अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के अधिकारियों को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. ICE जल्द ही अपने अधिकारियों को ऐसे स्पेशल दस्ताने देने की योजना बना रहा है, जो विरोध करने वाले लोगों को इलेक्ट्रिक शॉक दे सकते हैं.
होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट की ओर से जारी एक नोटिस के मुताबिक, आईसीई मार्च तक अपने अधिकारियों और एजेंटों के लिए हजारों 'कंडक्टिव डिट्रैक्शन और डी-एस्केलेशन डिवाइस' खरीदने की योजना बना रहा है. इस प्रोजेक्ट पर 20 मिलियन डॉलर तक खर्च किए जाने की बात कही गई है.
इन दस्तानों को 'G.L.O.V.E.' कहा जाता है, जिसका मतलब 'Generated Low Output Voltage Emitter' है. इन्हें केंटुकी के लेक्सिंगटन स्थित कम्प्लाइंट टेक्नोलॉजीज कंपनी की ओर से बनाया गया है. पिछले कुछ सालों में इनका इस्तेमाल कुछ जेलों और पुलिस विभागों की ओर से किया जाता रहा है.
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कैसे काम करते हैं ये दस्ताने?
कंपनी के मुताबिक, ये दस्ताने आम गश्त वाले ग्लव्स की तरह ही काम करते हैं, जब तक कि अधिकारी इनका इलेक्ट्रिक मोड चालू करने के लिए स्विच न दबाएं. इन दस्तानों को किसी व्यक्ति की त्वचा पर सीधे लगाना पड़ता है.
इसके बाद यह एक तेज दर्द का अहसास कराते हैं, जिससे अधिकारी कुछ ही सेकंड में आरोपी को काबू में कर लेते हैं. जानकारों का कहना है कि इसका दर्द बहुत तेज और अचानक होता है, जैसे किसी मधुमक्खी ने डंक मार दिया हो. इसे छोटे या कमजोर अधिकारियों के लिए मददगार माना जा रहा है ताकि वे टकराव को जल्दी खत्म कर सकें.
इस प्लान के सामने आने के बाद नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता जताई है. अमेरिकन सिविल लिबरल यूनियन (ACLU) की जेएन रोलनिक बोर्चेट्टा ने कहा कि जनता को इस बात का बिल्कुल भरोसा नहीं होना चाहिए कि आईसीई अधिकारी इन उपकरणों का सही इस्तेमाल करेंगे.
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सिविल इमिग्रेशन एनफोर्समेंट के लिए इन उपकरणों की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि चुपचाप बटन दबाकर बिजली के झटके देने वाले ऐसे दस्तानों को लाना जनता के लिए खतरे की घंटी है.
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इस्तेमाल करने के लिए अधिकारियों को पूरा करना होगा कोर्स
कंपनी का यह भी कहना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल सजा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इसका इस्तेमाल बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या विकलांग लोगों पर बिल्कुल नहीं होना चाहिए.
निर्माता कंपनी के मुताबिक, इन दस्तानों का इस्तेमाल करने के लिए अधिकारियों को एक कोर्स पूरा करना होगा और हर दो साल में दोबारा ट्रेनिंग लेनी होगी. हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि सुरक्षा नियमों के बावजूद इस तकनीक के गलत इस्तेमाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.