IIT में प्रोफेसर का नाम सुनते ही आमतौर पर जहन में रिसर्च, लैब, क्लासरूम और सीरियस अकादमिक चर्चाओं की तस्वीर आती है. लेकिन IIT बॉम्बे के एक कार्यक्रम का वीडियो इस छवि से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहा है. केमिस्ट्री विभाग की प्रमुख प्रोफेसर रुचि आनंद का एक डांस वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है.
वीडियो में प्रोफेसर रुचि आनंद पारंपरिक परिधान में फिल्म 'पद्मावत' के चर्चित गाने 'नैनोवाले ने' पर डांस करती नजर आ रही हैं. वीडियो में दिखता है कि गाने की धीमी और मधुर धुन के साथ हाथों के बेहद सहज मूवमेंट और भाव-भंगिमाएं दिखाई देती हैं.
यह प्रस्तुति किसी बड़े सार्वजनिक स्टेज शो की नहीं, बल्कि आईआईटी बॉम्बे के केमिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित एक इन-हाउस संगोष्ठी के सांस्कृतिक कार्यक्रम की बताई जा रही है. इसी वजह से वीडियो को देखकर लोगों को संस्थान की अकादमिक दुनिया का एक कम दिखाई देने वाला पहलू भी देखने को मिला.
लैब और रिसर्च से अलग दिखा प्रोफेसर का अंदाज
प्रोफेसर रुचि आनंद की पेशेवर पहचान पूरी तरह अकादमिक और वैज्ञानिक क्षेत्र से जुड़ी है. वह आईआईटी कानपुर की पूर्व छात्रा हैं और उन्होंने अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है.
केमिस्ट्री के क्षेत्र में अकादमिक जिम्मेदारियों के साथ उनका काम रिसर्च, अध्यापन और वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ा है. ऐसे में जब उनका डांस वीडियो सामने आया तो लोगों का ध्यान सिर्फ प्रस्तुति पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी गया कि एक प्रोफेसर की जिंदगी में पेशेवर जिम्मेदारियों के अलावा उनकी अपनी रुचियां भी हो सकती हैं.
देखें वीडियो
'नैनोवाले ने...' पर दिखा शास्त्रीय अंदाज
वीडियो में रुचि आनंद 'नैनोवाले ने' गाने पर डांस करती दिखाई देती हैं. यह गाना 2018 में आई फिल्म 'पद्मावत' का हिस्सा था और इसे नीति मोहन ने गाया था. फिल्म में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे.
रुचि आनंद की प्रस्तुति में डांस के दौरान हाथों की मुद्राओं और चेहरे के भाव पर खास ध्यान दिखाई देता है. यही वजह है कि वीडियो को देखने वाले कई लोगों ने उनके अंदाज की तारीफ की.
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सोशल मीडिया पर क्यों पसंद आया वीडियो?
इस वीडियो की खासियत सिर्फ डांस नहीं है. सोशल मीडिया यूजर्स के लिए यह इसलिए भी दिलचस्प बन गया क्योंकि यहां एक ऐसे व्यक्ति का दूसरा पक्ष दिखाई दे रहा है, जिसकी सार्वजनिक पहचान आमतौर पर विज्ञान और शिक्षा से जुड़ी होती है.
कई लोगों ने इस बात की सराहना की कि प्रोफेसर ने अपने व्यस्त अकादमिक जीवन के बीच अपनी पसंद के लिए भी जगह बनाई. प्रतिक्रियाओं में यह विचार भी देखने को मिला कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद या पेशे तक सीमित नहीं होती.
एक प्रोफेसर का काम रिसर्च पेपर, प्रयोगशाला और क्लासरूम तक जरूर फैला होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसकी अपनी रचनात्मक रुचियों के लिए जगह नहीं हो सकती.