दुनिया फिर से मिडिल ईस्ट को जंग में आग में झुलसता देख सकती है. अमेरिका और इजरायल ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नई सैन्य कार्रवाई के प्लान बना लिए हैं. ये दावा किया है न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में. इसके मुताबिक संभावित टारगेट में ईरान के परमाणु केंद्र, मिसाइल-ड्रोन भंडार और एनर्जी ढांचा शामिल हो सकते हैं. हालांकि, अभी अटैक के किसी प्लान को मंजूरी नहीं मिली है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह जंगी अभियान छोटा लेकिन तीव्र हो सकता है. अमेरिका-इजरायल का प्लान है कि तीन दिन के हमलों से ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर तेहरान को परमाणु मुद्दे पर समझौते के लिए मजबूर किया जा सकता है.
इसी लिए ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन क्षमता और ऊर्जा ढांचा तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांड सेंटर को टारगेट किए जाने का प्लान है.
क्या पिकैक्स माउंटेन बनेगा निशाना?
ईरान के गहरे पहाड़ के नीचे छिपे परमाणु सेंटर 'पिकैक्स माउंटेन' पर हमले की संभावना भी है. ट्रंप ने पिछले हफ्ते कहा था कि वे इस जगह के खिलाफ 22,000 पाउंड वजनी GBU-43/B, जिसे MOAB या ‘मदर ऑफ ऑल बंब्स’ कहा जाता है के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं.
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हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के बीच यह भी चर्चा है कि तेल रिफाइनरी प्लांट्स और एनर्जी ढांचे से बचा जाए, क्योंकि इससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं. यही कारण है कि ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की योजना को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन है.
ईरान की चेतावनी
दूसरी ओर ईरान ने साफ किया है कि कोई नया हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी. तेहरान ने संकेत दिया है कि वह सऊदी अरब के तेल प्लांट, डेटा सेंटरों और समुद्र के नीचे बिछाए इंटरनेट केबलों को भी निशाना बना सकता है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध न तेज खत्म होगा, न सीमित रहेगा.
इस बीच, इजरायल ने सोमवार को ईरान की सीमा के पास एक बड़ा वायुसेना अभ्यास किया. इजरायली वायुसेना के दर्जनों लड़ाकू विमान और हवा में ईंधन भरने वाले विमान इजरायल से लगभग 800 मील से अधिक दूर तक गए. इन विमानों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र से होते हुए ईरान की सीमा के पास उड़ान भरी और फिर लौट आए. अधिकारियों के अनुसार, यह रास्ता ईरान पर संभावित हमले के मार्ग जैसा था.
इजरायल ने इसे प्रशिक्षण अभ्यास बताया और कहा कि इसका उद्देश्य ईरान को बस कड़ा मैसेज देना है. इजरायल ने अमेरिका को इस ऑपरेशन की पहले ही जानकारी दे दी थी. हालांकि, कुछ अमेरिकी अधिकारियों को चिंता थी कि अगर ईरान ने इन विमानों पर हमला कर दिया तो इजरायल के पास बड़ी कार्रवाई शुरू करने का बहाना बन सकता है जो कि अमेरिकी मिड टर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप प्रशासन के लिए टेंशन का कारण बन सकता था.
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पिछली बार के अनुभवों को देखते हुए ट्रंप फिलहाल इस हमले से बच रहे हैं लेकिन ईरान परमाणु वार्ता की टेबल पर जबतक नहीं आएगा युद्ध की आशंका बनी रहेगी. अमेरिका के लिए नई जंग के रास्ते में तीन बड़ी चुनौतियां हैं- तेल की कीमतों में तेज उछाल, क्षेत्रीय युद्ध का फैलाव और अमेरिका में मिसाइल-इंटरसेप्टर की कमी. इसलिए योजनाएं तैयार होने के बावजूद यह अभी तय नहीं है कि ट्रंप हमले की मंजूरी देंगे या कूटनीतिक रास्ता अपनाएंगे.