रूस में पहली बार युद्ध के दौरान संसदीय चुनाव कराए गए और इस चुनाव में यूक्रेन के उन इलाकों के लोगों को भी शामिल किया गया, जिन्हें मॉस्को ने 2022 में अपने कब्जे में लेकर रूस का हिस्सा घोषित किया था. रूस के चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 58 फीसदी मतदान केंद्रों की गिनती के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया को करीब 58 फीसदी वोट मिले थे. चुनाव में विपक्ष की भागीदारी काफी सीमित रही.
यूक्रेन के जिन इलाकों में वोटिंग कराई गई है उनमें डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया शामिल हैं. रूसी अधिकारियों के मुताबिक, इन चारों क्षेत्रों में 35 लाख से ज्यादा मतदाता हैं. रूस ने सितंबर 2022 में इन क्षेत्रों को अपने में मिला लेने का ऐलान किया था, हालांकि उस समय भी इनका पूरा इलाका मॉस्को के नियंत्रण में नहीं था. रूस के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है. क्रीमिया में भी मतदान हुआ, जिसे रूस ने 2014 में अपने में मिला लिया था.
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कब्जाए इलाकों में पहली बार रूसी संसद के लिए वोटिंग
रूस में आम तौर पर संसदीय चुनाव शुक्रवार से रविवार तक चले, लेकिन कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों और रूस की सीमा से लगे कुछ हिस्सों में मतदान इससे पहले ही शुरू कर दिया गया था. अधिकारियों ने इसके लिए सुरक्षा कारणों का हवाला दिया. रूस इन इलाकों को अपने नए क्षेत्र कहता है और यहां रहने वाले लोगों को रूसी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा है.
इस चुनाव में रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा की 450 सीटों के लिए मतदान हुआ. इनमें 225 सीटें पार्टी की लिस्ट के आधार पर और बाकी 225 सीटें सिंगल-सीट चुनाव के जरिए तय होती हैं. शुरुआती आंकड़ों में यूनाइटेड रशिया दोनों तरह की सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी.
चुनाव के दौरान विपक्ष की मौजूदगी भी बड़ा मुद्दा रही. कई विपक्षी और युद्ध विरोधी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली. शुरुआती नतीजों में यूनाइटेड रशिया के अलावा चार अन्य पार्टियां भी संसद में वापसी करती दिख रही हैं. ये पार्टियां आम तौर पर क्रेमलिन की कई प्रमुख पहलों का समर्थन करती रही हैं.
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कब्जे वाले इलाके में चुनाव कराने को यूक्रेन ने बताया अवैध
यूक्रेन ने कब्जाए गए इलाकों में रूस की तरफ से चुनाव कराने को अवैध बताया है. यूरोपीय संघ ने भी इन इलाकों में रूसी चुनाव कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. दूसरी तरफ, मॉस्को का कहना है कि इन क्षेत्रों को रूस में शामिल किया जा चुका है और वहां के लोगों को रूसी राजनीतिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अधिकार है.
शुरुआती नतीजों में यूनाइटेड रशिया की बढ़त के साथ रूस की संसद में क्रेमलिन समर्थक ताकतों का दबदबा बना रहने के संकेत मिले हैं. यह चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है और रूस में राजनीतिक विरोध पर कार्रवाई को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं.