scorecardresearch
 

रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब

नए बिल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है. भारत का नाम भी उन 10 देशों में शामिल है, जिन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, अभी भारत पर कोई 100% टैरिफ नहीं लगा है.

Advertisement
X
नया बिल राष्ट्रपति ट्रंप की बजाय यूएस कांग्रेस की तरफ से आया है. (Photo- ITG)
नया बिल राष्ट्रपति ट्रंप की बजाय यूएस कांग्रेस की तरफ से आया है. (Photo- ITG)

अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े बिल को प्रतिनिधि सभा ने मंजूरी दे दी है. इस बिल ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है. खास बात यह है कि बिल पर चर्चा के दौरान भारत का नाम उन 10 देशों की लिस्ट में शामिल किया गया है, जिन पर यह टैरिफ लगाया जा सकता है.

लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत पर 100% टैरिफ अभी नहीं लगा है. यह बिल राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. पहले राष्ट्रपति को बिल पर हस्ताक्षर करके इसे कानून बनाना होगा. इसके बाद हालात को देखते हुए राष्ट्रपति तय कर सकते हैं कि इस अधिकार का इस्तेमाल करना है या नहीं और अगर करना है तो किस देश पर और किस तरह करना है.

यह भी पढ़ें: भारत-चीन पर 100% टैरिफ की तलवार, रूसी तेल खरीदने वाले देशों से जुड़ा बिल अमेरिकी हाउस में पास

अमेरिकी संसद में बिल पर चर्चा के दौरान भारत का नाम भी शामिल किया गया है. (Photo- PTI)

 

भारत पर 100% टैरिफ कैसे लग सकता है?

बिल के तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है. इसके अलावा ऐसे देशों को भी निशाना बनाया जा सकता है, जिन्हें रूस को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाला माना जाता है.

Advertisement

सीनेट से पास हुए वर्जन में रूस के तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों का जिक्र है. वहीं, प्रतिनिधि सभा में चर्चा के दौरान डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने एक संशोधन पेश किया, जिसमें 10 देशों के नाम साफ तौर पर शामिल किए गए. इनमें भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि भारत पर 100% टैरिफ लग सकता है, लेकिन यह अपने आप लागू नहीं होगा.

भारत पर इसका क्या असर होगा?

भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल है. रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में बदलाव आया और भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई. अमेरिका का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि रूस की एनर्जी से होने वाली कमाई यूक्रेन में जारी जंग को आर्थिक मदद देती है. इसी वजह से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भी दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.

नया बिल राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा. (Photo- PTI)

 

अगर ट्रंप भारत पर 100% टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो इसका असर भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर पड़ेगा. अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है और भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है.

Advertisement

भारत के लिए बढ़ी अनिश्चितता

इस बिल को लेकर एक और अहम बात है. यह राष्ट्रपति ट्रंप का सीधे लिया गया फैसला नहीं, बल्कि अमेरिकी कांग्रेस की कार्रवाई है. यानी यह कानून मौजूदा राष्ट्रपति के साथ-साथ भविष्य के अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भी रूस पर दबाव बनाने का एक टूल बन सकता है. भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर बातचीत पहले से चल रही है. ऐसे में यह बिल टैरिफ को लेकर एक नई अनिश्चितता जोड़ सकता है कि भविष्य में राष्ट्रपति इस कानून का इस्तेमाल कब, कैसे और किस हद तक करते हैं.

अगर टैरिफ लगा तो हटेगा कैसे?

अगर राष्ट्रपति किसी देश पर टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो उसे हटाने के लिए व्हाइट हाउस को अमेरिकी कांग्रेस को इसकी जानकारी देनी होगी. यानी टैरिफ हटाने की प्रक्रिया भी प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए होगी. इसके अलावा राष्ट्रपति के पास टैरिफ में छूट देने का अधिकार भी होगा. यानी भारत चाहे तो इस कानून के तहत संभावित टैरिफ से छूट के लिए सीधे व्हाइट हाउस से बातचीत कर सकता है. ऐसे में भारत के लिए अमेरिका के साथ सीधी बातचीत अहम हो सकती है.

अगर राष्ट्रपति ट्रंप 100% टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं तो भारतीय निर्यातक प्रभावित होंगे. (Photo- ITG)

 

Advertisement

चीन पर भी बढ़ेगा दबाव?

इस बिल का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. चीन भी रूस से तेल खरीदने वाला बड़ा देश है और उसका नाम भी संभावित टैरिफ वाले देशों में शामिल है. ऐसे समय में जब चीन के राष्ट्रपति अगले महीने वॉशिंगटन पहुंचने वाले हैं, इस कानून को चीन पर दबाव बढ़ाने के एक संभावित अमेरिकी टूल के तौर पर भी देखा जा रहा है.

रूस पर प्रतिबंध वाला बिल क्या है?

इस बिल को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट के नाम से जाना जाता है. इसका मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. बिल में रूस के नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों, एनर्जी सेक्टर और प्रतिबंधों से बचने में इस्तेमाल होने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है. इनमें तथाकथित "शैडो फ्लीट" के टैंकर भी शामिल हैं.

बिल में ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंधों का भी प्रावधान है और ईरान के एनर्जी सेक्टर से जुड़े सैंक्शंस एक्ट को आगे बढ़ाने की बात कही गई है. यानी फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ लगा नहीं है, लेकिन अगर यह बिल कानून बनता है और राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल करते हैं, तो भारत पर इसका असर पड़ सकता है. साथ ही राष्ट्रपति के पास छूट देने का अधिकार होने से भारत के लिए अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रहेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement