कोलकाता की मशहूर पार्क स्ट्रीट, जहां कई जाने-माने रेस्तरां हैं, वहां की फुटपाथ पर दशकों से कई परिवार बसे हुए हैं. यहां पीढ़ियों ने जन्म लिया, बड़े हुए और बुज़ुर्ग हुए; उन्होंने फुटपाथ पर ही अपने रोज़मर्रा के काम किए.
आस-पास की फुटपाथ भी ज़बरदस्त फ़र्क की ऐसी ही कहानी कहती हैं. एक तरफ़ आलीशान रेस्तरां की चमक-धमक है, तो दूसरी तरफ़ गंदगी और धूल के बीच पलते-बढ़ते परिवार.
ये परिवार रोज़ाना उनके पास से गुज़रने वाले लोगों की नज़र में नहीं आते थे, लेकिन एक शनिवार की सुबह पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल के बेदख़ली अभियान के दौरान इनकी व्यथा दुनिया के सामने आ गई.
दरअसल हुआ यूं कि पार्क स्ट्रीट पर एक महिला सड़क किनारे रखे चूल्हे पर अपने बच्चे के लिए दूध गर्म कर रही थी. तभी पुलिस, नगर पालिका के अधिकारियों और कैमरों के साथ मीडियाकर्मियों से घिरीं शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल वहां पहुंच गईं.
एक मंत्री और एक मां के बीच की बहस बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है.
अग्निमित्रा पॉल ने महिला से गुस्से में पूछा, "तुम पार्क स्ट्रीट के बीचों-बीच अपने बच्चे के लिए दूध कैसे गर्म कर रही हो?" फिर उसने दुकान के पास रखे लकड़ी के एक रैक की ओर इशारा किया, जिस पर कपड़े और राशन रखे और सूखने के लिए लटकाए गए थे.
"यह सब क्या है? क्या यही सब नया डेवलपमेंट है?" ऐसा कहते हुए पॉल ने रैक से सामान नीचे फेंक दिया. और कहा, "क्या यह परिवार बसाने की जगह है?"
महिला की ओर मुड़कर पॉल ने पूछा, "तुम्हें यहां परिवार बसाने का अधिकार किसने दिया?"
डरी महिला जब अपना सामान समेटकर जाने लगी, तो पॉल ने पूछा, "अगर तुम्हारा परिवार कोलकाता में है, तो तुम सड़कों पर क्यों रह रही हो?" जब महिला वहां से जाने लगी तो कई कैमरा वाले महिला के पीछे चल दिए.
पास ही एक बच्चा फुटपाथ पर खेल रहा था. जब ये हंगामा हुआ तो अफरा-तफरी के बीच एक दूसरी महिला बच्चे को उठाने के लिए तेज़ी से वहां पहुंची.
वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले लिया. मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जिस तरह से महिला से सवाल-जवाब किए, उसकी काफ़ी आलोचना हुई. कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या एक मां का यह कदम सही था कि वह उस दूध को छीन ले जिसे दूसरी मां सड़क पर अपने बच्चे के लिए तैयार कर रही थी.
फुटपाथ खाली कराने की कोशिश भले ही अच्छे इरादे से की गई हो, लेकिन इसका असर उल्टा हुआ. पॉल ने आखिरकार माना कि वह इस स्थिति को अलग तरह से संभाल सकती थीं.
हो सकता है कि मैंने चिल्लाकर बात की...
अग्निमित्रा पॉल ने एक वीडियो मैसेज में कहा, "हो सकता है कि मैंने चिल्लाकर बात की हो. शायद मुझे थोड़ी नरमी से बात करनी चाहिए थी और मामले को बेहतर ढंग से समझाना चाहिए था."
उन्होंने आगे कहा, "किसी बच्चे का दूध नहीं छीना गया. मैंने बस उन्हें वहां से हटने के लिए कहा था. बच्चा व्यस्त सड़क पर टहल रहा था. यह बात सिर्फ़ उसी जगह तक सीमित नहीं है; कोलकाता के कई हिस्सों में ऐसे सीन देखने को मिलते हैं. कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है. उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेता?"
महिला ने स्थानीय मीडिया को बताया कि अगर उनके पास रहने की जगह होती तो वे सड़कों पर नहीं रहतीं. महिला ने दावा किया कि उनके पति ने उन्हें और उनके बच्चे को उनके हाल पर छोड़ दिया था, और वे पिछले 50 सालों से वहीं रह रही थीं.
जल्द ही तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष महिला और उनके बच्चे से मिलने पहुंचे. इसके बाद सोमवार को ममता बनर्जी ने अपने फेसबुक पेज पर एक लाइव सेशन के दौरान इस परिवार के लिए अपने एक कार्यकर्ता के घर पर रहने की व्यवस्था करने, खाना उपलब्ध कराने और भविष्य में बच्चे की पढ़ाई-लिखाई की ज़िम्मेदारी लेने की पेशकश की.
बनर्जी पर पलटवार करते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "वह उन्हें अपने घर में क्यों नहीं रखतीं?"
सीएम ने कहा, "हलीसहर में ममता बनर्जी को खुद अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता के घर में घुसने नहीं दिया गया था. मृतक के परिवार ने मुझसे बात की. उन्होंने आर्थिक मदद स्वीकार की. मैंने उन्हें नौकरी की पेशकश की और उन्होंने ज़रूरी दस्तावेज़ भी उपलब्ध कराए."
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम शुभेंदु ने मंगलवार को पार्क स्ट्रीट में रहने वाली इस महिला से मुलाकात की और उस बच्चे को दुलार किया. वहां प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "उनका कहना है कि उन्हें CM और BJP पर भरोसा है. ममता बनर्जी उन्हें लोगों के ज़रिए रिश्वत देकर BJP के ख़िलाफ़ बोलने के लिए मनाने की कोशिश कर रही हैं."
बंगाल की ये घटना फुटपाथ से कब्ज़ा हटाने को लेकर शुरू हुई थी वो जल्द ही एक राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो गया. इससे न सिर्फ़ अतिक्रमण पर बल्कि उन लोगों की ज़िंदगी पर भी ध्यान गया जिन्होंने शहर के फ़ुटपाथों को ही अपना घर बना लिया है. यह मामला अब अलग-अलग दावों की होड़ में बदल गया है, जिसमें दोनों पक्ष उस महिला की स्थिति को अपने-अपने राजनीतिक नज़रिए से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.