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होर्मुज में बारूद, जहाजों के लिए खतरा... अमेरिका ने ईरान के इस आईलैंड पर क्यों गिराए बम?

अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान के लाराक आईलैंड पर सीमित और सटीक स्ट्राइक इसलिए की, क्योंकि आईआरजीसी होर्मुज स्ट्रेट में फिर से समुद्री माइन बिछाने की तैयारी कर रही थी. ईरान ने इसे आक्रामक कार्रवाई बताया, हताहतों का दावा किया और जॉर्डन की तरफ मिसाइल-ड्रोन हमले किए.

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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बारूद बिछाने की कोशिश का दावा किया है. (Photo- CENTCOM/Screengrab)
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बारूद बिछाने की कोशिश का दावा किया है. (Photo- CENTCOM/Screengrab)

अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर एयर स्ट्राइक की है. यह हमला ऐसे वक्त हुआ है जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका के स्ट्राइक के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है. आईआरजीसी ने जॉर्डन और कतर में मिसाइलें दागी हैं. अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है. ईरान-ओमान में होर्मुज को लेकर आपसी सहमति बनी है. स्ट्रेट में पहले से जहाजों की आवाजाही कम देखी गई है. इस बीच अमेरिकी सेना ने बताया कि आखिर ईरान पर अचानक हमला क्यों किया गया?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की माइन बिछाने वाली यूनिट्स एक ऐसे खतरे की तैयारी कर रही थीं, जो स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए तत्काल खतरा बन सकता था. इसी वजह से अमेरिकी सेना ने दो IRGC रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया.

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लारक आईलैंड पर ही क्यों हुआ हमला?

लारक आईलैंड ईरान के दक्षिणी तट के पास फारस की खाड़ी में स्थित है और होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है. यह इलाका रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां समुद्री रास्तों को बाधित करने वाली किसी भी गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है.

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अमेरिका का दावा है कि उसके हमले का मकसद ईरान के सैन्य ठिकानों को बड़े पैमाने पर तबाह करना नहीं था, बल्कि एक तत्काल खतरे को खत्म करना था. CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी सेना ने IRGC की उन ताकतों के खिलाफ सीमित और सटीक कार्रवाई की, जो होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइंस बिछाने की तैयारी कर रही थीं.

अमेरिका ने ऐसा कदम क्यों उठाया?

अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से पहले बिछाई गई समुद्री माइंस को हटाने का काम पूरा किया था. इसके तुरंत बाद अमेरिकी निगरानी में IRGC की गतिविधियां सामने आईं और दावा किया गया कि ईरान दो लॉन्चरों के जरिए नई माइंस समुद्र में डालने की तैयारी कर रहा था.

अमेरिका का कहना है कि अगर ये माइंस शिपिंग लेन में बिछा दी जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही खतरे में पड़ सकती थी. इसलिए वॉशिंगटन ने इसे "इमिनेंट थ्रेट", यानी तत्काल खतरा माना और हमला किया.

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ईरान ने लेटेस्ट स्ट्राइक पर क्या कहा?

ईरान ने अमेरिकी हमले को आक्रामक कार्रवाई बताया है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि हमले में उसके कई जवान और दूसरे लोग मारे गए या घायल हुए. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले दो ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमला किया. जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस में आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया.

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इस हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने स्ट्रेट में एक शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर भी रुकवाया है. वहीं, अमेरिकी कार्रवाई की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई.

यानी अमेरिका का दावा है कि लारक आईलैंड पर हमला होर्मुज स्ट्रेट में माइंस बिछाकर वैश्विक शिपिंग को खतरे में डालने की ईरानी कोशिश को रोकने के लिए किया गया. लेकिन ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर अमेरिकी हमला बता रहा है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई दोनों देशों के बीच तनाव को एक और बड़े सैन्य टकराव की तरफ ले जाएगी.

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