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'बार-बार कहा कि गैस ठिकानों को हाथ मत लगाना', ईरान के हमले से सदमे में कतर एनर्जी के CEO, ट्रंप को खूब सुनाया

इजरायल ने इसी हफ्ते साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया. कतरएनर्जी के CEO साद अल-काबी ने बताया कि रास लाफान में हुए नुकसान को ठीक करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि कतर को खतरे का अंदाजा था.

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गैस ठिकाने पर ईरानी हमले से कतर बेहद नाराज है (Photo: Reuters/wikimedia commons)
गैस ठिकाने पर ईरानी हमले से कतर बेहद नाराज है (Photo: Reuters/wikimedia commons)

इजरायल ने अमेरिका की मदद से बुधवार रात दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला कर ईरान को आगबबूला कर दिया. जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है. सरकारी तेल और गैस कंपनी कतरएनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) साद अल-काबी का कहना है कि उन्होंने लगातार इसे लेकर अमेरिका को चेताया था.

साउथ पार्स पर हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जहां लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की रिफाइनरी के मुख्य ठिकाने मौजूद हैं. कतर की सरकारी गैस कंपनी के अनुसार, ईरान के हमले से समुद्री मार्ग से गैस आपूर्ति करने वाली दुनिया के सबसे बड़े गैस सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है.

इसके प्रमुख अल-काबी, जो देश के ऊर्जा मंत्री भी हैं, ने कहा कि ईरान के हमले से इतना नुकसान हुआ है जिसे ठीक करने में तीन से पांच साल का समय लग सकता है. अल-काबी ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों और एग्जीक्यूटिव्स को चेताया था कि अगर ईरान के तेल-गैस ठिकानों पर हमला होता है तो हमें ऐसे खतरे झेलने पड़ सकते हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में साद अल-काबी ने कहा, 'मैं हमेशा चेतावनी देता रहा, हमारे साथ साझेदारी करने वाली तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों से बात करता रहा, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री से बात करता रहा, ताकि उन्हें इस नतीजे के बारे में आगाह कर सकूं और बता सकूं कि यह हमारे लिए नुकसानदेह हो सकता है.'

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कतरएनर्जी के साझेदारों में एक्सॉनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी बड़ी अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां शामिल हैं.

कतरएनर्जी के प्रमुख को खतरे का अंदाजा था

साद अल-काबी ने कहा कि अमेरिका और उसकी कंपनियों को अंदाजा था कि अगर ईरान के गैस फील्ड पर हमला हुआ तो वो कड़ा पलटवार करेगा. उन्होंने कहा, 'उन्हें खतरे की जानकारी थी, और मैं उन्हें लगभग रोजाना याद दिलाता था, उनसे कहता था कि तेल और गैस ठिकानों पर हमलों से हमें एकदम बचने की जरूरत है.'

इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने रॉयटर्स से कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी ऊर्जा टीम यह सच्चाई जानती थी कि ईरान में जारी ऑपरेशन के दौरान तेल और गैस की सप्लाई में कुछ समय के लिए रुकावटें आएंगी. हमें पहले से इन रुकावटों का अंदाजा था जिसे लेकर हमने प्लानिंग की थी.'

कोनोकोफिलिप्स के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हम अपनी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. कतरएनर्जी के साथ मिलकर चीजों को फिर से ठीक करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे.'

ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के तीन हफ्तों के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों ने टैंकरों, रिफाइनरियों और अन्य एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है.

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इसमें अब तक सबसे बड़ा असर कतरएनर्जी के रास लाफान पर पड़ा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) कॉम्प्लेक्स है. अल-काबी ने कहा कि 26 अरब डॉलर की लागत से बने इन संयंत्रों को हुए नुकसान से यूरोप और एशिया को एलएनजी सप्लाई पांच साल तक प्रभावित हो सकती है.

बिना किसी चेतावनी के ईरान के गैस फील्ड को इजरायल ने बनाया निशाना

बुधवार को इजरायल ने ईरान के मुख्य साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया. इसके जवाब में तेहरान ने कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और कतर के रास लाफान में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले किए.

काबी ने कहा कि उन्हें साउथ पार्स पर हमले की कोई पूर्व चेतावनी नहीं थी. उन्होंने कहा, 'मुझे किसी भी चीज की जानकारी नहीं थी, और मुझे नहीं लगता कि किसी को भी थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता था. तो क्या आपको लगता है कि हमें पता होता?'

साउथ पार्स दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड का हिस्सा है, जिसे ईरान कतर के साथ साझा करता है. कतर में इसे नॉर्थ फील्ड कहा जाता है.

काबी ने कहा कि कतरएनर्जी ने अभी तक यह आकलन नहीं किया है कि क्या बीमा युद्ध से हुए नुकसान को कवर करेगा.

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रास लाफान को कितना नुकसान हुआ है?

अल-काबी ने कहा कि रास लाफान पर हमले से न केवल कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का 17 प्रतिशत हिस्सा ठप हो गया, बल्कि नुकसान के कारण इसका असर पांच साल तक रहेगा.

काबी ने कहा, 'कोल्ड बॉक्स खत्म हो गए हैं.' कोल्ड बॉक्स कूलिंग सिस्टम होता है जो गैस को शुद्ध और लिक्विड रूप में ठंडा कर देता है ताकि उसका ट्रांसपोर्टेशन किया जा सके. कतरएनर्जी के 14 ट्रेनें कोल्ड बॉक्स में से 2 को भारी नुकसान हुआ है.

उन्होंने कहा, 'यह मुख्य यूनिट है, यही एलएनजी का कूलिंग बॉक्स है, यह पूरी तरह नष्ट हो चुका है.'

रास लाफान का विस्तार भी होने वाला था लेकिन इस महीने की शुरुआत में ईरानी हमले के बाद कंपनी ने अपने संयंत्रों को खाली करा लिया है. इस देरी की वजह से 2027 से फ्रांस, जर्मनी और चीन जैसे देशों को भेजी जाने वाली गैस प्रभावित होगी.

उन्होंने कहा, 'समंदर के बीच स्थित रिफाइनरी से सभी लोगों को हटाना आसान नहीं था, आप जानते हैं, 24 घंटों में 10,000 लोगों को निकाला गया और सभी ऑपरेशंस बंद कर दिए गए. मुझे बहुत खुशी है कि कोई इस दौरान घायल नहीं हुआ, कोई मौत नहीं हुई. यह हमारे उस फैसले की वजह से हुआ.'

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इस विस्तार के जरिए कतर शीर्ष एलएनजी निर्यातक की अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता था. इसके तहत 2027 तक कतर की तरलीकरण क्षमता 77 मिलियन टन से बढ़ाकर 126 मिलियन टन प्रति वर्ष की जानी थी.

कतरएनर्जी में अब एलएनजी का उत्पादन कब शुरू होगा?

काबी ने कहा कि कतरएनर्जी का उत्पादन तभी दोबारा शुरू हो सकता है जब शत्रुता समाप्त हो जाए, और तब भी पूरी तरह लोडिंग शुरू करने में कम से कम तीन से चार महीने लगेंगे.

काबी, जो कतर एयरवेज के चेयरमैन भी हैं, ने कहा कि इस युद्ध का व्यापक असर खाड़ी की सभी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा.

उन्होंने कहा, 'इसने पूरे क्षेत्र को 10-20 साल पीछे धकेल दिया है. पर्यटन खत्म हो गया है. आपकी एयरलाइंस उड़ान नहीं भर रही हैं... आपका व्यापार गिर गया है. किसी भी बंदरगाह से कुछ भी नहीं चल रहा है.'

उन्होंने आगे कहा, 'हमारे पास ऐसी अर्थव्यवस्थाएं हैं जिनकी आय तेल और गैस से शून्य हो गई है, और हम मुख्य रूप से तेल और गैस आधारित अर्थव्यवस्था हैं. इसलिए जाहिर है कि सरकारों का खर्च बहुत, बहुत कम दर पर होगा.'

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