पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और डायमंड हार्बर पुलिस के बीच एफआईआर अपलोड न करने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मोइत्रा के वकील अर्क कुमार नाग ने डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का नोटिस भेजा है.
आरोप है कि 1 सितंबर 2026 को दर्ज साइबर क्राइम एफआईआर संख्या 15/26 को करीब 72 घंटे बाद भी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया. यह मामला तब सामने आया जब इसी एफआईआर के सिलसिले में मोइत्रा को 10 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया.
मामले की शुरुआत तब हुई जब नदिया के कोतवाली थाने से श्रीजीब सिन्हा नाम के एक अफसर ने वकील नाग को फोन किया और बताया कि वे उनके कृष्णनगर स्थित घर पर 5 सितंबर की एक नोटिस देने पहुंचे हैं. यह नोटिस बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत लेडी सब इंस्पेक्टर संघीता घोष ने जारी की थी. नोटिस मिलते ही वकील ने डायमंड हार्बर पुलिस जिले के एफआईआर डाउनलोड सर्वर पर एफआईआर की कॉपी देखनी चाही, लेकिन वह वहां उपलब्ध नहीं थी.
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वकील का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में साफ आदेश दिया है कि हर एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर पुलिस की वेबसाइट पर डाली जानी चाहिए, कुछ अपवादों को छोड़कर. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 4 मई के बाद से पश्चिम बंगाल पुलिस या तो एफआईआर समय पर अपलोड नहीं कर रही या अधूरी और अस्पष्ट कॉपी डाल रही है, जिससे जांच में बुलाए गए लोगों को नुकसान होता है.
वकील ने पुलिस से तुरंत एफआईआर की पूरी और साफ कॉपी वेबसाइट पर डालने की मांग की है और कहा है कि जब तक ऐसा नहीं होता, मोइत्रा 10 सितंबर को पेश नहीं हो पाएंगी, हालांकि वे जांच में सहयोग करने को तैयार हैं. यह पत्र सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और कलकत्ता हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के सचिव को भी भेजा गया है, जिसमें मामला चीफ जस्टिस के सामने रखने का अनुरोध किया गया है. मोइत्रा ने भी सोशल मीडिया पर पुलिस पर सवाल उठाते हुए डीजीपी से कार्रवाई की अपील की है.