बॉलीवुड में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपनी पहचान बनाने वाले रवि वलेचा ने अपनी जिंदगी का एक बेहद दर्दनाक राज साझा किया है. 70 और 80 के दशक में बड़े पर्दे पर नजर आने वाले रवि ने करीब 300 फिल्मों में काम किया. लेकिन शोबिज की इस चमक-दमक के पीछे उनके बचपन का एक ऐसा अनुभव छिपा था, जिसका दर्द वह सालों तक अपने अंदर दबाए रहे.
8 साल की उम्र में शुरू हुआ शोषण
'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में रवि ने बताया कि जब वह करीब 8 साल के थे, तभी उनके साथ यौन शोषण की घटनाएं शुरू हो गई थीं. उन्होंने बताया कि उनके साथ ऐसी घटनाएं करीब तीन बार हुईं. रवि कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन के बचपन वाले किरदार निभाने के लिए जाने जाते थे. वह 'कुली', 'अमर अकबर एंथनी', 'मिस्टर नटवरलाल', 'फकीरा', 'तुम्हारे बिना', 'खुद्दार', 'नास्तिक', 'परिचय', 'यादों की बारात', 'कर्ज', 'सीता और गीता' और 'देश प्रेमी' जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे हैं.
डबिंग स्टूडियो से शुरू हुआ सिलसिला,
रवि ने बताया कि पहली घटना एक डबिंग स्टूडियो में हुई थी. वहां इंडस्ट्री के एक उम्रदराज शख्स ने उन्हें अपनी गोद में बैठने के लिए कहा था. हालांकि, उनके लिए सबसे परेशान करने वाली घटना तब हुई, जब शूटिंग पर उनके साथ रहने के लिए एक युवा सेक्रेटरी को रखा गया. रवि के मुताबिक, वह शख्स टैक्सी और कार में सफर के दौरान उन्हें गलत तरीके से छूता था.
रवि ने बताया कि वह उस वक्त इतने छोटे थे कि समझ नहीं पाते थे कि इस स्थिति से कैसे निकलें. सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि वह किसी को कुछ बता भी नहीं सकते थे.
माता-पिता से भी नहीं कह पाए
उन्होंने कहा कि उन्हें रोज उसी व्यक्ति के साथ शूटिंग पर जाना पड़ता था. बाद में एक होटल के कमरे में भी उस सेक्रेटरी ने उनका शोषण किया. उस वक्त रवि की उम्र करीब 11 या 12 साल थी और उनके माता-पिता वहां मौजूद नहीं थे. उस दर्दनाक वक्त को याद करते हुए रवि ने सवाल किया- 'मैं क्या करता?'
रवि ने बताया कि उन्होंने इन घटनाओं के बारे में किसी को नहीं बताया, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके पास बात करने के लिए कोई नहीं है. उन्हें डर था कि शायद उनके माता-पिता भी उनकी बात पर भरोसा नहीं करेंगे.
उन्होंने इस दर्द को सालों तक अपने अंदर दबाए रखा. रवि के मुताबिक, बचपन में दबा यह गुस्सा धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया और बाद में इसका असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा.
एक्टिंग छोड़ी, फिर बनाया अपना बिजनेस
फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के बाद रवि ने एक्टिंग से दूरी बना ली. इसके बाद उन्होंने हॉस्पिटैलिटी बिजनेस में कदम रखा और वहां भी सफलता हासिल की. लेकिन बचपन का वह ट्रॉमा उनके साथ बना रहा. आखिरकार उन्होंने थेरेपी की मदद लेने का फैसला किया.
रवि ने बताया कि थेरेपी के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि बचपन की घटनाएं उनके दिमाग में कितनी गहराई तक दब चुकी थीं. उन्होंने अपने अंदर बहुत कुछ दफन कर रखा था, जो थेरेपी के दौरान धीरे-धीरे सामने आया. उनके मुताबिक, करीब 6 महीने की थेरेपी ने उनकी जिंदगी बदल दी. आज वह इस अनुभव के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं और उन्हें इसे लेकर किसी से बात करने में झिझक नहीं होती.
रवि की कहानी इस बात की भी याद दिलाती है कि बचपन में झेला गया शोषण लंबे समय तक इंसान के मन पर असर डाल सकता है. सही समय पर मदद और थेरेपी उस दर्द से बाहर निकलने में अहम भूमिका निभा सकती है.