैं. बाथरूम की नमी और ह्यूमिडिटी में कई पौधे आसानी से पनपते हैं और जगह को ताजगी से भर देते हैं.
Fertilizer Crisis Reality Check: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में खाद की उपलब्धता और संकट को लेकर आजतक की टीम ने रियलिटी चेक किया. चंदौली, सहारनपुर और फिरोजाबाद में खाद की पर्याप्त आपूर्ति है, जबकि पीलीभीत और मुजफ्फरनगर में किसानों को खाद की कमी और कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है.
Rainy Season Vegetables: मॉनसून सीजन में खरीफ फसलों की बुवाई होती है. कुछ ऐसी सब्जियां हैं, जो बरसात के मौसम में तेजी से बढ़ती हैं और बढ़िया देती हैं. बारिश के मौसम में सब्जियों को पानी देने की जरूरत नहीं होती और लागत भी कम आती है. आइए जानते हैं बरसात में किन सब्जियों की खेती करनी चाहिए.
पैराक्वाट डाइक्लोराइड, एक अत्यंत विषैला खरपतवारनाशक है, जो भारत में खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है जबकि दुनिया के 74 देशों ने इसे बैन कर दिया है. ऐसे में सवाल है कि क्या पैराक्वाट डाइक्लोराइड बनाने-बेचने वाली कंपनियों और नीति-निर्माताओं की नजर में भारत के नागरिकों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?
प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो परिस्थितियों ने मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. विशेषज्ञ लगातार इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं. भारत समेत कई देशों में मानसून, वर्षा वितरण, कृषि गतिविधियों और तापमान पर इसके असर को लेकर चर्चा तेज है. मौसम से जुड़े विभिन्न मॉडल और आंकड़े आने वाले महीनों की स्थिति का आकलन करने में जुटे हैं. किसानों और आम लोगों की नजर भी इस घटनाक्रम पर बनी हुई है.
Side Effects of Pesticides: पैराक्वाट डाइक्लोराइड जैसे विषैले रसायनों का उपयोग किसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है. पैराक्वाट डाइक्लोराइड और ग्लाइफोसेट जैसे खतरनाक केमिकल भारत में बैन क्यों नहीं हो रहे हैं? क्या हमारे देश में लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?
Farming Advisory: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 15 जून से पहले महाराष्ट्र में अच्छी बारिश की संभावना कम दिखाई दे रही है. ऐसे में कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू न करें.
राजस्थान में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए खराब बीजों के गोदामों पर कार्रवाई की गई है. एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से यह कार्रवाई की गई है.