परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (PVS) में 13 साल तक संघर्ष करने वाले हरीश राणा का निधन हो गया है और उनके परिजन गुरुवार को अस्थियां संचित करने पहुंचे. हरीश के पिता अशोक राणा ने इस दुखद घड़ी में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सर्वोच्च न्यायालय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की. साल 2013 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान एक हादसे ने हरीश को बिस्तर पर ला दिया था, जिसके बाद से परिवार उनके मान और हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा था. अब परिवार अस्थियां लेकर हरिद्वार और फिर अपने पैतृक गांव हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गया है, जहां विधि-विधान से अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.
सीएम योगी और सुप्रीम कोर्ट का जताया आभार
अशोक राणा ने भावुक होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया, जिन्होंने जिलाधिकारी, जीडीए वीसी और कमिश्नर को उनके घर भेजकर सहायता का आश्वासन दिया. सरकार ने परिवार को 10 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है.
इसके साथ ही राणा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पारदीवाला और न्यायमूर्ति विश्वनाथन के मानवीय निर्देशों की सराहना की. उन्होंने ने एम्स (AIIMS) की मेडिकल टीम और अपनी कानूनी टीम का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस कठिन स्वास्थ्य और कानूनी जंग में उनका मार्गदर्शन किया.
पड़ोसियों ने निभाया इंसानियत का धर्म
दुख की इस घड़ी में मानवीय संवेदनाओं की भी एक मिसाल देखने को मिली. अशोक राणा ने बताया कि उनकी सोसाइटी के अरविंद कुमार जैसे पड़ोसियों ने रात-दिन उनके मेहमानों के लिए भोजन बनाया और सेवा की. चूंकि धार्मिक रीति-रिवाजों के कारण शोक संतप्त घर में चूल्हा नहीं जल सकता था, इसलिए पड़ोसियों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली. हिमाचल प्रदेश से आए करीबियों ने बताया कि परिवार ने पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए अभी तक अन्न ग्रहण नहीं किया है.
हरिद्वार से हिमाचल तक की अंतिम यात्रा
हरीश राणा की अस्थियों को हरिद्वार में विसर्जित करने के बाद परिवार हिमाचल प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव जाएगा. गांव में ही 13वीं का संस्कार और अन्य धार्मिक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी. 13 साल के लंबे और कष्टकारी इंतजार के बाद अब हरीश की आत्मा को शांति मिली है.