कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी से कांग्रेस में वापस आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी अपने बचे हुए विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल होती हैं तो पार्टी पश्चिम बंगाल में उनके नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार है. चौधरी का ये बयान TMC के अंदर चल रही कथित उठापटक के बीच आया है.
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मौजूदा वक्त में किसी अलग राजनीतिक यूनिट की जरूरत नहीं है. उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के सामने संगठन से जुड़ी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. उन्होंने ममता बनर्जी से कांग्रेस में शामिल होने और पार्टी के साथ मिलकर बंगाल में काम करने की अपील की.
चौधरी ने ममता बनर्जी के कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक से जुड़े रहने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर ममता कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी मंच का हिस्सा हैं तो उन्हें कांग्रेस में वापस आने पर विचार करना चाहिए.
क्या बोले सौगत रॉय
TMC सांसद सौगत रॉय ने कांग्रेस नेता के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी को कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक म. उन्होंने कहा कि TMC फिलहाल एक अलग पार्टी है और पार्टी के किसी भी फैसले में अभिषेक बनर्जी की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह TMC के राष्ट्रीय महासचिव हैं.
बीजेपी प्रवक्ता देबजीत सरकार ने क्या कहा?
सौगत रॉय ने चौधरी की 'बोझ' वाली टिप्पणी पर भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी के बारे में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता. वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस और TMC के बीच सामने आई इस चर्चा पर प्रतिक्रिया दी है. पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि TMC का राजनीतिक उद्देश्य खत्म हो चुका है और अब कांग्रेस में वापसी की बात सामने आ रही है.
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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अगर कांग्रेस और TMC के बीच किसी तरह का विलय या बड़ा समझौता होता है, तो इससे पश्चिम बंगाल की विपक्षी राजनीति का समीकरण बदल सकता है. हालांकि, फिलहाल ममता बनर्जी या TMC की ओर से कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कोई फैसला घोषित नहीं किया गया है.
आपको बता दें कि ममता ने करीब तीन दशक पहले कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी. TMC ने 1998 में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में पश्चिम बंगाल की राजनीति में मजबूत स्थिति बनाई. 2011 में पार्टी ने वाम मोर्चे के 34 साल लंबे शासन को खत्म कर राज्य में सरकार बनाई.