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हूती से भिड़ा तो तुर्की चुकाएगा भारी कीमत, सऊदी पर अटैक के बीच एक्सपर्ट ने चेताया

सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट के बाद तुर्की के हूतियों से सीधे टकराने का खतरा बढ़ सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा हुआ तो लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के रास्ते तुर्की की सप्लाई लाइन प्रभावित हो सकती है, खासकर सोमालिया में उसके सैन्य और आर्थिक हितों पर असर पड़ सकता है.

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सऊदी अरब पर हूती लगातार हमलावर हैं. (Photo- @tcsavunma)
सऊदी अरब पर हूती लगातार हमलावर हैं. (Photo- @tcsavunma)

सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते तनाव में तुर्की के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. सऊदी अरब के साथ मक्का डिफेंस पैक्ट के तहत तुर्की की नई जिम्मेदारियां उसे यमन के हूतियों के साथ सीधे टकराव के करीब ले जा सकती हैं. हालांकि तुर्की ने अभी इस समझौते की पुष्टि नहीं की है और अक्टूबर में इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है.

क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि तुर्की फिलहाल हूतियों के साथ सीधी जंग नहीं चाहता. इसके बजाय वह सऊदी अरब को एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और दूसरे सैन्य उपकरण देकर उसकी रक्षा मजबूत करने और सऊदी अरब, ईरान और हूतियों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर सकता है.

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तुर्की के लिए लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में बढ़ेगी मुश्किल

तुर्की की सबसे बड़ी चिंता लाल सागर और बाब-अल-मंदेब का रास्ता है. मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टोरंटो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एबुजर डेमिरसी ने बताया कि, बाब-अल-मंदेब तुर्की के लिए चीन, भारत और पूर्वी अफ्रीका तक पहुंचने का अहम रास्ता है. खासकर सोमालिया में तुर्की की मौजूदगी इस समुद्री रास्ते पर काफी निर्भर है.

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तुर्की का सोमालिया में दूतावास, मोगादिशु में सैन्य ट्रेनिंग बेस, समुद्र में तेल खोज से जुड़ी गतिविधियां और स्पेसपोर्ट प्रोजेक्ट हैं. भारी सैन्य सामान और नौसैनिक गतिविधियों से जुड़ी सप्लाई समुद्र के रास्ते भेजी जाती है. इसके लिए बाब-अल-मंदेब से गुजरना पड़ता है. अगर हूती इस रास्ते पर तुर्की से जुड़े जहाजों को रोकते हैं, तो सामान पहुंचाने में ज्यादा समय और पैसा लग सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे तुर्की की क्षेत्रीय मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर वह हवाई रास्ते से भी अपनी गतिविधियां जारी रख सकता है, लेकिन इसकी लागत काफी ज्यादा होगी. तुर्की पहले से इस इलाके में नौसैनिक मौजूदगी रखता है और सोमालिया के तट के पास एक एनर्जी एक्सप्लोरेशन जहाज की सुरक्षा कर रहा है.

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हूती को आतंकी भी नहीं मानता तुर्की

रिपोर्ट में अंकारा यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ बेटुल डोगान-अक्कास के हवाले से बताया गया है कि तुर्की ने हूतियों को आतंकी संगठन घोषित नहीं किया है, इसलिए बातचीत के रास्ते अभी खुले हैं. उनका कहना है कि तुर्की के लिए हूतियों के साथ सीधा टकराव महंगा पड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि मक्का डिफेंस अलायंस के सदस्य किसी दूसरे मुस्लिम समूह के खिलाफ अपनी पहली कार्रवाई नहीं करना चाहेंगे.

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हूतियों के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद अल-बुखैती ने पिछले हफ्ते तुर्की और पाकिस्तान को सऊदी अरब के समर्थन में दखल देने को लेकर चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि सीधी सैन्य मदद की कीमत भारी हो सकती है.

वहीं, कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक तुर्की सऊदी अरब को डिफेंस सिस्टम, विमान, ऑपरेटर और तकनीकी मदद देने की तैयारी कर रहा है, लेकिन यमन के अंदर सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बच सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक तुर्की के लिए सैन्य भूमिका के साथ-साथ सऊदी अरब, ईरान और हूतियों के बीच बातचीत का रास्ता खोलना भी एक विकल्प हो सकता है.

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