संभल हिंसा मामले में यूपी सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है. अब इस मामले के आरोपी मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है. इस फैसले के बाद संभल हिंसा केस में रासुका के तहत कार्रवाई झेलने वाले प्रमुख आरोपियों की संख्या और बढ़ गई है.
सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में संभल हिंसा मामले की विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सदन में पेश की जानी है. माना जा रहा है कि सरकार हिंसा के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट मैसेज देना चाहती है.
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने मोहम्मद वारिस को हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल माना है. इसी आधार पर उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाने का फैसला लिया गया. इससे पहले इसी मामले में मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम पर भी रासुका लगाया जा चुका है. यानी अब तक संभल हिंसा मामले में तीन प्रमुख आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हो चुकी है.
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एसआईटी की रिपोर्ट से पहले सरकार की यह कार्रवाई राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम मानी जा रही है. संभल हिंसा का मामला उत्तर प्रदेश की प्रमुख कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं में शामिल रहा है.

अब इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे अब विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा. माना जा रहा है कि रिपोर्ट में हिंसा की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, जांच के निष्कर्ष और जिम्मेदार लोगों से जुड़े अहम बिंदु शामिल होंगे.
क्या था संभल हिंसा का मामला?
संभल हिंसा नवंबर 2024 में उस समय हुई थी, जब यहां न्यायालय के आदेश पर मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वे का स्थानीय लोगों के एक समूह ने विरोध किया था. यह सर्वे उस याचिका के आधार पर कराया जा रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि मौजूदा जामा मस्जिद जिस जगह पर बनी है, वहां पहले हरिहर मंदिर था. सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए थे और विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था.
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, आगजनी और झड़पें हुईं थीं. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था. इस हिंसा में मौतें हुईं, सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए थे. घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन स्कूल बंद कर दिए थे. इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं गई थीं.