पश्चिम बंगाल के कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया है. टीएमसी ने कोलकाता पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी का कहना है कि पुलिस कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में घुस गई. टीएमसी ने इसे अवैध कार्रवाई बताया है. पार्टी ने कहा है कि इस मामले में वह कोर्ट का रुख करेगी।
टीएमसी के मुताबिक, पुलिस एक नोटिस लेकर अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पहुंची थी. पार्टी ने इस नोटिस को अवैध बताया है. मामले की जानकारी मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी खुद मौके पर पहुंचे. उन्होंने संबंधित सरकारी अधिकारी से नोटिस दिखाने को कहा.
TMC का आरोप है कि मौके पर मौजूद कोलकाता नगर निगम के प्रतिनिधि कोई वैध नोटिस नहीं दिखा सके. इसके बाद पुलिस की मदद से कार्यालय में घुस किया गया. पार्टी का कहना है कि इस दौरान कार्यालय में मौजूद लोगों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई.
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पार्टी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन और अभिषेक बनर्जी के साथ भी पुलिस ने मारपीट की. पार्टी के मुताबिक, वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को भी धक्का दिया गया. उन्हें परेशान किया गया.
TMC ने महिला सुरक्षा कर्मचारियों के साथ भी बदसलूकी का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि कार्रवाई के दौरान महिला सुरक्षा कर्मचारियों के कपड़े तक फट गए. टीएमसी ने इस पूरी घटना को पुलिस की मनमानी और बर्बर कार्रवाई बताया है.
अभिषेक बर्नजी बोले-नगर पालिका ही आखिरी उम्मीद
वहीं TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट कर पूरे विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दिया है. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में संवैधानिक व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और राज्य धीरे-धीरे पुलिस के दबदबे वाले शासन की ओर बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि जब सरकार की ताकत संविधान की सीमाओं के बिना काम करने लगे, तब लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका ही आखिरी उम्मीद बचती है.
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर लोगों के मौलिक अधिकारों को कमजोर किए जाने के समय अदालत दखल नहीं देगी, तो मामला सिर्फ किसी व्यक्ति की आजादी तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में लोकतंत्र के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो जाएगा.
कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाएगी पार्टी
टीएमसी ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर कोर्ट जाएगी. पार्टी के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई गैरकानूनी थी. पार्टी ने कार्यालय में जबरन घुसने करने और नेताओं, कर्मचारियों के साथ कथित बदसलूकी पर सवाल उठाए हैं.
टीएमसी ने कहा कि सरकारी अधिकारी को पहले वैध नोटिस दिखाना चाहिए था. पार्टी का आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया. इसके बावजूद पुलिस की मौजूदगी में कार्यालय में प्रवेश किया गया.
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. टीएमसी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. पार्टी ने इसे राजनीतिक और कानूनी तौर पर चुनौती देने की बात कही है. वहीं, टीएमसी के आरोपों पर पुलिस और प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है.