सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के धार्मिक कार्यक्रम में मची भगदड़ के दो साल बाद भी अपनों को खोने वालों का दर्द ताजा है. इस हादसे में 121 लोगों की मौत हो गई थी, इसके बावजूद कुछ अनुयायी अब भी उनमें अटूट विश्वास रखते हैं.
यह भगदड़ 2 जुलाई 2024 को सिकंद्राराऊ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत मुगलगढ़ी और फुलराई गांवों के बीच मची थी, जब भोले बाबा (सूरजपाल) के सत्संग के लिए भारी भीड़ जमा हुई थी. मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल थे. इस घटना में कई लोग घायल भी हुए थे. अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में 2.5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे, जबकि अनुमति 80,000 लोगों की ही थी.
सोखाना गांव के विनोद कुमार ने बताया कि भगदड़ में उन्होंने अपने परिवार की तीन पीढ़ियों को खो दिया, जिसमें उनकी मां जयवंती (70), पत्नी राजकुमारी (40) और बेटी भूमि (9) शामिल थी.
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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, 'मैं इसलिए जी रहा हूं क्योंकि जिंदगी तो चलानी ही है.'
वहीं, उसी गांव के राकेश कुमार जिन्होंने भगदड़ में अपनी 70 वर्षीय चाची सोन देवी को खो दिया था, लेकिन उनके लिए इस त्रासदी ने भोले बाबा में उनके विश्वास को कम नहीं किया है. उन्होंने कहा कि भोले बाबा में उनके परिवार का विश्वास बना हुआ है और वे उनके आश्रम जाते रहते हैं.
गले में बाबा की तस्वीर वाला लॉकेट पहने हुए उन्होंने कहा, 'भोले बाबा के आशीर्वाद से मेरा परिवार खुश और समृद्ध है.'
बता दें, हाथरस में भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड़ के मामले की सुनवाई जिला अदालत में चल रही है. अब तक अभियोजन पक्ष के 30 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं.
बचाव पक्ष के वकील मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि मामले की सुनवाई एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज संगीता शर्मा की अदालत में हो रही है.
पुलिस ने घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए भोले बाबा के मुख्य सहयोगी देव प्रकाश मधुकर सहित 11 आरोपियों के खिलाफ 3,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है.
सभी 11 आरोपियों में देव प्रकाश मधुकर, मुकेश कुमार, मेघ सिंह, संजय कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लदेते, उपेंद्र सिंह यादव, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार और दलवीर सिंह शामिल हैं. ये फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.