ये कहानी मुर्शिदाबाद के बेलडांगा की है. यहां 16 साल का लड़का पिछले कई साल से तालाब में रह रहा है. लड़के का नाम है इकबाल शेख. इकबाल के बारे में सुनकर पहला खयाल शायद यही होगा कि आखिर कोई इंसान लगातार तालाब में कैसे रह सकता है? लेकिन इकबाल के लिए ये कोई करतब नहीं है, न कोई रिकॉर्ड बनाने की कोशिश. उसका कहना है कि पानी से बाहर निकलते ही उसके शरीर में तेज जलन होने लगती है. जैसे ही वह पानी में उतरता है, उसे राहत महसूस होती है.
यही वजह है कि पिछले करीब पांच साल से इकबाल का ज्यादातर वक्त तालाबों के पानी में बीत रहा है. कभी चार-पांच दिन तक वह पानी में ही रहता है और कभी यह सिलसिला सात दिनों तक भी चलता है. स्थानीय लोग कहते हैं कि इकबाल के लिए अब पानी सिर्फ पानी नहीं रहा, बल्कि उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
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इकबाल बेलडांगा का रहने वाला है. उम्र महज 16 साल है, लेकिन उसकी जिंदगी की कहानी बाकी बच्चों से बिल्कुल अलग है. जहां उसकी उम्र के बच्चे स्कूल, दोस्तों और खेलकूद के बीच अपना समय बिताते हैं, वहीं इकबाल घंटों तालाब में तैरता रहता है. कई बार वह दिन-रात पानी में ही गुजार देता है.
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स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब पांच साल पहले इकबाल ने घर से बाहर ज्यादा वक्त बिताना शुरू किया. धीरे-धीरे तालाब उसका ठिकाना बन गया. आज हालात ये हैं कि वह बेलडांगा शहर के अलग-अलग तालाबों में कई-कई दिनों तक पानी में रहता है. लोगों के लिए ये हैरानी की बात है, लेकिन इकबाल के लिए इसके पीछे एक वजह है.
वह कहता है कि उसके शरीर में लगातार जलन होती है. पानी से बाहर निकलते ही ये जलन बढ़ जाती है. लेकिन पानी में उतरने के बाद उसे राहत मिलती है. यानी जिस चीज से बाकी लोग कुछ देर बाद बाहर निकलना चाहते हैं, इकबाल उसी पानी में वापस लौट जाना चाहता है.

'पानी में रहता हूं तो जलन कम होती है'
इकबाल अपने साथ होने वाली इस परेशानी को अपने तरीके से समझाता है. उसका दावा है कि उसके ऊपर किसी जिन्न, परी या अदृश्य शक्ति का साया है. उसका कहना है कि इसी वजह से उसके शरीर में जलन होती है. हालांकि, इस दावे की कोई पुष्टि सामने नहीं आई है. इकबाल की कहानी सिर्फ हैरत की कहानी नहीं है. यह एक ऐसे बच्चे की कहानी है, जिसे शायद सही मेडिकल हेल्प की जरूरत है. क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इकबाल पानी में क्यों रहता है.
सवाल ये भी है कि आखिर उसके शरीर में ऐसी कौन-सी परेशानी है, जिसकी वजह से उसे पानी में रहने पर राहत मिलती है? इसका जवाब डॉक्टरों की जांच के बाद ही मिल सकता है.
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लगातार कई दिनों तक पानी में रहने का असर अब इकबाल के शरीर पर भी नजर आने लगा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसके हाथ-पैर और शरीर की त्वचा काफी सफेद पड़ गई है. लंबे समय तक पानी में रहने की वजह से उसे सर्दी-खांसी की शिकायत भी रहने लगी है. यानी जिस पानी में उसे राहत मिलती है, वही पानी लंबे समय में उसकी सेहत के लिए नई परेशानी पैदा कर सकता है. इसके बावजूद इकबाल पानी से बाहर ज्यादा देर रहना नहीं चाहता. वह वापस तालाब में चला जाता है.

इलाज के लिए गया, लेकिन बात नहीं बनी
इकबाल की परेशानी को लेकर स्थानीय लोगों ने उसे इलाज कराने की सलाह दी. वह स्थानीय ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी गया था. लेकिन इकबाल का कहना है कि वहां उसे ऐसी मदद नहीं मिली, जिससे उसकी समस्या दूर हो सके. दूसरी तरफ परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे किसी बड़े निजी अस्पताल में ले जाकर लंबे समय तक इलाज कराया जा सके. यहीं से कहानी का एक और पहलू सामने आता है.
एक तरफ 16 साल का लड़का ऐसी स्थिति में है, जिसे समझने के लिए मेडिकल जांच जरूरी है. दूसरी तरफ उसके परिवार के पास महंगे इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. नतीजा ये है कि इकबाल फिर तालाब में लौट जाता है.
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इकबाल की कहानी धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैल चुकी है. अब रोज बड़ी संख्या में लोग उसे देखने तालाब के किनारे पहुंचते हैं. स्कूली बच्चे भी वहां आते हैं. कुछ लोग उसे देखकर हैरान होते हैं, कुछ उससे बात करने की कोशिश करते हैं और कई लोग उसके लिए खाने-पीने का सामान भी लेकर आते हैं. कोई उसे चिउड़ा देता है. कोई बिस्किट. कोई दूसरी खाने की चीज. लोग अपनी तरफ से उसकी मदद करना चाहते हैं, लेकिन उसका असली समाधान अभी भी नहीं मिला है.

लोग पूछते हैं- आखिर कब तक?
इकबाल की उम्र सिर्फ 16 साल है. अगर वह इसी तरह तालाबों में कई-कई दिन बिताता रहा, तो उसकी सेहत पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या लंबे समय तक पानी में रहने से उसका शरीर और कमजोर होगा? क्या उसके शरीर में कोई ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से उसे ठंडे पानी में राहत मिलती है? क्या मामला त्वचा से जुड़ी किसी समस्या का है? या फिर उसकी परेशानी का कोई दूसरा कारण है? इन सवालों के जवाब फिलहाल नहीं हैं. स्थानीय लोग अब उसके इलाज को लेकर चिंतित हैं.
पानी से बाहर निकलते ही शरीर में जलन. पानी के अंदर जाते ही राहत. और इसी एहसास ने पिछले पांच साल में एक 16 साल के लड़के को तालाबों का बाशिंदा बना दिया. लेकिन इस कहानी को सिर्फ एक अजीब घटना मानकर आगे बढ़ जाना शायद ठीक नहीं होगा. क्योंकि इकबाल कोई वयस्क नहीं, बल्कि 16 साल का किशोर है. उसकी स्थिति को समझने और उसका उचित इलाज कराने की जरूरत है. स्थानीय लोगों की चिंता भी इसी वजह से बढ़ रही है.

लोग चाहते हैं कि इकबाल की ठीक से मेडिकल जांच हो. उसकी परेशानी की असली वजह सामने आए और उसे ऐसा इलाज मिले, जिससे उसे पानी के अंदर रहने को मजबूर न होना पड़े. फिलहाल इकबाल फिर तालाब में है. लोग किनारे खड़े होकर उसे देख रहे हैं. कोई उसके लिए बिस्किट लेकर आया है, कोई चिउड़ा. लेकिन उस तालाब के बीच एक सवाल तैर रहा है- आखिर ऐसा क्या है, जो 16 साल के इकबाल को पांच साल से पानी के बाहर की दुनिया से दूर रखे हुए है? इस सवाल का जवाब शायद सही मेडिकल जांच में छिपा है. और जब तक वो जवाब नहीं मिलता, बेलडांगा का ये तालाब इकबाल का घर बना रहेगा.