गल्फ
गल्फ (Gulf) शब्द का प्रयोग पारंपरिक रूप से समुद्र तट से घिरे खारे पानी के बड़े इंडेंटेड Navigable Bodies (नौगम्य पिंडों) के लिए किया जाता था. एक गल्फ या खाड़ी, समुद्र से भूभाग का एक बड़ा प्रवेश है (Gulf, a large Inlet). गल्फ में फारस की खाड़ी (Persian Gulf), मैक्सिको की खाड़ी (Gulf of Mexico), फिनलैंड की खाड़ी (Gulf of Finland) और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) प्रमुख शिपिंग क्षेत्र हैं.
1901 से 15 मार्च 1985 तक गल्फ ऑयल एक प्रमुख वैश्विक तेल कंपनी थी (Gulf Oil). 1941 में आठवीं सबसे बड़ी अमेरिकी मेन्यूफेक्चरिंग कंपनी और 1979 में नौवीं सबसे बड़ी, गल्फ ऑयल, सेवन सिस्टर्स ऑयल कंपनियों (Seven Sisters Oil Company) में से एक थी. कैलिफोर्निया के स्टैंडर्ड ऑयल के साथ विलय से पहले, गल्फ मेलन फैमिली के प्रमुख उपकरणों में से एक था. गल्फ और मेलॉन फाइनेंशियल दोनों का मुख्यालय पिट्सबर्ग में था. जिसमें गल्फ का मुख्यालय गल्फ टॉवर था. यह यू.एस. स्टील टॉवर के पूरा होने तक पिट्सबर्ग की सबसे ऊंची इमारत थी (Gulf Oil merger with Standard Oil).
गल्फ ऑयल कॉर्पोरेशन (GOC) का 1985 में एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में अस्तित्व समाप्त कर दिया गया.
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी देशों की तेल और गैस सप्लाई में भारी रुकावट आई है. यूएई ने इस संकट से निपटने के लिए फुजैराह के रास्ते एक नई तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य 2027 तक निर्यात क्षमता दोगुनी करना है.
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई है. ईरान ने खाड़ी देशों के तेल निर्यात को रोक दिया है, लेकिन यूएई ने गुप्त रूप से तेल निर्यात जारी रखा है. यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC अप्रैल में कई टैंकरों के जरिए तेल निर्यात कर रही है.
ईरान युद्ध के दौरान भले सबसे ज्यादा चर्चित खार्ग आइलैंड रहा हो, जहां से ईरान का 90 फीसदी तेल निर्यात होता है. लेकिन, ईरानी फौजी तैयारी और दुनिया की तेल सप्लाय लाइन पर नजर रखने वालों से पूछिए, तो बताया जाएगा कि असली गले की हड्डी होर्मुज स्ट्रेट के सबसे संकरे इलाके पर मौजूद एक छोटा सा टापू- लरक आइलैंड है. जहां से गुजरने वाले ऑयल और गैस टैंकरों पर लगातार हमले हो रहे हैं.
यूएई को ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में भारी नुकसान हुआ है. ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर यूएई में सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं. यूएई ने अकेले ही इन हमलों का सामना किया और अमेरिका इजरायल को बचाने में लगा रहा. ईरान युद्ध ने खाड़ी में अमेरिकी सुरक्षा के प्रति अविश्वास पैदा किया है और अब वहां के बुद्धिजीवी अमेरिकी ठिकानों का विरोध कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान बातचीत के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में ओमानी रास्ते से जहाजों को सुरक्षित गुजरने देने का प्रस्ताव दिया है. इसके बाद, फंसे टैंकरों और वैश्विक तेल सप्लाई को राहत मिलने की उम्मीद है.
अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक सीजफायर के बावजूद, खाड़ी क्षेत्र के अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी देश- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर- अब हवाई सुरक्षा और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति के लिए अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते. ये देश दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और ब्रिटेन जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं.
Iran-US Ceasefire Talks Live Updates: इस्लामाबाद शांति वार्ता बिना किसी नतीजे पर पहुंचे खत्म हो गई. अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस को बताया कि हमने 21 घंटों तक लगातार कई अहम मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन ईरान ने समझौते की शर्तों को मानने से इनकार दिया है, जबकि ईरान का कहना है कि अमेरिका इस बातचीत से निकलना चाहता था.
ईरान-इजरायल-यूएस संघर्ष के बाद सीजफायर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ नेताओं ने ईरान की जीत बताई है. वहीं, ईरान के प्रस्तावों और दावों पर अभी भी आधिकारिक पुष्टि बाकी है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव पर बहरीन की अगुवाई में वोटिंग हुई, लेकिन रूस और चीन ने वीटो कर प्रस्ताव को विफल कर दिया. प्रस्ताव फेल होने पर बहरीन ने सुरक्षा परिषद की कड़ी आलोचना की है.
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेल अवीव का लवेन्स्की मार्केट अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है. 'लिटिल तेहरान' के नाम से मशहूर यह बाजार ईरानी मसालों और जायके के लिए मशहूर है.
मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला मुख्य पुल 'किंग फहद कॉजवे' मंगलवार सुबह बंद कर दिया गया है. इस पुल के बंद होने से बहरीन का सड़क संपर्क कट गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों पर तीखा व्यक्तिगत हमला किया है. ट्रंप ने कहा कि मैक्रों अब भी जबड़े पर पड़े थप्पड़ की चोट से उबर नहीं पाए हैं और उनकी पत्नी उनके साथ खराब व्यवहार करती हैं.
मिडिल ईस्ट में चलते थे भारत के नोट! क्यों कुवैत, कतर के पास नहीं थी अपनी करेंसी? कभी खाड़ी और मिडिल ईस्ट के कई देशों में भारतीय रुपये चलते थे. आजादी के बाद भी ओमान, कतर, बहरीन, यूएई और कुवैत जैसे देशों में 1947 से लेकर 1966 तक भारतीय रुपया प्रचलन में रहा. इसकी बड़ी वजह ऐतिहासिक और प्रशासनिक जुड़ाव था. ब्रिटिश शासन के दौरान ये क्षेत्र भारत से संचालित होते थे और आर्थिक लेनदेन भारतीय रुपये में ही होता था
मिडल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है. सऊदी अरब और यूएई सहित अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने को कहा है.
ना चीन में रिलीज, ना गल्फ़ का साथ. तो कैसे विदेशों में कमाई के रिकॉर्ड तोड़ रही धुरंधर टू? रणवीर सिंघ की धुरंधर टू का खुमार बॉक्स ऑफिस पर साफ नजर आ रहा है. सिर्फ 11 दिनों में फिल्म ने 1365 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है और अब ये दंगल के रिकॉर्ड को चुनौती देती दिख रही है. खास बात ये है कि फिल्म चीन और खाड़ी देशों जैसे बड़े मार्केट्स में रिलीज हुए बिना ही ये कमाल कर रही है
भारत ने कई सालों बाद ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का पहला कार्गो खरीदा है. यह कार्गो भारत के प्रमुख तेल कंपनियों के बीच बांटा जाएगा. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित हुई थी, जिससे भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों को नुकसान हुआ.
ईरान की रक्षा परिषद ने अमेरिका और इजरायल को बड़ी धमकी दी है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल उसके तटों या द्वीपों पर हमला करते हैं तो खाड़ी देशों तक जाने वाले हर रास्ते को बारूद से भर देगा.
ईरान और कतर के बीच जारी युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई अगले 10 दिनों में अचानक रुकने वाली है. खाड़ी से अब केवल एक गैस टैंकर एशिया आने वाला है. इसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान पर हो रहा है जो अपना अधिकांश LNG कतर से आयात करता है.
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी देशों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. इस नुकसान के बीच अगर खाड़ी देश चाहें तो युद्ध बहुत जल्द खत्म हो सकता है. वो फोर्स मेज्योर घोषित शक्ति संतुलन अपने पक्ष में झुकाकर इजरायल अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर कर सकते हैं.
इजरायल ने इसी हफ्ते साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया. कतरएनर्जी के CEO साद अल-काबी ने बताया कि रास लाफान में हुए नुकसान को ठीक करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि कतर को खतरे का अंदाजा था.
युद्ध सिर्फ सरहदें नहीं बदलता, वह एक पूरी पीढ़ी के करियर की दिशा भी बदल देता है. आज के दौर में डिग्री से ज्यादा आपकी एडाप्ट करने की क्षमता मायने रखती है. अगर आप मिडिल ईस्ट जाने की सोच रहे हैं, तो पारंपरिक सेक्टर्स के बजाय टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स पर फोकस करें.