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ममता बनर्जी या ऋतब्रत, शहीद दिवस पर रैली की TMC के किसी गुट को नहीं मिली अनुमति

ममता बनर्जी जब कांग्रेस में थीं, तब से ही 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाती आ रही हैं. ममता की विशाल रैली कोलकाता के ऐतिहासिक धर्मतला मैदान में होती आई है, लेकिन इस बार इस पर ग्रहण लग गया है.

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TMC 21 जुलाई को मनाती है शहीद दिवस (Photo: ITG)
TMC 21 जुलाई को मनाती है शहीद दिवस (Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल की सियासत बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. सूबे में सत्ता के साथ आयोजनों की परंपराएं भी बदलती दिख रही हैं. जुलाई का महीना शुरू होते ही एक रैली चर्चा का केंद्र रहती थी. वह रैली थी शहीद दिवस पर ममता बनर्जी की मेगा रैली. 21 जुलाई को कोलकाता के ऐतिहासिक धर्मतला मैदान में सीएम रहते हुए और इससे पहले भी, ममता बनर्जी अपने कांग्रेस के दिनों से ही 21 जुलाई को मेगा रैली करती आ रही थीं. इस बार यह परंपरा टूटती नजर आ रही है.

तृणमूल कांग्रेस ने अपनी इस रैली के लिए 27 जून को कोलकाता पुलिस से औपचारिक अनुमति मांगी थी. कोलकाता पुलिस ने अनुमति तो दी नहीं, उल्टे यह आदेश जरूर जारी कर दिया कि राजधानी में अगले 60 दिनों तक कोई रैली आयोजित नहीं की जा सकेगी. कोलकाता पुलिस ने विक्टोरिया हाउस और केसी दास क्रॉसिंग इलाके में किसी भी बैठक, जनसभा या जुलूस पर 60 दिन के लिए रोक लगा दी है.

कोलकाता पुलिस ने खुफिया इनपुट को आधार बनाकर यह रोक लगाई है, जिसमें कथित रूप से ऐसी आशंका जताई गई है कि जमावड़ों की वजह से शांति भंग हो सकती है और ट्रैफिक सिस्टम भी अस्त-व्यस्त हो सकता है. कोलकाता पुलिस की ओर से जारी किए गए इस आदेश में तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली को लेकर भी रुख स्पष्ट किया गया है. कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि ममता बनर्जी का धड़ा हो या ऋतब्रत बनर्जी का गुट हो, किसी भी गुट को रैली करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

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कोलकाता पुलिस ने आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. गौरतलब है कि इस आयोजन की तैयारियां दो महीने पहले ही शुरू हो जाती थीं, जब ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार थी. बता दें कि ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी में रहते 21 जुलाई 1993 को फोटो वाले मतदाता पहचान पत्र की मांग को लेकर महाकरण अभियान की शुरुआत की थी. इस दौरान पूरा कोलकाता उग्र प्रदर्शन की चपेट में आ गया था.

उग्र आंदोलनकारियों ने पुलिस की गाड़ी फूंक दी थी और पुलिसिया कार्रवाई में 13 कांग्रेस कार्यकर्ता मारे गए थे. इन कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देने के लिए ममता बनर्जी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाती आ रही हैं. ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर जब टीएमसी बनाई, तब भी यह परंपरा बरकरार रखी.

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