उत्तर प्रदेश के मेरठ में जिला और सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में सुनवाई पूरी करते हुए मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है. इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली, जिसके दौरान अदालत में कुल 127 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों की गवाही दर्ज की गई. कोर्ट रूम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोषियों की पेशी हुई, जबकि फैसले के दौरान सौरभ की मां और भाई अदालत में मौजूद रहे.
वकील ने साझा की अदालत की अंदरूनी बातें
पीड़ित परिवार के वकील कृष्ण कुमार दुबे और विजय बहादुर ने फैसले के बाद मीडिया को बताया कि अदालत ने बीएनएस की धारा- 302 के तहत मौत की सजा के साथ 50,000 रुपये और धारा 238ए के तहत 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाभारत का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि अपराधी को उसके कुकर्मों के अनुसार सजा देना भी एक धर्म है. अभियोजन पक्ष के मजबूत और सटीक सबूतों के आधार पर कोर्ट ने इसे देश के लिए एक मिसाल कायम करने वाला फैसला बताया है.
हत्या का खौफनाक तरीका और दलीलें
वकील ने बताया कि हत्या का तरीका बेहद क्रूर और सोची-समझी साजिश का हिस्सा था. मुस्कान ने अपने पति सौरभ की हत्या के बाद शव के तीन टुकड़े कर दिए और साक्ष्य छुपाने के लिए उन्हें नीले ड्रम में भर दिया था. बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि हत्या को किसी ने नहीं देखा और आरोपी मुस्कान की बेटियां हैं, लेकिन मजबूत सबूतों के आगे ये सभी तर्क खारिज हो गए. सजा से पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान साहिल चुप रहा, जबकि मुस्कान ने अपने बच्चों का जिक्र कर गुहार लगाई.
पीड़ित परिवार और मां का दर्द
फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है और अदालत परिसर में 'भारत माता की जय' के नारे गूंजे. सौरभ के परिवार ने शुरू से ही आरोपियों के लिए फांसी की मांग की थी. वकील ने स्पष्ट किया कि कानून के नियमों के तहत दोषी महिला की बच्ची छह साल तक अपनी मां के साथ रह सकती है, लेकिन इस जघन्य अपराध ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है.