पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा की 45 सीटों के लिए तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं, जो 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच चलेंगे. अब विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. मंगलवार को जारी शुरुआती नतीजों के मुताबिक, सेना समर्थित पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने 13 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज की है.
वहीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के खाते में चार सीटें आई हैं. बता दें कि केंद्र स्तर पर दोनों दल गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं. हालांकि, PoK को हुए मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे हैं. PPP नेताओं ने चुनाव आयोग से मांग की है कि जांच पूरी होने तक नतीजे घोषित न किए जाएं.
नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N को मिली नौ सीटों के मुकाबले भुट्टो परिवार की PPP सिर्फ चार सीटों पर सिमट गई. PPP के वरिष्ठ नेता नैयर बुखारी ने सात सीटों पर धांधली का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा,'हमारी जीत वाली सीटें PML-N को तोहफे में दे दी गईं.'
PML-N ने चुनावों को बताया 'शांतिपूर्ण और निष्पक्ष'
वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने इन आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि चुनाव कुल मिलाकर 'शांतिपूर्ण और निष्पक्ष' रहे, सिर्फ एक सीट पर हिंसा देखने को मिली. दरअसल मतदान के दिन हुई हिंसक झड़प में PPP के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और दो घायल हो गए. आरोप है कि ये हिंसा PML-N नेता की ओर से हुई गोलीबारी के बाद भड़की.
बता दें कि PoK में ये चुनाव इलाके में करीब दो महीने से जारी हिंसा के बाद हो रहे हैं. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई में 12 विवादित शरणार्थी सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. भारतीय विदेश मंत्रालय ने 14 जुलाई को कहा था कि PoK में हो रहे प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों से किए जा रहे 'प्रशासनिक उत्पीड़न और शोषण' का नतीजा है.
PoK में चुनावों पर MEA इंडिया का बयान
PoK में चुनावों पर MEA के स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा, 'हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में हो रहे सो-कॉल्ड लेजिस्लेटिव असेंबली चुनावों के बारे में रिपोर्ट देखी हैं. जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के पूरे यूनियन टेरिटरी, जिसमें पाकिस्तान के अभी गैर-कानूनी और जबरदस्ती कब्जे वाले इलाके भी शामिल हैं, भारत के जरूरी हिस्से हैं.'
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उन्होंने आगे कहा, 'अभी का दिखावटी चुनावी काम पाकिस्तान की तरफ से अपने गैर-कानूनी कब्जे को छिपाने और इलाके में अपने गंभीर ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन को छिपाने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है. पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में चल रहा बड़ा विरोध उसके आर्थिक शोषण, लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित करने और एडमिनिस्ट्रेटिव ज़ुल्म का सीधा नतीजा है.'