अमेरिका ने रूस के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल को पास किया है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर रूस से तेल या गैस खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है.
अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूसी अधिकारियों और उसकी अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाने वाला बड़ा पैकेज मंजूर किया. इसका उद्देश्य रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधनों को लेकर दबाव बढ़ाना है.
इस बिल का नाम साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है. ग्राहम ने इस प्रस्ताव को तैयार करने में एक साल से भी ज्यादा समय लगाया. हाउस में बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े. अब इसे कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा.
भारत पर असर
यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है. हाउस में बहस के दौरान भारत और चीन की पहचान उन बड़े खरीदारों के तौर पर की गई जिन पर इस प्रावधान का असर पड़ सकता है.
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बिल के समर्थकों का तर्क है कि टैरिफ की धमकी रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को अपनी खरीद पर फिर से सोचने के लिए मजबूर करेगी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आर्थिक दबाव बढ़ाएगी.
रिपब्लिकन कांग्रेसी माइकल मैककॉल ने कहा कि इस कदम का मकसद मॉस्को पर ज़्यादा से ज़्यादा आर्थिक दबाव डालना और पुतिन को यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की ओर ले जाना है. रिपब्लिकन कांग्रेसी माइकल मैककॉल ने ही हाउस में इस कानून को आगे बढ़ाया.
रूसी अधिकारियों, बैंकों पर प्रतिबंध
इस प्रस्ताव के तहत रूस के अधिकारियों, बैंकों के साथ ही 'शैडो फ्लीट' के टैंकरों को निशाना बनाया गया है जो रूसी ऊर्जा की सप्लाई करता है. बिल में ट्रंप को रूस के तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों पर 100% तक टैरिफ लगाने का निर्देश देने का भी प्रावधान है. हालांकि, इसमें उन देशों को छूट दी गई है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं. और जिन्होंने इस आयात को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं.
डेमोक्रेट्स ने टैरिफ अधिकारों का किया विरोध
डेमोक्रेट्स ने इस कानून का विरोध किया. साथ ही, डेमोक्रेट्स ने टैरिफ पर ट्रंप को व्यापक अधिकार देने के फैसले पर सवाल उठाए. डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स ने तर्क दिया कि यह बिल ऐसे राष्ट्रपति को अतिरिक्त टैरिफ अधिकार देगा जो पहले से ही टैरिफ का अमेरिकी नीति के एक टूल के तौर पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं.
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मीक्स ने रूस के व्यापारिक साझेदारों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधान को हटाने की भी कोशिश की. लेकिन उनका यह संशोधन खारिज हो गया. हाउस की प्रक्रिया के दौरान टैरिफ के दायरे को सीमित करने और यूक्रेन को हथियार खरीदने के लिए अतिरिक्त फंड देने समेत अन्य संशोधनों को भी मंजूरी नहीं मिली.
भारत पर एक और ट्रेड शॉक का खतरा
इस बिल ने भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा संबंधों में अनिश्चितता की एक और परत जोड़ दी है. यूक्रेन जंग के बाद वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बदलाव के बीच भारत रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बना हुआ है. अब नए कानून में एक ऐसा सिस्टम बनाया गया है जिससे रूस से लगातार ऊर्जा खरीदने वाले देशों से जुड़ी अमेरिकी आयात पर भारी टैरिफ लग सकता है. इसलिए यह कानून खुद भारत पर कोई नया टैरिफ नहीं लगाता बल्कि ट्रंप को भविष्य में ऐसा करने के लिए एक और कानूनी अधिकार देता है.
अब आगे क्या?
अब हाउस से पास होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप के पास विचार के लिए व्हाइट हाउस जाएगा. अगर वे इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो कानून राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदारों के खिलाफ सेकेंडरी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा.