अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने आपसी रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. ये नया समझौता 27 अप्रैल 1951 को ग्रीनलैंड की रक्षा को लेकर हुए समझौते और उससे जुड़े तमाम बाद के समझौतों में संशोधन और विस्तार करने के लिए किया गया है.
इस समझौते के तहत अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने 1949 की नॉर्थ अटलांटिक संधि (नाटो) के तहत अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को हाइलाइट किया है. इसमें इस बात को स्वीकार किया गया है कि डेनमार्क के जरिए ग्रीनलैंड लंबे समय से नाटो का हिस्सा रहा है.
समझौते में इस बात का खास जिक्र है कि अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध से पहले से लेकर अब तक ग्रीनलैंड और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा में अरबों डॉलर खर्च किए हैं और भारी योगदान दिया है.
वर्तमान और भविष्य में भी ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए अमेरिकी सेना की भूमिका को बहुत जरूरी माना गया है. इसके अलावा, नूक में अमेरिकी कॉन्सुलेट के फिर से खुलने और वैज्ञानिक, शैक्षिक और आर्थिक साझेदारी पर भी सहमति जताई गई है.
बदलते वैश्विक हालात और आर्कटिक की सुरक्षा
समझौते में मौजूदा हालात पर खास तवज्जो दी गई है. इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि आर्कटिक और सुदूर उत्तर क्षेत्रों में विरोधियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की वजह से सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में भविष्य में सुरक्षा के लिए और ज्यादा ठोस प्रयासों की जरूरत है.
इसी को ध्यान में रखते हुए, सभी पक्षों ने इसपर सहमति जताई है कि अमेरिका को नाटो क्षेत्र, ग्रीनलैंड और अमेरिकी महाद्वीप की रक्षा के लिए जरूरी सीमा तक ग्रीनलैंड की जमीन पर सैन्य पहुंच की अनुमति दी जानी चाहिए. इसमें 'गोल्डन डोम' डिफेंस सिस्टम लागू करना भी शामिल है.
समझौते में डेनमार्क की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि करते हुए ये भी माना गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ग्रीनलैंड के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार हासिल है. ग्रीनलैंड की स्वतंत्रता की प्रक्रिया साल 2009 के स्व-शासन अधिनियम के आर्टिकल 21 के तहत तय की गई है.
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प्राचीन प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा को तरजीह
इसके साथ ही, ग्रीनलैंड की प्राचीन प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा को तरजीह दी गई है. इसके लिए 1991 के समझौता ज्ञापन और 2004 की संयुक्त घोषणा का हवाला दिया गया है. समझौते में ग्रीनलैंड के लोगों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की पूरी रक्षा करने की बात कही गई है, जिसमें उनकी जमीन, जीवन शैली, शिकार, मछली पकड़ने और दूसरी पारंपरिक गतिविधियों को सुरक्षित रखना शामिल है.
इस नए समझौते का मकसद सामूहिक रक्षा की कोशिशों को एकजुट करते हुए आर्कटिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को पुख्ता करना है.