ग्रीनलैंड (Greenland) दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच स्थित है. यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र (autonomous territory) है, लेकिन इसकी अपनी सरकार है जो आंतरिक मामलों को संभालती है. यहां की आधिकारिक भाषाएं ग्रीनलैंडिक (Kalaallisut) और डेनिश हैं.
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक (Nuuk) है. इसका क्षेत्रफल लगभग 21,66,086 वर्ग किमी है. यहां की जनसंख्या लगभग 56,000 है. यहां की करेंसी डेनिश क्रोन (DKK) है.
यहां के लोगों का मुख्य उद्योग, मछली पकड़ना, पर्यटन और खनिज उत्खनन है.
ग्रीनलैंड का लगभग 80 फिसदी भाग बर्फ से ढका हुआ है. यहां का अधिकांश क्षेत्र आर्कटिक जलवायु के अंतर्गत आता है. इस द्वीप पर बहुत कम पेड़-पौधे होते हैं, लेकिन आर्कटिक वन्यजीव जैसे ध्रुवीय भालू, रेनडियर और समुद्री जीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. यहां की नॉर्दर्न लाइट्स (Aurora Borealis) बहुत प्रसिद्ध हैं. ग्रीनलैंड में कई ग्लेशियर और हिमखंड (icebergs) समुद्र में गिरते रहते हैं, जिससे यह जलवायु परिवर्तन का प्रमुख अध्ययन क्षेत्र है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री के साथ मिलकर ग्रीनलैंड के लिए एक हॉस्पिटल शिप भेज रहे हैं. हालांकि डेनमार्क या ग्रीनलैंड की ओर से ऐसी किसी मांग की पुष्टि नहीं हुई है.
दुनिया का सबसे बड़ा झरना ना पहाड़ों पर है और ना ही किसी जंगल में. यह समंदर की गहराई में छिपा है, जहां हर सेकंड लाखों घन मीटर पानी नीचे गिरता है. ग्रीनलैंड और आइसलैंड के बीच मौजूद यह रहस्यमयी जलप्रपात इंसानी आंखों से ओझल है.
दुनिया का सबसे बड़ा झरना समुद्र की गहराई में मौजूद है. Greenland–Iceland के बीच Denmark Strait Waterfall क्यों इंसानी आंखों से नहीं दिखता, जानें पूरी कहानी.
ग्रैमी 2026 के मंच से किया गया एक जोक अब ग्लोबल पॉलिटिकल बवाल बन चुका है. ट्रेवर नोआ की कॉमेडी पर डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा है और वो मानहानि केस की धमकी देने लगे हैं. ट्रंप ने ट्रेवर को साफ कह दिया है कि वो केस के लिए तैयार रहें.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर ताजा प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय नेताओं से बातचीत से शुरु कर दी है और इस पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है. पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने ये भी कहा कि ग्रीनलैंड का सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है और ये सभी के लिए फायदेमंद होगा.
ग्रीनलैंड के ग्लेशियर के भीतर बना कैंप सेंचुरी अपने समय का सबसे रहस्यमय और गुप्त ठिकाना था. बाहर की दुनिया को बताया गया कि यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला आर्कटिक रिसर्च सेंटर है, जहां वैज्ञानिक बर्फ पर स्टडी करेंगे. लेकिन असल में यह एक गुप्त सैन्य योजना का हिस्सा था, जिसका नाम था ऑपरेशन आइसवर्म.
Greenland को पाने के लिए Donald Trump सारा जोर लगाए हुए हैं. जानिए अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड कितना जरूरी
रूस-चीन लगातार अपनी सेनाओं के जरिए आर्कटिक के ठंडे इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे हैं. जिससे अमेरिका और नाटो परेशान हैं. लेकिन दिक्कत है वहां का मौसम. ऐसे मौसम अनमैन्ड ड्रोन और UUV की जरूरत होगी. अनक्रूड सिस्टम लगातार निगरानी, इंटेलिजेंस और केबल सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं. ये खतरे और संघर्ष से निपटने में मदद करेंगे.
मैडमैन थ्योरी एक रणनीति है, जिसमें नेता खुद को बेहद खतरनाक दिखाते हैं ताकि दुश्मन डर जाए और टकराव से पहले ही झुक जाए. अमेरिका के राष्ट्रपति समय-समय पर यह तरीका आजमाते रहे. अब डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी यही कहा जा रहा है. वे एक साथ कई देशों को कभी जंग, कभी टैरिफ के बहाने डरा रहे हैं.
क्या मनोविज्ञान के खिलाड़ी हैं Donald Trump, देशों को धमकाने का उनका तरीका मैडमैन थ्योरी के कितना करीब?
ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे अमेरिका का टॉप सीक्रेट बेस कैम्प सेंचुरी 1959 में बनाया गया था. यह प्रोजेक्ट आइसवर्म का कवर था, जिसमें बर्फ के नीचे 600 न्यूक्लियर मिसाइलें छिपाने की योजना थी. 1967 में बेस छोड़ दिया गया. जहरीला कचरा यानी डीजल, रेडियोएक्टिव पदार्थ और PCB वहीं छोड़ दिया गया. अब जलवायु परिवर्तन से बर्फ पिघल रही है, जिससे कचरे के बाहर आने का खतरा है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कंट्रोल को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर डील के लिए बातचीत चल रही है. इस डील के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में बिना किसी रुकावट के एक्सेस मिलेगा. साथ ही अमेरिका को ग्रीनलैंड पर सभी सैन्य उपकरण तयनत करने की इजाजत मिल जाएगी. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'गोल्डन डोम' को लेकर कनाडा पर तीखा हमला बोला है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओटावा चीन के साथ व्यापार को तरजीह दे रहा है, जबकि यह सिस्टम कनाडा की सुरक्षा भी करेगा. इस बयान के बाद अमेरिका-कनाडा रिश्तों में तल्खी बढ़ गई है.
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ग्रीनलैंड के भविष्य पर बातचीत के लिए इस आइलैंड की राजधानी नूक पहुंची हैं. यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपना रुख नरम किया है.
डोनाल्ड ट्रंप अपनी दबंगई और रियल एस्टेट मानसिकता के जरिए एक नया वर्ल्ड ऑर्डर बना रहे हैं. वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और पनामा जैसे क्षेत्रों को वो सैन्य और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 'असेट्स' मानते हैं और इन पर किसी भी तरह से नियंत्रण करना चाहते हैं.
ट्रंप आज भी ग्रीनलैंड के साथ खनिजों को लेकर सौदे की बात करते हैं ताकि चीन की रेयर-अर्थ मिनरल्स पर पकड़ को कमजोर किया जा सके. लेकिन 1940 के दशक में ग्रीनलैंड ने अमेरिका को उससे भी कहीं ज्यादा दुर्लभ संसाधन मुहैया कराया था.
ग्रीनलैंड को लेकर अभी घमासान मचा हुआ है. अमेरिका बार-बार इसपर कब्जा करने की धमकी दे रहा है. इसके विरोधस्वरूप पूरा यूरोप एक होता दिखाई दे रहा है. क्योंकि, यह डेनमार्क का एक स्वायत्त हिस्सा है. ऐसे में डेनमार्क पर दावे के बीच जानते हैं आखिर दुनिया का सबसे बड़े द्वीप को किसने खोजा था और इसका पहला मालिक कौन था.
डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड चाहिए. क्यों? क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा न किया तो चीन या रूस वहां काबिज हो जाएंगे. फिर अमेरिका की सुरक्षा तो खतरे में पड़ेगी ही, दुनिया को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है. ट्रंप ने अपनी जिद के पीछे यही तर्क दिया. इधर ये दोनों देश खुद पर इतने बड़े लांछन के बाद भी चुप रहे, और बोले भी तो विरोध उतना बुलंद नहीं.
ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए ताकत के इस्तेमाल करने वाले बयान से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर मुकर गए हैं... आर्कटिक में रूस और चीन की महत्वकांक्षा पर रोक को जरुरी बताते हुए... ट्रंप ग्नीनलैंड में गोल्डन डोम सिस्टम की इच्छा जताते हुए अब समझौते की उम्मीद जता रहे हैं.
दुनिया के कूटनीतिक मंच पर ग्रीनलैंड के लिए सौदेबाजी हो रही है. इस बीच विस्तारवादी रहे यूरोप को रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने आईना दिखाया है और ग्रीनलैंड की कीमत लगाई है. ये कीमत है मात्र 23 अरब रुपये, पुतिन ने तंज कसते हुए कहा है कि - इतना तो अमेरिका दे ही सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करें या न करें. लेकिन बर्फ से भरी ये जमीन खुद-ब-खुद अमेरिका-कनाडा की तरफ जा रहा है. यानी हर साल लगभग 2 सेंटीमीटर साइड में उत्तर-पश्चिम की तरफ खिसक रहा है. साथ ही सिकुड़ भी रहा है. बर्फ पिघलने से बेडरॉक पर दबाव कम हो रहा है, जिससे वहां की धरती बदल रही है.