ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस छोड़कर ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हुए कमरहाटी विधायक मदन मित्रा राजनीति से छोड़ने का विचार कर रहे हैं. मदन मित्रा ने कहा है कि वे राजनीति से थक चुके हैं और इसे छोड़ने का सोच रहे हैं.
कभी ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी रहे मित्रा ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल पर निराशा जताई. उन्होंने कहा कि लोग डर और परेशानी में जी रहे हैं और इस साल की दुर्गा पूजा पिछले सालों की तुलना में काफी अलग थी.
गुरुवार को एक टेलीविजन चैनल से बात करते हुए मित्रा ने कहा, 'पहले की पूजा के दौरान इतने आंसू नहीं बहाए गए थे. दुख और परेशानी का अहसास है.'
मित्रा ने कहा कि उन्हें आम लोगों की मुश्किलों की चिंता है. उन्होंने कहा कि वे उत्तर 24 परगना जिले में अपने चुनाव क्षेत्र में आजादी से घूम नहीं पा रहे हैं और न ही मतदाताओं तक पहुंच पा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने मुझे वोट दिया, वे मुझसे मिल भी नहीं सकते. मैं उलझन में हूं. मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता जिससे लोगों को परेशानी हो.
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात में लोग परेशान हैं और संघर्ष कर रहे हैं. इसी वजह से वे एक्टिव पॉलिटिक्स से हटने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं.
मित्रा ने कहा, 'एक तरीका राजनीति छोड़ना है. मैं बहुत थक गया हूं. राजनीति में बहुत नफरत है. मुझे राजनीति से नफरत है.'
मित्रा ने सीएम शुभेंदु अधिकारी के व्यस्त राजनीतिक शेड्यूल का भी जिक्र किया और कहा कि वे उन तक पहुंचना चाहते हैं. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ शुभेंदु अधिकारी को भी शुभकामनाएं दीं.
उन्होंने कहा, 'मैं दीदी (ममता बनर्जी) और अपने छोटे भाई शुभेंदु को शुभकामनाएं देता हूं. हमारे CM बहुत सक्रिय हैं और हर दिन कई कामों में व्यस्त रहते हैं, लेकिन प्रजा होने के नाते, मैं बस उन तक पहुंचना चाहता हूं.'