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लंबे इंतजार के बाद अकोला में मॉनसून मेहरबान, किसानों ने शुरू की खरीफ फसलों की बुवाई

महाराष्ट्र के अकोला जिले में लंबे इंतजार के बाद मॉनसून की पहली अच्छी बारिश हुई है, जिससे सूखे खेतों में रौनक लौट आई है. बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से शुरू हो गई है. इस साल जिले में लगभग 5.41 लाख हेक्टेयर में फसलों की खेती का लक्ष्य है, जिसमें सोयाबीन और कपास प्रमुख हैं.

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अकोला में बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू (फोटो- Screengrab ITG)
अकोला में बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू (फोटो- Screengrab ITG)

महाराष्ट्र के अकोला जिले में करीब 25 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मॉनसून ने जोरदार दस्तक दे दी है. पहली अच्छी बारिश के साथ ही सूखे खेतों में फिर से रौनक लौट आई है. कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसान अब पूरे उत्साह के साथ खेतों में उतर गए हैं. गांवों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो गई है.

महिलाएं हाथों से बो रही हैं बीज
अकोला के डोंगरगांव में खेतों में खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है. महिलाएं झुककर एक-एक बीज हाथ से जमीन में बो रही हैं, तो उनके ठीक पीछे बैलों की जोड़ी के साथ किसान हल चलाकर उन बीजों को मिट्टी से ढक रहे हैं. खेतों में ग्रामीण भारत की पारंपरिक खेती की तस्वीर नजर आ रही है. किसानों की यही मेहनत कुछ महीनों बाद सोने की फसल बनकर लौटेगी. कुछ दिन पहले तक यही खेत सूखे पड़े थे, लेकिन अब बारिश के बाद इनमें जीवन लौट आया है.

खरीफ फसलों की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार
बारिश के बाद अकोला जिले में खरीफ सीजन की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. खेतों में पर्याप्त नमी मिलने के कारण किसान बिना समय गंवाए बुवाई का काम कर रहे हैं. इस साल जिले में लगभग 5 लाख 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इनमें सबसे अधिक करीब 2 लाख 28 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई होगी, जबकि लगभग 1 लाख 82 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती की जाएगी. इसके अलावा तुअर, मूंग, उड़द, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों की बुवाई भी शुरू हो चुकी है.

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किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद
खेतों में काम कर रहे किसान योगेश नागापुरे का कहना है कि समय पर हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. अगर आने वाले दिनों में मॉनसून इसी तरह साथ देता रहा, तो इस साल अच्छी पैदावार होने की पूरी उम्मीद है. किसानों का मानना है कि समय पर बारिश खेती के लिए सबसे जरूरी होती है और इस बार मॉनसून ने उनकी उम्मीदों को फिर से जगा दिया है.

बता दें कि कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी थी कि पर्याप्त बारिश होने के बाद ही बुवाई करें. बीज को 2 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं, जरूरत के अनुसार फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करें. विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय और सही तरीके से की गई बुवाई से फसल की पैदावार बढ़ती है.

मॉनसून की पहली अच्छी बारिश ने अकोला के किसानों में नई उम्मीद जगा दी है. अब किसानों की नजर आने वाली बारिश पर टिकी है. यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा, तो इस साल अच्छी फसल होने की संभावना है और किसानों की मेहनत रंग ला सकती है.

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