रूस में संसदीय चुनावों के लिए मतदान खत्म हो गया है. इस तीन दिवसीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ कोई मजबूत विपक्षी दल या नेता मैदान में नहीं था. इसके चलते माना जा रहा है कि संसद के निचले सदन 'स्टेट ड्यूमा' में क्रेमलिन और सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी का वर्चस्व और दबदबा बरकरार रहेगा.
केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार कुल 56.66 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. शुरुआती नतीजों और रुझानों में सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी एक बार फिर सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती दिख रही है.
केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से जारी शुरुआती नतीजों की मानें तो सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी 57.54 प्रतिशत वोटों के साथ सबसे आगे चल रही है. वोटों की गिनती जारी है और शुरुआती आंकड़े पार्टी के पक्ष में मजबूत जनादेश का संकेत दे रहे हैं.
यूनाइटेड रशिया सबसे आगे
इंटरफैक्स (IFX) के एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रदर्शन का अनुमान सामने आया है जिसके मुताबिक, यूनाइटेड रशिया को एग्जिट पोल में 49.4 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. दूसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में कम्युनिस्ट पार्टी को 14.2 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है.
वहीं, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ रूस को 10.7 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. जबकि न्यू पीपल पार्टी को 9.7 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद जताई गई है.
क्रीमिया में भी हुआ मतदान
बता दें कि 11.1 करोड़ पात्र मतदाताओं के लिए शुक्रवार से शुरू हुए इस चुनाव में रूस के साथ-साथ यूक्रेन के उन चार अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों और क्रीमिया में भी वोट डाले गए, जिन्हें रूस ने अपने क्षेत्र में मिलाया है. यूक्रेन के अधिकारियों और यूरोपीय संघ (EU) ने इन इलाकों में चुनाव कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से नतीजों को खारिज करने की अपील की है.
वहीं, चुनाव के आखिरी दिन यूक्रेनी सेना ने रूस पर 1,000 से ज्यादा ड्रोन दागे, जिनमें से सैकड़ों मॉस्को की तरफ भेजे गए थे. राजनीतिक विरोधियों को दरकिनार किए जाने और कड़े नियंत्रण के बीच हुए इस चुनाव के जरिए क्रेमलिन जनसमर्थन दिखाने और युद्ध को वैध ठहराने की कोशिश में है.
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फिलहाल मतगणना जारी है और चुनाव आयोग जल्द ही आखिरी नतीजों का ऐलान करेगा, जिससे नई संसद की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी.