
भारत से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में 26 जुलाई की रात हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि नेपाल की खुफिया एजेंसी ने गृह मंत्रालय को सौंपी शुरुआती रिपोर्ट में विदेशी मौलानाओं की गतिविधियों और सीमावर्ती इलाकों में संभावित नेटवर्क की जांच की सिफारिश की है.
सुनसरी के देवगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में धार्मिक झंडों और तेज आवाज में DJ बजाने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हिंसा में बदल गया था. पुलिस के मुताबिक, हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए. बाद में हिंसा दूसरे इलाकों तक भी पहुंची और प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा.

दावों के मुताबिक, खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान और काठमांडू की एक मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी की सुनसरी में मौजूदगी का भी जिक्र है. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ विदेशी धार्मिक लोगों ने नेपाल के भारत से सटे संवेदनशील जिलों का दौरा किया था. हालांकि, इन लोगों की मौजूदगी को हिंसा से जोड़ने वाले आरोपों की पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है.

इन दावों के बीच नेपाल में विदेशी फंडिंग और सीमावर्ती इलाकों में मस्जिद-मदरसों की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. वहीं, भारत में पहले सामने आए कुछ मामलों में नेपाली नागरिकों पर ISI के लिए काम करने के आरोप लग चुके हैं. 2025 में दिल्ली पुलिस ने नेपाली नागरिक प्रभात कुमार चौरसिया को कथित ISI मॉड्यूल के मामले में गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक उसके जरिए भारतीय SIM कार्ड पाकिस्तान भेजे गए थे और 16 में से 11 SIM पाकिस्तान में सक्रिय मिले थे.

सुनसरी हिंसा के बाद नेपाल सरकार ने जांच के लिए समिति बनाई है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. 31 जुलाई तक हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई थी. ऐसे में ISI की कथित भूमिका और विदेशी नेटवर्क से जुड़े दावों की असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी.