डेनमार्क (Denmark) उत्तरी यूरोप में स्थित एक छोटा लेकिन अत्यंत विकसित देश है, जो अपनी खुशहाल जीवनशैली, मजबूत लोकतंत्र और सामाजिक समानता के लिए विश्वभर में जाना जाता है. यह देश स्कैंडिनेवियाई क्षेत्र का हिस्सा है और स्वीडन, नॉर्वे तथा जर्मनी के निकट स्थित है. डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन न केवल प्रशासनिक केंद्र है, बल्कि संस्कृति, फैशन और नवाचार का भी प्रमुख केंद्र मानी जाती है.
डेनमार्क का राजनीतिक ढांचा संवैधानिक राजतंत्र पर आधारित है, जहाx राजा या रानी राष्ट्राध्यक्ष होते हैं और वास्तविक सत्ता संसद तथा निर्वाचित सरकार के हाथों में होती है. यहाx लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को अत्यधिक महत्व दिया जाता है. देश की शासन प्रणाली पारदर्शिता और कम भ्रष्टाचार के लिए प्रसिद्ध है.
आर्थिक रूप से डेनमार्क एक समृद्ध राष्ट्र है. इसकी अर्थव्यवस्था में उद्योग, कृषि, समुद्री व्यापार और नवीकरणीय ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है. विशेष रूप से पवन ऊर्जा के क्षेत्र में डेनमार्क विश्व का अग्रणी देश माना जाता है. इसके अलावा डेयरी उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और जहाज निर्माण भी इसकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ हैं.
डेनमार्क की सामाजिक व्यवस्था इसकी सबसे बड़ी पहचान है. यहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं लगभग मुफ्त हैं, जिससे नागरिकों का जीवन स्तर ऊंचा बना रहता है. सामाजिक सुरक्षा प्रणाली इतनी मजबूत है कि हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलता है. इसी कारण डेनमार्क अक्सर दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में शीर्ष पर रहता है.
संस्कृति के क्षेत्र में डेनमार्क का योगदान भी उल्लेखनीय है. प्रसिद्ध लेखक हांस क्रिश्चियन एंडरसन, आधुनिक डिजाइन, वास्तुकला और साइकिल संस्कृति इस देश की पहचान हैं. प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छ शहर और संतुलित जीवनशैली डेनमार्क को एक आदर्श राष्ट्र बनाते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कुछ पोस्ट किए हैं. इसमें ईरानी जहाजों से लेकर ग्रीनलैंड और एलियन तक देखे जा सकते हैं. इस पोस्ट के असली मायने क्या हैं आइए इसपर चर्चा करते हैं.
मुस्लिम आबादी पर बड़ा एक्शन, पूरे देश में अजान होगी बंद? सरकार बोली- 'देश इस्लामाबाद का इलाका नहीं बनेगा', धार्मिक आजादी पर छिड़ी नई बहस अजान पर बड़ा फैसला लेने वाला है डेनमार्क, इस्लामीकरण रोकने की बड़ी तैयारी. यूरोप के देश डेनमार्क में एक बार फिर मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर होने वाली अज़ान को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है.
डेनमार्क में मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर होने वाली अजान पर कानूनी रोक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार का कहना है कि देश की पहचान और सामाजिक माहौल को बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे इस्लामाबाद में हैं.
डेनमार्क में रहने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल निक बिष्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह रात के करीब 9 बजे भी बाहर दिन जैसा उजाला दिखाते हैं और बताते हैं कि उन्हें सोने के लिए घर के ब्लैकआउट पर्दे बंद करने पड़ते हैं. उनके इस वीडियो ने यूरोप में गर्मियों के लंबे दिनों को लेकर लोगों के बीच नई जिज्ञासा पैदा कर दी है.
PM Modi Five-Nation Tour Live Updates: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे के अगले चरण में मंगलवार को इटली पहुंच रहे हैं. इससे पहले उन्होंने आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष नेताओं के साथ बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिनमें व्यापार, कूटनीति, वैश्विक सुरक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने के पूरे एजेंडे पर विस्तार से चर्चा होगी.
ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों में क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटलाइजेशन, ग्रीन टेक्नोलॉजी, ब्लू इकॉनमी और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया.
कभी- कभी दूसरे देशों के सदियों पुराने ट्रेडिशन बाकी जगह के लोगों के लिए अनोखी और अनदेखी हो सकती है. ऐसे में कई बार ये रिचुअल्स वायरल हो जाते हैं. इन दिनों डेनमार्क की एक ऐसी ही प्रथा चर्चा में है.
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में टोल लगाने का फैसला लिया है, जो समुद्री मार्गों पर टोल लगाने के ऐतिहासिक उदाहरणों की याद दिलाता है. डेनमार्क ने 600 साल पहले साउंड ड्यूज़ नामक टोल सिस्टम लागू किया था, जो उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर को जोड़ने वाले जलडमरूमध्य पर था.
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच UN सिक्योरिटी काउंसिल ने खाड़ी देशों पर ईरान के मिसाइल-ड्रोन हमलों की निंदा करते हुए प्रस्ताव पास किया. 13 देशों ने समर्थन किया, जबकि चीन और रूस वोटिंग से दूर रहे.
दुनिया का सबसे बड़ा झरना ना पहाड़ों पर है और ना ही किसी जंगल में. यह समंदर की गहराई में छिपा है, जहां हर सेकंड लाखों घन मीटर पानी नीचे गिरता है. ग्रीनलैंड और आइसलैंड के बीच मौजूद यह रहस्यमयी जलप्रपात इंसानी आंखों से ओझल है.
दुनिया का सबसे बड़ा झरना समुद्र की गहराई में मौजूद है. Greenland–Iceland के बीच Denmark Strait Waterfall क्यों इंसानी आंखों से नहीं दिखता, जानें पूरी कहानी.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2025 में भारत ने पांच पायदान की छलांग लगाते हुए 182 देशों और क्षेत्रों में 91वां स्थान हासिल किया है. पिछले साल उसकी रैंक 96 थी और स्कोर में एक अंक का सुधार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रगति धीमी है और दुनिया भर में यह अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है.
ग्रीनलैंड के ग्लेशियर के भीतर बना कैंप सेंचुरी अपने समय का सबसे रहस्यमय और गुप्त ठिकाना था. बाहर की दुनिया को बताया गया कि यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला आर्कटिक रिसर्च सेंटर है, जहां वैज्ञानिक बर्फ पर स्टडी करेंगे. लेकिन असल में यह एक गुप्त सैन्य योजना का हिस्सा था, जिसका नाम था ऑपरेशन आइसवर्म.
रूस-चीन लगातार अपनी सेनाओं के जरिए आर्कटिक के ठंडे इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे हैं. जिससे अमेरिका और नाटो परेशान हैं. लेकिन दिक्कत है वहां का मौसम. ऐसे मौसम अनमैन्ड ड्रोन और UUV की जरूरत होगी. अनक्रूड सिस्टम लगातार निगरानी, इंटेलिजेंस और केबल सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं. ये खतरे और संघर्ष से निपटने में मदद करेंगे.
ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे अमेरिका का टॉप सीक्रेट बेस कैम्प सेंचुरी 1959 में बनाया गया था. यह प्रोजेक्ट आइसवर्म का कवर था, जिसमें बर्फ के नीचे 600 न्यूक्लियर मिसाइलें छिपाने की योजना थी. 1967 में बेस छोड़ दिया गया. जहरीला कचरा यानी डीजल, रेडियोएक्टिव पदार्थ और PCB वहीं छोड़ दिया गया. अब जलवायु परिवर्तन से बर्फ पिघल रही है, जिससे कचरे के बाहर आने का खतरा है.
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ग्रीनलैंड के भविष्य पर बातचीत के लिए इस आइलैंड की राजधानी नूक पहुंची हैं. यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपना रुख नरम किया है.
ट्रंप आज भी ग्रीनलैंड के साथ खनिजों को लेकर सौदे की बात करते हैं ताकि चीन की रेयर-अर्थ मिनरल्स पर पकड़ को कमजोर किया जा सके. लेकिन 1940 के दशक में ग्रीनलैंड ने अमेरिका को उससे भी कहीं ज्यादा दुर्लभ संसाधन मुहैया कराया था.
डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड चाहिए. क्यों? क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा न किया तो चीन या रूस वहां काबिज हो जाएंगे. फिर अमेरिका की सुरक्षा तो खतरे में पड़ेगी ही, दुनिया को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है. ट्रंप ने अपनी जिद के पीछे यही तर्क दिया. इधर ये दोनों देश खुद पर इतने बड़े लांछन के बाद भी चुप रहे, और बोले भी तो विरोध उतना बुलंद नहीं.
दुनिया के कूटनीतिक मंच पर ग्रीनलैंड के लिए सौदेबाजी हो रही है. इस बीच विस्तारवादी रहे यूरोप को रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने आईना दिखाया है और ग्रीनलैंड की कीमत लगाई है. ये कीमत है मात्र 23 अरब रुपये, पुतिन ने तंज कसते हुए कहा है कि - इतना तो अमेरिका दे ही सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की मांग से नाटो देशों में मची खलबली के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. उन्होंने बुधवार देर रात सुरक्षा परिषद की बैठक में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड के साथ जो कुछ भी होता है, उससे रूस का कोई काम नहीं है.
World Economic Forum Davos Live Updates: ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.