सऊदी अरब ने रियाद एयरपोर्ट पर हुए सिलसिलेवार घातक हमलों से कुछ दिन पहले ही संभावित सैन्य हमलों की सार्वजनिक चेतावनी देना बंद कर दिया था. इन हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल हो गए थे. पिछले हफ्ते रियाद पर हुए चार हमलों से पहले जनता को कोई भी अलर्ट क्यों नहीं जारी किया गया, इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं.
इसके उलट, कतर के आंतरिक मंत्रालय ने जुलाई के हमलों सहित लगभग हर हमले से पहले मोबाइल फोन पर अलर्ट जारी किया था, जिसमें नागरिकों को घरों के अंदर और खिड़कियों से दूर रहने की चेतावनी दी गई थी. बहरीन और कुवैत ने भी बार-बार सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.
सऊदी अरब ने मई में एक राष्ट्रीय शुरुआती चेतावनी प्रणाली के माध्यम से मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों पर खतरे के अलर्ट भेजना शुरू किया था, लेकिन पिछले हफ्ते हूतियों के हमले ढ़ने के बावजूद यह सिस्टम पूरी तरह खामोश रहा.
क्यों रोके गए अलर्ट? अधिकारियों ने बताई वजह
मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार, पिछले हफ्ते एयरपोर्ट पर हुए हमलों से पहले एक मित्र पश्चिमी सरकार के अधिकारियों ने सऊदी अधिकारियों से पूछा था कि ये अलर्ट क्यों बंद कर दिए गए हैं. इसके जवाब में बताया गया कि ये अलर्ट बहुत ज्यादा व्यवधान पैदा कर रहे थे और कई नागरिकों ने शिकायत की थी कि रात में इनसे उनकी नींद में खलल पड़ती है. हालांकि इस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
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पूर्व अमेरिकी राजदूत माइकल रैटनी ने कहा कि रियाद हमलों पर सार्वजनिक संदेश और देश में व्यवधान रोकने के प्रयासों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इससे हमलों को लेकर बेचैनी और बढ़ गई है.
इस महीने सोमवार तक कोई भी सार्वजनिक चेतावनी जारी न किए जाने के बावजूद, रियाद को लगभग एक दर्जन बार निशाना बनाया गया है. इस दौरान पश्चिमी देशों के दूतावास अपने कर्मचारियों को लगातार आंतरिक मिसाइल और ड्रोन अलर्ट भेजते रहे. ये आंतरिक अलर्ट अमेरिकी और अन्य पश्चिमी खुफिया एजेंसियों तथा सऊदी अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए जाते हैं. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को हुए सबसे घातक एयरपोर्ट हमले से पहले खुद दूतावासों को भी कोई चेतावनी नहीं मिली थी.
तनाव के बीच ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन
इन हमलों और सुरक्षा चिंताओं के बावजूद, सऊदी अरब ने सोमवार को एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की. रियाद में विश्व पेट्रोलियम काउंसिल एनर्जी कांग्रेस के दौरान, ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने जोखिमों को स्वीकार करते हुए एक अडिग रुख अपनाया और कहा कि देश अपनी आर्थिक योजनाओं को पटरी से उतरने नहीं देगा.
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उन्होंने सम्मेलन में यात्रा करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा, "आप जानते हैं कि यह देश सुरक्षित है, और हमारा यह जमावड़ा यह साबित करता है कि हम अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेंगे".