उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी और सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद इसे हटाया गया है. वहीं कार्रवाई को लेकर सियासत तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, AIMIM और BSP ने सवाल उठाए हैं, जबकि BJP का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के मुताबिक हुई है और इसे धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था. प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद करीब 315 वर्ग मीटर जमीन पर बनी हुई थी. इसे लेकर शिकायत की गई थी कि इसका निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से किया गया है.
मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा तो जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई. प्रशासन के मुताबिक, खसरा संख्या-539 सरकारी अभिलेखों में कचहरी/कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज है. इसी जमीन के करीब 315 वर्ग मीटर हिस्से पर मस्जिद का निर्माण किया गया था.
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को अवैध मानते हुए इसे 30 दिनों के भीतर हटाने का आदेश दिया था. मुस्लिम पक्ष की ओर से इस फैसले के खिलाफ अपील की गई, लेकिन अपील खारिज हो गई. इसके बाद शनिवार को प्रशासन ने मस्जिद को गिराने की कार्रवाई की.
इकरा हसन को सहारनपुर पहुंचने से पहले रोका
मस्जिद पर कार्रवाई की खबर के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई. तनाव को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट पर था. विपक्ष के कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए कार्रवाई का विरोध किया. कैराना से सांसद इकरा हसन भी सहारनपुर जाने के लिए निकलीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. इसके बाद उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया.
वहीं सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई को संविधान के लिए 'काला दिन' बताते हुए कहा कि इस मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा.
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए. विपक्ष का आरोप है कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मस्जिदों को जानबूझकर निशाना बना रही है. विपक्ष यह सवाल भी उठा रहा है कि मस्जिद को गिराने की इतनी जल्दी क्यों थी और प्रशासन ऊपरी अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार क्यों नहीं कर सकता था.
BJP बोली- धर्म के चश्मे से न देखें
दूसरी ओर BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है. पार्टी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और अदालत के आदेश के आधार पर की गई है. इसे किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. BSP प्रमुख मायावती ने भी मामले पर रिएक्शन देते हुए सरकार की कार्रवाई और उससे पैदा हुई स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं. मस्जिद गिराए जाने के बाद किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.