आर्कटिक
आर्कटिक (Arctic) पृथ्वी के सबसे उत्तरी भाग में स्थित एक ध्रुवीय क्षेत्र है. आर्कटिक में आर्कटिक महासागर, आसन्न समुद्र और कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ हिस्से शामिल हैं. आर्कटिक क्षेत्र के भीतर की भूमि में मौसमी रूप से अलग-अलग बर्फ और बर्फ का आवरण होता है, जिसमें मुख्य रूप से टुंड्रा युक्त पर्माफ्रॉस्ट (स्थायी रूप से जमी हुई भूमिगत बर्फ) होती है. आर्कटिक समुद्र में कई जगहों पर मौसमी समुद्री बर्फ होती है.
ध्रुवीय क्षेत्र में होने के कारण आर्कटिक में सूर्य की रोशनी लंबे समय तक रहती है. यहां छोटे बढ़ते मौसम होते हैं जहां ठंड और बर्फ से ढकी सर्दियों की स्थिति बनी रहती है (Weather in Arctic).
आर्कटिक के वतावारण में वनस्पति पौधों पाए जाते हैं जैसे कि छोटी झाड़ियां, ग्रामीनोइड्स, जड़ी-बूटियां, लाइकेन और काई, जो सभी अपेक्षाकृत जमीन के करीब बढ़ते हैं और टुंड्रा बनाते हैं. टुंड्रा पर शाकाहारी जीवों में आर्कटिक खरगोश, लेमिंग, कस्तूरी और कारिबू शामिल हैं. वे बर्फीले उल्लू, आर्कटिक लोमड़ी, ग्रिजली भालू और आर्कटिक भेड़ियों के शिकार होते हैं. ध्रुवीय भालू समुद्री जीव का शिकार करना पसंद करता है. अन्य स्थलीय जानवरों में वूल्वरिन, मूस, डॉल भेड़, ermines और आर्कटिक ग्राउंड गिलहरी शामिल हैं (Arctic Flora and Fauna).
चारों ओर बर्फ का रेगिस्तान, शून्य से नीचे का तापमान और एक ऐसी तिजोरी जिसे दुनिया का अंत भी नहीं तोड़ सकता. ये उत्तरी ध्रुव की वो रहस्यमयी गुफा है जिसमें प्रलय आने के बाद भी दुनिया को जिंदा रखने के बीज मौजूद हैं. यहां सिर्फ अनाज के बीज ही नहीं, बल्कि भारत का ताजमहल और संविधान भी डिजिटल रूप में कैद कर दिए गए हैं. आखिर क्यों इसे मानव इतिहास की सबसे बड़ी पहल बताया जाता है?
रूस-चीन लगातार अपनी सेनाओं के जरिए आर्कटिक के ठंडे इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे हैं. जिससे अमेरिका और नाटो परेशान हैं. लेकिन दिक्कत है वहां का मौसम. ऐसे मौसम अनमैन्ड ड्रोन और UUV की जरूरत होगी. अनक्रूड सिस्टम लगातार निगरानी, इंटेलिजेंस और केबल सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं. ये खतरे और संघर्ष से निपटने में मदद करेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करें या न करें. लेकिन बर्फ से भरी ये जमीन खुद-ब-खुद अमेरिका-कनाडा की तरफ जा रहा है. यानी हर साल लगभग 2 सेंटीमीटर साइड में उत्तर-पश्चिम की तरफ खिसक रहा है. साथ ही सिकुड़ भी रहा है. बर्फ पिघलने से बेडरॉक पर दबाव कम हो रहा है, जिससे वहां की धरती बदल रही है.
दुनिया में एक जगह है जहां पर अमेरिका और रूस दोनों सिर्फ 3.8 किलोमीटर दूर है. यहां समय की रेखा गुजरती है. एक आइलैंड अमेरिका में दूसरा रूस में. एक जगह कल होता है, दूसरी जगह आज. दोनों के बीच 21 घंटे का अंतर. ऐसा है अमेरिका और रूस का सबसे नजदीकी प्वाइंट.
ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दे रहे हैं, लेकिन अमेरिका डेनमार्क को हथियार बेच रहा है. जनवरी 2026 में हेलफायर मिसाइलों की बिक्री मंजूर हुई. डेनमार्क को F-35 जेट, AIM-120, P-8A Poseidon भी मिल रहे हैं. यह अजीब है- अमेरिका डेनमार्क को रूस से बचाने के नाम पर हथियार दे रहा है, जबकि खुद ग्रीनलैंड पर हमले की बात कर रहा है.
ट्रंप ने फिर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जताई है. वो भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर. ग्रीनलैंड दुर्लभ खनिज, पानी और आर्कटिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है. चीन की दिलचस्पी अमेरिका को चिंतित करती रहती है. 2019 में खरीद प्रस्ताव ठुकराया गया था. थुले बेस पहले से अमेरिकी नियंत्रण में है. संसाधन और भू-रणनीति इसका मुख्य कारण है.
ग्रीनलैंड में डेनमार्क की 300 और अमेरिका की 650 सैनिक तैनाती है. ट्रंप की कब्जा धमकी से डेनमार्क नाराज है. लेकिन NATO सदस्य होने से टकराव की संभावना कम है. ग्रीनलैंड रूस मिसाइल रूट और आर्कटिक नॉर्दर्न पैसेज पर महत्वपूर्ण, अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. चीन की पनडुब्बी गतिविधि भी चिंता बढ़ाती है.
दुनिया का फ्रिज कहलाने वाला आर्कटिक क्षेत्र गर्म हो रहा, जानिए इसका इंसानों पर कैसा असर होगा
आर्कटिक में 2024-25 रिकॉर्ड सबसे गर्म साल रहा. वैश्विक औसत से 4 गुना तेज गर्मी पड़ी. समुद्री बर्फ न्यूनतम स्तर पर है. रिकॉर्ड बारिश हुई है. सर्दी में भी बारिश से 'विंटर रीडिफाइंड' हो गया है. दुनिया के 79% ग्लेशियर इस सदी तक पिघल सकते हैं. समुद्र स्तर बढ़ेगा. 200 करोड़ लोगों की पानी सप्लाई खतरे में है.
रूस ने भारत के साथ आर्कटिक-क्लास जहाजों का संयुक्त उत्पादन करने का प्रस्ताव दिया है. ये जहाज 2-3 मीटर मोटी बर्फ तोड़कर साल भर उत्तरी समुद्री मार्ग पर चल सकेंगे. टैंकर, एलएनजी कैरियर और कंटेनर जहाज बनाए जाएंगे. इससे भारत को सस्ता-तेज़ व्यापार मार्ग और नई तकनीक मिलेगी. दोनों देशों के बीच यह नया रणनीतिक कदम माना जा रहा है.
ट्रंप ने खुलकर स्वीकार किया कि आइसब्रेकर जहाजों में अमेरिका रूस से बहुत पीछे है. उन्होंने कहा कि हमारे पास सिर्फ एक पुराना जहाज है, जबकि रूस के पास 43 हैं, जिनमें 8 परमाणु ऊर्जा से चलते हैं. यह स्थिति हास्यास्पद है. अमेरिका का एकमात्र भारी आइसब्रेकर पोलर स्टार 49 साल पुराना है.
अलास्का के उटकियागविक शहर में इस साल 18 नवंबर को सूरज आखिरी बार डूबा. अब पोलर नाइट शुरू. पूरे 65 दिन तक सूरज नहीं दिखेगा, सिर्फ अंधेरा और ठंड. पृथ्वी के झुकाव की वजह से ऐसा होता है. लोग लाइट थेरेपी और उत्तरी रोशनी का मजा लेते हैं. सूरज 22 जनवरी 2026 को वापस आएगा.
रूस के आर्कटिक में ध्रुवीय भालू एक पुराने सोवियत रिसर्च स्टेशन पर कब्जा जमा चुके हैं. चुकची सागर के कोल्युचिन द्वीप पर ट्रैवल ब्लॉगर वादिम मखोरोव ने ड्रोन से वीडियो बनाया. वे हवा-बारिश से बचने के लिए जगह इस्तेमाल कर रहे. सोवियत टूटने के बाद स्टेशन 30 साल से खाली था. जलवायु परिवर्तन से बर्फ पिघल रही है.
आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम 2025 में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, 'हम अब उस आकार और अवस्था में पहुंच गए हैं, जहां दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली लगभग हर महत्वपूर्ण घटना हमारे लिए मायने रखती है. अमेरिका आज पहले से कहीं अधिक आत्मनिर्भर है. यूरोप आज बदलाव के लिए दबाव में है.'
आर्कटिक महासागर से पहला आइस फ्री डे साल 2027 में होने की आशंका जताई जा रही है. यह स्टडी हाल ही में सामने आई है. आर्कटिक की बर्फ अप्रत्याशित दर से पिघल रही है. हर दस साल में 12 फीसदी की दर से.वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले तीन साल में इस इलाके से बर्फ लगभग खत्म हो जाएगी.
एक बेहद डरावनी स्टडी सामने आई है. जिसमें कहा गया है कि आर्कटिक सागर से तीन साल में बर्फ खत्म हो जाएगी. ऐसे ही गर्मी बढ़ती रही तो उस इलाके के जीवों के लिए खतरा बढ़ेगा. जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. जानिए कितनी खतरनाक बातें कहीं गई हैं इस रिपोर्ट में...
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से एक डराने वाली खबर आई है. छह ग्लेशियर वाले इस देश में आखिरी ग्लेशियर हम्बोल्ट पिघलकर इतना छोटा हो चुका कि वैज्ञानिक इसे बर्फ का मैदान कह रहे हैं. आशंका है कि इसके बाद कई और देशों का नंबर है. वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के ग्लेशियर पिघल जाएं तो धरती का बड़ा हिस्सा समुद्र में समा जाएगा.
पिघलती बर्फ से सिर्फ समंदर में पानी नहीं बढ़ता, बल्कि पूरे दिन का समय बदल जाता है. इससे पूरे साल का समय भी प्रभावित होता है. एक हैरान करने वाली साइंटिफिक स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया है. आइए जानते हैं कि कैसे ध्रुवों पर पिघलती बर्फ हमारे दिन के समय को बदल रही है?
10 साल के अंदर आर्कटिक में बर्फ देखने को नहीं मिलेगी. खासतौर से सितंबर महीने में. यानी जब वहां गर्मियां रहती हैं. अगर ऐसा हुआ तो दिक्कत वहां के जानवरों, पर्यावरण को होगा. नई प्रजातियों का घुसपैठ होगा. साथ ही समंदर के जलस्तर में भी बढ़ोतरी होगी. दुनिया के कई इलाके इसकी चपेट में आएंगे.
यहां दिख रही तस्वीर में आपको कमल जैसे फूल दिख रहे हैं. ये कमल नहीं बल्कि 'बर्फ कमल' हैं. ये आर्कटिक सागर में उगते हैं. वो खास दिनों के दौरान जब तापमान बेहद उपयुक्त होता है. आइए जानते हैं कि ये फूल कैसे बनते हैं. इनके पीछे का साइंस क्या है?
अमेरिका में आये बर्फीले तूफान ने सब कुछ अस्त व्यस्त कर रख दिया है. जानकारों का कहना है कि ये बर्फीला तूफान आर्कटिक डीप फ्रीज (Arctic Deep Freeze) की वजह से आया है. देखें यूएस टॉप-10 में अमेरिका की बड़ी खबरे.