नेपाल में आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब बचे हुए लोगों की दिल दहला देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा में एक तस्वीर है जिसमें 97 साल की गुना माया भोहरा नाम की बुजुर्ग महिला को जेसीबी मशीन की बकेट में बैठाकर बचाया गया. यह महिला अपने केयर होम के मलबे में दबी हुई थीं और चार घंटे लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें जिंदा निकाला गया. डॉक्टरों के मुताबिक अब वह अस्पताल में स्वस्थ हो रही हैं. उनके परिवार के सदस्य दीपक ने बीबीसी नेपाली को बताया कि वह किसी योद्धा की तरह लग रही थीं जो जंग जीतकर लौटी हों.
शनिवार तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या 600 के पार पहुंच गई है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू टीमें लगातार खोज और राहत का काम कर रही हैं.
तिमुरे इलाके में सीमा शुल्क अधिकारी राजू बुधाथोकी बुधवार सुबह अपने कमरे में आराम कर रहे थे, जब अचानक पहाड़ी हिलने लगी. उन्हें लगा कि भूकंप आया है. वह भागकर पास की पुलिस चौकी की तरफ गए, लेकिन देखा कि पुलिसकर्मी भी वहां से भाग रहे थे. तार की बाड़ पार करते समय उनके हाथ में चोट लग गई. उन्होंने देखा कि तिमुरे बाजार के घर एक के बाद एक बाढ़ में बह रहे थे. वह किसी तरह जंगल में पहुंचकर बच गए.
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एक और अधिकारी प्रकाश गौतम भी तिमुरे से भागकर जंगल में रात बिताने को मजबूर हुए. उन्होंने तेज गड़गड़ाहट की आवाज सुनी और आसमान काले बादलों से ढक गया. भागते समय उनके पैर की उंगली में चोट लगी. जंगल से उन्होंने पानी में तैरती लाशें देखीं. उस रात नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर ने नूडल्स के पैकेट गिराए, जिससे वह जिंदा बचे. अगले दिन सुबह हेलिकॉप्टर से उन्हें बिडुर पहुंचाया गया.
डोलखा के तुलसी बहादुर भंडारी को बाढ़ के तेज बहाव ने पहाड़ी की तरफ फेंक दिया, जिससे उनकी जान बच गई. सचिन खाती नाम के व्यक्ति काम के सिलसिले में चिलिमे गए हुए थे, जब उनका गांव बह गया. उनकी पत्नी, चार साल का बेटा और मामा राज कुमार दियाली अब भी लापता हैं.
रसुवा जिले के उत्तरगया गांव के 21 साल के मजदूर सुजल थापा सोते समय बाढ़ में बह गए थे. सुरक्षाकर्मियों ने घंटों बाद उन्हें बेहोशी की हालत में बचाया. उनका घर पूरी तरह बह चुका है और मां का कोई पता नहीं है.